दिल्ली का जीएसडीपी पिछले दशक में सालाना 5.8% बढ़ा, आर्थिक विकास की मजबूत कहानी
दिल्ली का जीएसडीपी पिछले दशक में सालाना 5.8% बढ़ा, आर्थिक विकास की मजबूत कहानी

दिल्ली का जीएसडीपी पिछले दशक में सालाना 5.8% बढ़ा, आर्थिक विकास की मजबूत कहानी

दिल्ली सरकार के आर्थिक और सांख्यिकी निदेशालय द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट में राजधानी की आर्थिक प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2011–12 से 2024–25 के बीच दिल्ली ने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) की औसत वार्षिक वृद्धि दर 5.86% और प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि दर 7.99% दर्ज की है। यह उपलब्धि COVID-19 महामारी जैसे बाहरी झटकों के बावजूद हासिल हुई, जो दिल्ली की मजबूत आर्थिक नींव और विविध औद्योगिक-सेवा संरचना को दर्शाती है।

GSDP और NSDP में विकास

रिपोर्ट के अनुसार, स्थिर मूल्य (आधार वर्ष 2011–12) पर दिल्ली का GSDP 2011–12 में ₹3.44 लाख करोड़ था, जो 2024–25 में बढ़कर अनुमानित ₹7.11 लाख करोड़ हो गया। इस अवधि में औसतन 5.86% की वृद्धि दर्ज की गई। चालू मूल्यों पर GSDP और भी तेज़ी से बढ़ा, सालाना 10.34% की दर से, और 2024–25 में ₹12.15 लाख करोड़ से अधिक पहुँच गया।

शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद (NSDP), जिसे राज्य की आय भी कहा जाता है, 2011–12 में ₹3.14 लाख करोड़ से बढ़कर 2024–25 में ₹10.83 लाख करोड़ हो गया, यानी औसतन 10.14% की वार्षिक वृद्धि। NSDP में यह वृद्धि राजधानी की आर्थिक सघनता, निवेश आकर्षण और सेवा क्षेत्रों के विस्तार को दर्शाती है।

प्रति व्यक्ति आय: राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी

दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय देश में सबसे ऊँची बनी हुई है। 2024–25 में चालू मूल्यों पर यह ₹4,93,024 पहुँच गई, जो 2023–24 के ₹4,59,408 से 7.32% अधिक है। वास्तविक मूल्यों में यह ₹1,85,001 (2011–12) से बढ़कर ₹2,83,093 (2024–25) हो गई।

तुलना के लिए, राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय औसतन 4.75% की वार्षिक दर से बढ़कर 2024–25 में ₹1,14,710 रही। इस प्रकार, दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से लगभग 2.4 गुना अधिक है, जो राजधानी की समृद्धि और बेहतर रोजगार अवसरों का संकेत है।

महामारी का प्रभाव और तेज़ी से पुनर्प्राप्ति

COVID-19 महामारी ने वर्ष 2020–21 में दिल्ली की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया, और GSDP 8.96% सिकुड़ गया। हालांकि, इसके बाद तेज़ी से सुधार हुआ।

  • 2023–24 में वास्तविक GSDP वृद्धि 9.16% दर्ज की गई।

  • 2024–25 में अनुमानित वास्तविक वृद्धि 6.21% रही।

ये आँकड़े दर्शाते हैं कि दिल्ली की आर्थिक गतिविधियाँ न केवल COVID-पूर्व स्तर पर लौट आई हैं, बल्कि लगातार विस्तार कर रही हैं।

राष्ट्रीय GDP में हिस्सा और संरचनात्मक परिवर्तनों का संकेत

हालाँकि दिल्ली की अर्थव्यवस्था आकार में मज़बूत हुई है, लेकिन राष्ट्रीय GDP में इसका हिस्सा थोड़ा घटा है। 2011–12 में यह 3.94% था, जो 2024–25 में घटकर 3.79% रहने का अनुमान है। यह कमी मुख्यतः अन्य राज्यों की तेज़ आर्थिक वृद्धि और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तनों का परिणाम है।

विकास की संरचना और क्षेत्रीय प्रभाव

दिल्ली की आर्थिक वृद्धि में प्रमुख योगदान सेवा क्षेत्र, निर्माण, रियल एस्टेट, व्यापार और वित्तीय सेवाओं से आया है।

  • सेवा क्षेत्र: आईटी, वित्तीय सेवाएँ, स्वास्थ्य, शिक्षा और होटेल उद्योग ने GSDP में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

  • निर्माण और रियल एस्टेट: लगातार बढ़ते शहरी विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ने रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया।

  • व्यापार और वित्तीय क्षेत्र: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निवेश को आकर्षित करने में यह क्षेत्र अहम भूमिका निभाता है।

निष्कर्ष

दिल्ली की अर्थव्यवस्था ने पिछले दशक में 5.86% की औसत वार्षिक वृद्धि दर्ज करके यह साबित किया है कि यह केवल राजनीतिक राजधानी नहीं बल्कि आर्थिक हब भी है। प्रति व्यक्ति आय में राष्ट्रीय औसत से 2.4 गुना अधिक वृद्धि, महामारी के बावजूद तेज़ पुनर्प्राप्ति, और विविध आर्थिक संरचना राजधानी को स्थायीत्व और विकास के नए अवसर प्रदान करती है।

आने वाले वर्षों में निवेश, नवाचार और सतत विकास पर ध्यान देने से दिल्ली की आर्थिक प्रगति और भी तेज़ हो सकती है। यह कहानी राजधानी की समृद्धि, रोजगार सृजन और निवेश आकर्षण के लिए एक मजबूत संकेत के रूप में उभरती है।

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