वैश्विक डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम तेजी से बदल रहा है। आज के दौर में लोग सिर्फ घरेलू नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी तेज़ और सुरक्षित लेनदेन की उम्मीद रखते हैं। इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, इन्फोसिस ने मास्टरकार्ड के साथ वैश्विक सीमा-पार भुगतान (cross-border payments) को और बेहतर बनाने के लिए एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है।
यह सहयोग, मास्टरकार्ड के उन्नत मनी ट्रांसफर पोर्टफोलियो ‘Mastercard Move’ को इन्फोसिस फिनेकल (EdgeVerve Systems का हिस्सा) में एकीकृत करता है। इस इंटीग्रेशन का मकसद दुनिया भर के वित्तीय संस्थानों को 200 से अधिक देशों और 150 से अधिक मुद्राओं तक आसान पहुँच प्रदान करना है। नतीजतन, बैंक और वित्तीय संस्थाएँ अपने ग्राहकों को तेज़, सुरक्षित और स्केलेबल सीमा-पार भुगतान सेवाएँ उपलब्ध करा पाएँगी।
मास्टरकार्ड मूव (Mastercard Move) क्या है?
मास्टरकार्ड मूव एक एडवांस्ड मनी ट्रांसफर समाधान है, जिसे घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों प्रकार के लेनदेन को लगभग वास्तविक समय (near real-time) में संभव बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका उद्देश्य केवल व्यक्तियों को ही नहीं, बल्कि बैंकों, गैर-बैंक वित्तीय संस्थानों और भुगतान प्रदाताओं तक सेवाएँ पहुँचाना है।
मास्टरकार्ड मूव का कवरेज वैश्विक स्तर पर बेहद व्यापक है। वर्तमान में यह दुनिया की 95% से अधिक बैंकिंग आबादी तक पहुँच बनाता है। इसके ज़रिए—
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बैंक और गैर-बैंक वित्तीय संस्थान
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प्रत्यक्ष भुगतान प्रदाता
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कॉर्पोरेट और खुदरा ग्राहक
सभी सुरक्षित, पारदर्शी और तेज़ी से लेनदेन कर सकते हैं।
इन्फोसिस साझेदारी का महत्व
मास्टरकार्ड मूव को इन्फोसिस फिनेकल के composable banking platform में इंटीग्रेट करना एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों को बड़े पैमाने पर चलने वाली परियोजनाओं में लगने वाला समय, लागत और संसाधन काफी कम होंगे।
इस साझेदारी से होने वाले प्रमुख लाभ:
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तेज़ी से पहुँच – वित्तीय संस्थान मास्टरकार्ड मूव की क्षमताओं तक तुरंत और सहज रूप से पहुँच पाएँगे।
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बेहतर ग्राहक अनुभव – ग्राहकों को तेज़, भरोसेमंद और सुविधाजनक भुगतान सेवाएँ मिलेंगी।
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जोखिम और लागत नियंत्रण – संस्थाएँ अपने लेनदेन से जुड़े जोखिम प्रबंधन, लागत नियंत्रण और तरलता प्रबंधन को और मज़बूत बना पाएँगी।
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डिजिटल बैंकिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा – रियल-टाइम सीमा-पार सेवाओं से डिजिटल बैंकिंग का दायरा और विश्वास दोनों बढ़ेंगे।
इन्फोसिस अधिकारियों के मुताबिक, आज डिजिटल भुगतान बैंकिंग सेक्टर का प्राथमिक “customer touchpoint” बन गया है, और यह दीर्घकालिक ग्राहक निष्ठा (loyalty) विकसित करने में अहम भूमिका निभाता है।
वैश्विक प्रेषण (Remittance) का परिप्रेक्ष्य
सीमा-पार भुगतान की बात करते समय, रेमिटेंस (Remittance) यानी विदेश से आने वाले धन प्रेषण को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। मास्टरकार्ड की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर रेमिटेंस तेज़ी से बढ़ रहा है। इसके पीछे कई कारण हैं:
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प्रवासन (Migration): विदेशों में काम करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
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डिजिटल अपनापन (Digital Adoption): लोग तेजी से ऑनलाइन और डिजिटल पेमेंट्स अपना रहे हैं।
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आर्थिक विकास (Economic Development): विकासशील देशों में वित्तीय सेवाओं की मांग बढ़ रही है।
एशिया दुनिया का सबसे बड़ा रेमिटेंस प्राप्त करने वाला क्षेत्र है। विशेषकर भारत और उसके पड़ोसी देशों के लिए यह साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि इससे उन्हें तेज़ और सुरक्षित भुगतान सेवाओं का लाभ मिलेगा।
यह साझेदारी क्यों महत्वपूर्ण है?
आज जब वैश्विक स्तर पर फिनटेक इनोवेशन तेजी से हो रहा है, तब भुगतान सेवाओं को सीमलेस और विश्वसनीय बनाना एक बड़ी चुनौती है। मास्टरकार्ड और इन्फोसिस की यह साझेदारी इस चुनौती का समाधान देती है।
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बैंकों के लिए यह एक “plug-and-play” समाधान है, जिससे वे बिना जटिल इंफ्रास्ट्रक्चर के अपने ग्राहकों को विश्वस्तरीय सेवाएँ दे पाएँगे।
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ग्राहकों को अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन में अब न केवल गति मिलेगी बल्कि सुरक्षा और पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।
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भारत जैसे देशों के लिए, जो विश्व का सबसे बड़ा रेमिटेंस प्राप्त करने वाला देश है, यह साझेदारी वित्तीय समावेशन और आर्थिक विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
निष्कर्ष
मास्टरकार्ड और इन्फोसिस की यह रणनीतिक साझेदारी वैश्विक सीमा-पार भुगतान परिदृश्य में एक नई क्रांति ला सकती है। यह न केवल बैंकों और वित्तीय संस्थानों को आधुनिक और कुशल समाधान प्रदान करेगी, बल्कि ग्राहकों के अनुभव को भी पूरी तरह बदल देगी।
डिजिटल युग में, जहां भुगतान अब सिर्फ एक लेनदेन नहीं बल्कि भरोसे का प्रतीक है, ऐसी साझेदारियाँ भविष्य की बैंकिंग और फिनटेक को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएँगी।

