भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मज़बूत होती जा रही है और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इंदौर में आयोजित एक वित्तीय समावेशन कार्यक्रम में यह घोषणा की कि भारत आने वाले समय में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस उपलब्धि के पीछे प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) जैसी पहल ने अहम भूमिका निभाई है, जिसने आम नागरिकों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़कर देश की आर्थिक प्रगति को नई दिशा दी है।
जनधन योजना: समावेशी विकास की मजबूत नींव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में जनधन योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य हर नागरिक को बैंकिंग सेवाओं तक पहुँच दिलाना था, ताकि देश के ग्रामीण और वंचित तबके को भी औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाया जा सके।
आज यह योजना 55 करोड़ से अधिक खातों तक पहुँच चुकी है। इन खातों के माध्यम से नागरिकों को कई तरह की वित्तीय सेवाएँ उपलब्ध कराई गई हैं, जिनमें शामिल हैं:
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बचत खाता सुविधा
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पेंशन योजनाओं तक पहुँच
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छोटे ऋण (क्रेडिट) की सुविधा
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बीमा कवरेज
यह पहल न केवल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देती है बल्कि ग्रामीण और शहरी गरीब तबके को आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी देती है। RBI गवर्नर के अनुसार, जनधन योजना ने देश की आर्थिक प्रगति को एक मजबूत सामाजिक और वित्तीय आधार प्रदान किया है।
भारत की GDP वृद्धि: नई ऊँचाइयों की ओर
वित्त वर्ष 2025–26 की पहली तिमाही (अप्रैल–जून) में भारत की GDP वृद्धि दर 7.8% दर्ज की गई है, जो पिछले पाँच तिमाहियों में सबसे अधिक है।
यह प्रदर्शन वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक लचीलापन (Resilience) को दर्शाता है। जहाँ एक ओर दुनिया भर में वित्तीय अनिश्चितताएँ और व्यापारिक तनाव बने हुए हैं, वहीं भारत अपने विकास पथ पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत पहले ही दुनिया की पाँच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और मौजूदा गति से यह जल्द ही शीर्ष तीन वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में प्रवेश करेगा।
वित्तीय अवसंरचना को मजबूत करने की पहल
भारत सरकार और RBI लगातार वित्तीय अवसंरचना को मज़बूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में ‘संतृप्ति शिविर’ अभियान चलाया जा रहा है।
यह अभियान 1 जुलाई से 30 सितंबर तक चलेगा और इसके मुख्य उद्देश्य हैं:
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नए जनधन खाते खोलना
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नागरिकों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में नामांकित करना
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KYC अपडेट करना
बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे सरकारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर इस अभियान को जमीनी स्तर तक पहुँचाएँ। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश का हर नागरिक वित्तीय सुरक्षा और सेवाओं से जुड़ा हो।
डिजिटल साक्षरता और सुरक्षा पर ज़ोर
RBI गवर्नर ने अपने संबोधन में ‘म्यूल अकाउंट्स’ (वे खाते जिनका अवैध लेन-देन के लिए दुरुपयोग किया जाता है) पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने जनधन खाता धारकों से अपील की कि वे अपने खातों का KYC पूरा करें और सतर्क रहें, ताकि धोखाधड़ी से बचा जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को डिजिटल बैंकिंग और UPI आधारित लेन-देन को और अधिक प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। डिजिटल साक्षरता बढ़ाने से न केवल लेन-देन सुरक्षित और तेज़ होंगे, बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में वित्तीय पहुँच भी आसान होगी।
भारत की आर्थिक यात्रा: आत्मनिर्भरता की ओर
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी आर्थिक स्थिति को मज़बूत किया है। इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल अर्थव्यवस्था, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में तेज़ प्रगति हुई है।
जनधन योजना, UPI, डिजिटल भुगतान प्रणाली और MSME सेक्टर को दिए गए प्रोत्साहन ने भारतीय अर्थव्यवस्था को गति और स्थिरता प्रदान की है। आज भारत न केवल निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य है, बल्कि नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम का भी वैश्विक केंद्र बन रहा है।

