15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन का संयुक्त वक्तव्य
15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन का संयुक्त वक्तव्य

15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन का संयुक्त वक्तव्य

वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में भारत और जापान ने अपनी गहरी मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊँचाई पर पहुँचाते हुए सुरक्षित, नवोन्मेषी और समृद्ध भविष्य की रूपरेखा पेश की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 29–30 अगस्त 2025 की जापान यात्रा के दौरान हुए 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे अहम क्षेत्रों में कई बड़े समझौते किए। इस सम्मेलन की मेज़बानी जापान के प्रधानमंत्री इशिबा शिगेरु ने की।


एक दशक की साझेदारी का सफर

दोनों देशों ने पिछले दस वर्षों में लोकतांत्रिक मूल्यों, सांस्कृतिक जुड़ाव और साझा रणनीतिक दृष्टिकोण पर आधारित अपने रिश्तों को मज़बूत किया है। आज भारत-जापान संबंध एशिया की सबसे गतिशील साझेदारियों में गिने जाते हैं। 70 से अधिक संवाद तंत्रों के माध्यम से यह सहयोग समुद्री सुरक्षा, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, निवेश, नवाचार और शिक्षा जैसे अनेक क्षेत्रों तक विस्तृत हो चुका है।


सहयोग के तीन मुख्य स्तंभ

1. रक्षा और सुरक्षा

  • दोनों देशों ने एक संयुक्त सुरक्षा घोषणा-पत्र अपनाया।

  • वीर गार्जियन, तरंग शक्ति और मिलन जैसे अभ्यासों से सैन्य सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी को और बढ़ाने पर सहमति बनी।

  • रक्षा प्रौद्योगिकी विकास और समुद्री सुरक्षा में संयुक्त प्रतिबद्धता जताई गई।

2. आर्थिक और तकनीकी साझेदारी

  • भारत-जापान आर्थिक सुरक्षा पहल की शुरुआत हुई, जिसका फोकस सेमीकंडक्टर, दूरसंचार, फार्मा और सप्लाई-चेन लचीलापन पर रहेगा।

  • महत्वपूर्ण खनिजों पर एक MoU साइन हुआ।

  • भारत में जापानी निजी निवेश का नया लक्ष्य तय किया गया – ¥10 ट्रिलियन, जो पहले के लक्ष्य से दोगुना है।

  • CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) समझौते के उन्नयन से व्यापारिक रिश्तों को और गहराई मिलेगी।

3. जन-जन और प्रतिभा आदान-प्रदान

  • नई मानव संसाधन आदान-प्रदान कार्ययोजना के तहत अगले पाँच साल में 5 लाख लोगों का आदान-प्रदान होगा, जिनमें से 50,000 भारतीय पेशेवर जापान जाएंगे।

  • जापानी भाषा और मैन्युफैक्चरिंग कौशल शिक्षा का विस्तार करने पर सहमति बनी।

  • फुकुओका में भारत का नया वाणिज्य दूतावास खोला जाएगा।


डिजिटल और एआई में नई दिशा

भारत-जापान ने डिजिटल क्षेत्र में भी साझेदारी को और गहरा किया।

  • डिजिटल साझेदारी 2.0 का शुभारंभ किया गया।

  • एआई सहयोग पहल के तहत दोनों देश AI और LLMs पर संयुक्त अनुसंधान करेंगे।

  • भारत में डेटा सेंटर, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और संयुक्त R&D कार्यक्रमों पर काम होगा।

  • डिजिटल टैलेंट एक्सचेंज और उद्योग-शिक्षा मंच के जरिए युवाओं को नई दिशा मिलेगी।


स्वच्छ ऊर्जा और अवसंरचना सहयोग

  • दोनों देशों ने स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी और हाइड्रोजन-अमोनिया पर संयुक्त घोषणा की।

  • मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) परियोजना में शिंकानसेन E10 ट्रेनें और उन्नत सिग्नलिंग सिस्टम का उपयोग होगा।

  • संयुक्त ऋण व्यवस्था (JCM) के तहत सतत विकास और अवसंरचना सहयोग को प्रोत्साहन दिया जाएगा।


वैश्विक और क्षेत्रीय सहयोग

भारत और जापान ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ASEAN केंद्रीयता, FOIP (Free and Open Indo-Pacific) दृष्टि और QUAD सहयोग को समर्थन देने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, एक्ट ईस्ट फोरम और अफ्रीका विकास पहल में मिलकर काम करने का संकल्प लिया।


वैश्विक मुद्दों पर साझा रुख

  • दोनों देशों ने यूक्रेन और गाज़ा संकट पर शांति, कूटनीति और मानवीय सहायता का समर्थन किया।

  • उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण और अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की।

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार पर तात्कालिकता जताई और एक-दूसरे की स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का समर्थन किया।


उपलब्धियाँ और आगे की राह

  • वर्ष 2027 में भारत-जापान राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ विशेष आयोजनों के साथ मनाई जाएगी।

  • 2025 को भारत-जापान विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार आदान-प्रदान वर्ष घोषित किया गया।

  • LUPEX चंद्र मिशन और उच्च शिक्षा कार्यक्रम इस सहयोग की नई मिसाल बनेंगे।


निष्कर्ष

15वाँ भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन यह साबित करता है कि दोनों देश केवल रणनीतिक साझेदार ही नहीं, बल्कि भविष्य के वैश्विक नेतृत्व के अहम स्तंभ भी हैं। रक्षा से लेकर डिजिटल नवाचार, ऊर्जा से लेकर शिक्षा और संस्कृति तक—भारत और जापान का यह सहयोग एशिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए स्थिरता और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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