भारत ने सेमीकंडक्टर उत्पादन और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने गुजरात के साणंद में देश की पहली पूर्ण-स्तरीय आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (OSAT) पायलट लाइन सुविधा का उद्घाटन किया।
यह सुविधा CG Semi द्वारा विकसित की गई है और इसे भारत के सेमीकंडक्टर रोडमैप में एक निर्णायक मील का पत्थर माना जा रहा है। यह न केवल “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को गति देती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी संप्रभुता को भी सुदृढ़ करती है।
वैश्विक संदर्भ और भारत की तैयारी
वर्तमान में वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर की मांग लगातार बढ़ रही है। 2032 तक अनुमान है कि लगभग 10 लाख पेशेवरों की कमी इस क्षेत्र में देखने को मिलेगी। ऐसे समय में भारत खुद को न केवल उत्पादन केंद्र बल्कि प्रतिभा आपूर्ति केंद्र के रूप में भी स्थापित करना चाहता है।
यह OSAT सुविधा भारत को वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला का एक अहम हिस्सा बनाएगी और देश को एंड-टू-एंड सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की दिशा में आगे बढ़ाएगी।
भारत सेमीकंडक्टर मिशन: निर्णायक मोड़
साणंद में शुरू हुई यह OSAT सुविधा इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
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यह पायलट लाइन चिप असेंबली, पैकेजिंग, परीक्षण और पोस्ट-टेस्ट सेवाओं को सपोर्ट करेगी।
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सुविधा 2026 तक वाणिज्यिक उत्पादन के लिए पूरी तरह तैयार होगी।
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OSAT लाइन पारंपरिक और उन्नत दोनों प्रकार की पैकेजिंग संसाधित करने में सक्षम होगी।
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अब तक ISM के तहत 10 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी जा चुकी है, जिससे भारत का सेमीकंडक्टर रोडमैप स्पष्ट रूप से आकार ले रहा है।
गुजरात: भारत का ‘सिलिकॉन राज्य’
गुजरात तेजी से भारत का सेमीकंडक्टर हब बनकर उभर रहा है। राज्य की अनुकूल नीतियाँ, मजबूत अवसंरचना और नेतृत्व ने इसे इस क्रांति का केंद्र बना दिया है।
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CG Semi ने अगले पाँच वर्षों में लगभग ₹7,600 करोड़ (870 मिलियन डॉलर) निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
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इसके तहत दो संयंत्र बनाए जा रहे हैं – G1 और G2।
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G1 (उद्घाटन किया गया संयंत्र) की क्षमता होगी 5 लाख यूनिट प्रतिदिन।
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G2 (निर्माणाधीन) संयंत्र की क्षमता होगी 1.45 करोड़ यूनिट प्रतिदिन (2026 तक)।
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इन संयंत्रों से 5,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।
गुजरात इस प्रकार भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा का नेतृत्व कर रहा है और देश को वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में सशक्त बनाने में भूमिका निभा रहा है।
प्रतिभा और शिक्षा को सशक्त बनाना
भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए मानव संसाधन विकास को अपनी प्राथमिकता बनाया है।
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सरकार ने 270 विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी कर उन्हें चिप डिज़ाइन टूल्स उपलब्ध कराए हैं।
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2025 में इन टूल्स का उपयोग 1.2 करोड़ बार किया गया।
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छात्रों द्वारा डिज़ाइन की गई 20 चिप्स को मोहाली स्थित SCL (Semi-Conductor Laboratory) में निर्मित किया गया।
इस पहल का उद्देश्य 2032 तक अनुमानित 10 लाख पेशेवरों की वैश्विक कमी को पूरा करना और भारत को दुनिया का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर प्रतिभा आधार बनाना है।
रणनीतिक औद्योगिक सहयोग
CG Semi एक जॉइंट वेंचर है, जिसमें शामिल हैं:
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सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशन्स (मुरुगप्पा समूह)
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रेनेसास इलेक्ट्रॉनिक्स (जापान)
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स्टार्स माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स (थाईलैंड)
यह साझेदारी भारत में वैश्विक विशेषज्ञता और तकनीक हस्तांतरण सुनिश्चित करेगी। भारतीय इंजीनियरों और तकनीशियनों को मलेशिया में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया है ताकि वे बड़े पैमाने पर चिप असेंबली और टेस्टिंग में दक्ष हो सकें।
संयंत्र में शामिल हैं:
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हाई-यील्ड उपकरण
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MES (Manufacturing Execution System) द्वारा ऑटोमेशन और ट्रेसबिलिटी
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विफलता विश्लेषण और विश्वसनीयता परीक्षण प्रयोगशालाएँ
फिलहाल संयंत्र ISO 9001 और IATF 16949 प्रमाणन की प्रक्रिया में है और जल्द ही ग्राहक योग्यता परीक्षण रन शुरू होंगे।
निष्कर्ष
गुजरात के साणंद में पहली पूर्ण-स्तरीय OSAT पायलट लाइन का उद्घाटन भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा में ऐतिहासिक क्षण है। यह पहल न केवल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को बल देती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी संप्रभुता और प्रतिस्पर्धात्मकता को भी मजबूत करती है।
आने वाले वर्षों में इस सुविधा से नवाचार, रोजगार और प्रतिभा विकास को गति मिलेगी। भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का अहम भागीदार बनने की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है।
