आईयूसीएन विश्व कांग्रेस 2025: 10 मुख्य बातें
आईयूसीएन विश्व कांग्रेस 2025: 10 मुख्य बातें

आईयूसीएन विश्व कांग्रेस 2025: 10 मुख्य बातें

आईयूसीएन (IUCN) विश्व संरक्षण कांग्रेस 2025 का आयोजन 9 से 15 अक्टूबर 2025 तक अबू धाबी में किया गया। इस वैश्विक मंच पर 1,400 से अधिक सदस्य संगठन एकत्र हुए, ताकि जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिक संरक्षण की रणनीतियों पर वैश्विक नीतियों को आकार दिया जा सके। हर चार साल में आयोजित होने वाली यह कांग्रेस जैव विविधता प्रशासन और संरक्षण प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण और निर्णयात्मक मंच मानी जाती है।

इस वर्ष की कांग्रेस में वैश्विक संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा, जलवायु समाधान और समुदाय आधारित संरक्षण को मुख्य रूप से प्राथमिकता दी गई। आइए जानते हैं इस सम्मेलन के 10 प्रमुख निष्कर्ष:


1. भारत की राष्ट्रीय रेड लिस्ट प्रणाली (2025–2030)

भारत ने 2025–2030 के लिए पांच-वर्षीय रोडमैप की घोषणा की है, जिसके तहत राष्ट्रीय स्तर पर “रेड लिस्टिंग” प्रणाली तैयार की जाएगी। यह आईयूसीएन रेड लिस्ट के अनुरूप होगी और इसमें 11,000 प्रजातियों का विलुप्ति जोखिम आकलन किया जाएगा, जिनमें 7,000 वनस्पतियाँ और 4,000 जीव-जंतु शामिल हैं। इससे भारत की जैव विविधता की सटीक स्थिति सामने आएगी और संरक्षण योजनाओं को बेहतर बनाया जा सकेगा।


2. पहला डुगोंग संरक्षण रिज़र्व

तमिलनाडु के पाल्क खाड़ी में भारत का पहला डुगोंग संरक्षण रिज़र्व मान्यता प्राप्त हुआ। डुगोंग समुद्री शाकाहारी स्तनधारी हैं और आईयूसीएन रेड लिस्ट में Vulnerable श्रेणी में आते हैं। यह रिज़र्व वैश्विक समुद्री जैव विविधता संरक्षण का मॉडल बन गया है। डुगोंग को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में संरक्षित किया गया है।


3. विवेक मेनन बने आईयूसीएन एसएससी के चेयर

वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के संस्थापक विवेक मेनन को IUCN Species Survival Commission (SSC) का चेयर चुना गया। वह पहले एशियाई व्यक्ति हैं जिन्होंने यह पद संभाला। एसएससी दुनिया भर की प्रजातियों के संरक्षण और रेड लिस्ट अपडेट पर विशेषज्ञ समूहों की निगरानी करता है।


4. सोनाली घोष को आईयूसीएन पुरस्कार

काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की निदेशक सोनाली घोष को WCPA–Kenton Miller Award से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन और सतत संरक्षण में नवाचार को मान्यता देता है।


5. जलवायु समाधान के रूप में वन्यजीव

कांग्रेस ने एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया जिसमें वन्यजीवों को “जलवायु सहयोगी” के रूप में मान्यता दी गई। अब वन्यजीव केवल विलुप्तप्राय नहीं बल्कि जलवायु लचीलापन और पारिस्थितिक तंत्र के आवश्यक घटक के रूप में देखे जाएंगे।


6. अबू धाबी कॉल टू एक्शन 2025

आईयूसीएन ने “अबू धाबी कॉल टू एक्शन” को अपनाया। यह एक 20-वर्षीय रणनीति है जिसका लक्ष्य एक न्यायसंगत विश्व बनाना है, जो प्रकृति को महत्व देता और संरक्षित करता है। इसके साथ ही Nature 2030: One Nature, One Future कार्यक्रम (2026–2029) भी लॉन्च किया गया, जो एसडीजी और वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों के अनुरूप है।


7. मोशन 42: जीवाश्म ईंधन चरणबद्ध समाप्ति

कांग्रेस ने पहली बार Motion 42 पारित की, जो कोयला, तेल और गैस के उत्पादन को न्यायसंगत रूप से समाप्त करने की मांग करता है। यह प्रस्ताव WWF और Fossil Fuel Non-Proliferation Treaty Initiative द्वारा समर्थित था। यह कदम जलवायु न्याय और टिकाऊ ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में साहसिक माना गया।


8. मोशन 108: वन्यजीव पालतू व्यापार का विनियमन

Motion 108 को स्वीकार किया गया, जो वन्यजीवों के पालतू व्यापार के लिए वैश्विक दिशानिर्देशों की मांग करता है। इसका उद्देश्य जैव विविधता हानि, जूनोटिक बीमारियों का खतरा और अवैध व्यापार को नियंत्रित करना है।


9. आदिवासी जनों का विश्व शिखर सम्मेलन

आईयूसीएन ने पहली बार World Summit of Indigenous Peoples and Nature (8–10 अक्टूबर) की मेजबानी की। सम्मेलन ने यह स्वीकार किया कि आदिवासी समुदाय संरक्षण के संरक्षक हैं, केवल हितधारक नहीं। उनके अनुभव और ज्ञान का संरक्षण प्रयासों में उपयोग वैश्विक स्तर पर महत्व रखता है।


10. आईयूसीएन वर्ल्ड हेरिटेज आउटलुक 2025

नवीनतम रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि प्राकृतिक विश्व धरोहर स्थलों में से 43% अब जलवायु परिवर्तन के खतरे में हैं। केवल 57% स्थलों की संरक्षण स्थिति सकारात्मक है, जो 2020 के 62% से कम है। यह आंकड़ा आक्रामक प्रजातियों, जलवायु प्रभावों और कमजोर शासन की गंभीर चुनौती को दर्शाता है।


🔹 डुगोंग पर विशेष ध्यान

डुगोंग शाकाहारी समुद्री स्तनधारी हैं जिन्हें समुद्री गाय कहा जाता है। ये मुख्य रूप से पाल्क खाड़ी, मन्नार की खाड़ी, कच्छ की खाड़ी और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में पाए जाते हैं। आईयूसीएन की लाल सूची में इन्हें संवेदनशील श्रेणी में शामिल किया गया है। इसके अलावा, इन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित किया गया है और CITES Appendix I में शामिल किया गया है, जिससे इनके व्यापार पर पूरी तरह प्रतिबंध है।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply