स्वतंत्रता के बाद भारत ने औद्योगिकीकरण, बुनियादी ढांचे के निर्माण, सामाजिक समावेशन, क्षेत्रीय संतुलन और आर्थिक प्रगति की दिशा में कई चुनौतियों का सामना किया। इन सभी क्षेत्रों में सार्वजनिक उपक्रमों ने अग्रणी भूमिका निभाई।
जहाँ एक ओर इन्होंने देश को ऊर्जा, खनन, इस्पात, दूरसंचार और परिवहन जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने की नींव रखी, वहीं दूसरी ओर रोजगार सृजन और सामाजिक समावेशन के माध्यम से आम नागरिकों के जीवन में भी बदलाव लाया।
समय के साथ बदलती परिस्थितियों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच, सार्वजनिक उपक्रमों ने अपनी कार्यशैली और रणनीतियों को भी आधुनिक बनाया, लेकिन राष्ट्र निर्माण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सदैव कायम रही।
सीपीएसई की उपलब्धियाँ और योगदान
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में सार्वजनिक उपक्रमों के बहुआयामी योगदान को रेखांकित किया। इनमें प्रमुख हैं:
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आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान में योगदान
घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने और विदेशी निर्भरता कम करने में सीपीएसई लगातार आगे रहे हैं। -
रक्षा क्षेत्र में नवाचार
स्वदेशी रक्षा तकनीक के विकास में सीपीएसई ने उल्लेखनीय कार्य किया है। उदाहरणस्वरूप, आकाशतीर प्रणाली (Akashteer System), जिसे ऑपरेशन सिन्दूर में सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया, आत्मनिर्भर भारत का उत्कृष्ट प्रतीक है। -
कृषि, खनन और उद्योग क्षेत्र में योगदान
कृषि से लेकर खनन, अन्वेषण, विनिर्माण, प्रसंस्करण और सेवाओं तक, सार्वजनिक उपक्रमों ने भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। -
उच्च कॉरपोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता
केवल लाभ अर्जित करना ही लक्ष्य नहीं रहा, बल्कि नैतिकता, पारदर्शिता और सामाजिक जिम्मेदारी के मानकों को भी बराबरी से निभाया गया।
स्कोप एमिनेंस अवॉर्ड्स: उत्कृष्टता का उत्सव
स्कोप एमिनेंस अवॉर्ड्स सार्वजनिक क्षेत्र के उन प्रयासों को सम्मानित करते हैं, जो नवाचार, कॉरपोरेट गवर्नेंस, सतत विकास और सामाजिक जिम्मेदारी के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनाते हैं।
इन पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया भी बेहद कठोर है। इसमें केवल वित्तीय प्रदर्शन ही नहीं देखा जाता, बल्कि यह भी मूल्यांकन किया जाता है कि संबंधित सार्वजनिक उपक्रम:
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शासन में पारदर्शिता कितनी सुनिश्चित करता है,
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सतत विकास के लक्ष्यों में कितना योगदान देता है,
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और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए क्या प्रयास करता है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि यह पहल सिर्फ आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज कल्याण, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और नैतिक व्यावसायिक आचरण को भी समान महत्व देती है।
विकसित भारत 2047 और सार्वजनिक उपक्रमों की भूमिका
भारत वर्ष 2047 तक “विकसित भारत” बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में सार्वजनिक उपक्रमों की भूमिका निर्णायक होगी।
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ऊर्जा सुरक्षा,
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रक्षा उत्पादन,
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डिजिटल इंडिया और हरित ऊर्जा (Green Energy) जैसे क्षेत्रों में उनकी सक्रिय भागीदारी,
भारत की आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अहम योगदान देगी।
राष्ट्रपति ने इस अवसर पर यह भी कहा कि सार्वजनिक उपक्रमों को समय के साथ अपनी कार्यसंस्कृति और तकनीकी क्षमता को निरंतर उन्नत करते रहना होगा, ताकि वे नई चुनौतियों का सामना कर सकें।
निष्कर्ष
स्कोप एमिनेंस अवॉर्ड्स 2022–23 केवल एक पुरस्कार समारोह नहीं, बल्कि यह उस यात्रा का उत्सव है, जिसमें सार्वजनिक उपक्रमों ने स्वतंत्रता के बाद से लेकर आज तक भारत को एक मज़बूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने में योगदान दिया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह संदेश स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में सीपीएसई न केवल आर्थिक विकास को गति देंगे, बल्कि सामाजिक न्याय, पर्यावरणीय संतुलन और नैतिक व्यावसायिक आचरण के माध्यम से भारत को “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य तक ले जाने में मार्गदर्शक भूमिका निभाएँगे।

