अरुंधति रॉय की संस्मरणात्मक पुस्तक ‘मदर मैरी कम टू मी’ का विमोचन
अरुंधति रॉय की संस्मरणात्मक पुस्तक ‘मदर मैरी कम टू मी’ का विमोचन

अरुंधति रॉय की संस्मरणात्मक पुस्तक ‘मदर मैरी कम टू मी’ का विमोचन

अरुंधति रॉय, जिन्हें उनके बुकर पुरस्कार विजेता उपन्यास The God of Small Things (1997) के लिए विश्वभर में जाना जाता है, वर्ष 2025 में एक गहराई से व्यक्तिगत और आत्ममंथनकारी कृति लेकर लौटी हैं। उनका नया संस्मरण Mother Mary Comes to Me 2 सितंबर 2025 को प्रकाशित हुआ। यह 374 पन्नों की किताब उतनी ही साहसिक है जितनी भावनात्मक और काव्यात्मक। इसमें रॉय ने अपनी माँ मैरी रॉय – एक प्रख्यात शिक्षाविद्, नारी अधिकारों की पैरोकार और सामाजिक बदलाव की प्रखर आवाज़ – के साथ अपने जटिल संबंधों को आत्मीय रूप से दर्ज किया है।

यह संस्मरण न केवल उनके जीवन की कठिनाइयों और माँ-बेटी के बीच तनावपूर्ण रिश्तों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे पीड़ा और प्रतिभा साथ-साथ पनप सकते हैं और एक लेखिका के व्यक्तित्व को गढ़ सकते हैं।


अस्थिर स्वभाव वाली माँ का चित्रण

कोट्टायम (केरल) में पल्लीकूडम स्कूल की संस्थापक मैरी रॉय भारतीय शिक्षा जगत और महिला अधिकार आंदोलन की एक प्रमुख शख्सियत रही हैं। अरुंधति रॉय उन्हें इस संस्मरण में केवल एक माँ के रूप में नहीं, बल्कि एक हमेशा उपस्थित, प्रभावशाली और अक्सर हावी रहने वाली ताक़त के रूप में प्रस्तुत करती हैं।

रॉय साहसपूर्वक उन क्षणों को साझा करती हैं जब उनकी माँ ने गर्भपात कराने का प्रयास किया और बाद में उन्हें ताना मारते हुए कहा – “मैं उनके असफल गर्भपात का परिणाम हूँ।” यह बयान न केवल पुस्तक का सबसे तीखा भावनात्मक क्षण है, बल्कि माँ-बेटी के रिश्ते की जटिलता को भी उजागर करता है।

फिर भी, यह संस्मरण प्रतिशोध का दस्तावेज़ नहीं है। बल्कि यह उन विरोधाभासों का चित्रण है जहाँ चोट और प्रशंसा, दूरी और लगाव, गुस्सा और आदर एक साथ मौजूद हैं।


डरावनी बचपन की यादें

पुस्तक में रॉय अपने बचपन के अंधेरे पलों को चौंकाने वाली ईमानदारी से लिखती हैं। कभी उन्हें घर और गाड़ी से बाहर निकाल देने की घटनाएँ, तो कभी चेचक के दाग़दार पेट दिखाने पर थप्पड़ खाने की यादें—ये सब पाठकों को उनके बचपन की भयावह मानसिक दुनिया से परिचित कराती हैं।

इसके बावजूद, घर में कहानियों और सीखने का माहौल भी था। रॉय मानती हैं कि माँ की कठोरता के साथ-साथ उनकी महत्वाकांक्षा और बौद्धिक शक्ति ने उनकी कल्पना और लेखन प्रतिभा को आकार दिया। वह खुद को माँ की “वीर वाद्य-शिशु” कहती हैं—एक उपाधि जो एक गंभीर रूप से अस्थमाग्रस्त अभिभावक के साथ बड़े होने से मिली।


कला, अपमान और द्वंद्व

इस संस्मरण की विशेषता यह है कि रॉय अपनी माँ के बारे में किसी एकतरफ़ा दृष्टिकोण को थोपती नहीं हैं। मैरी रॉय उनके लिए अपमानजनक भी हैं और प्रेरणादायी भी, दमनकारी भी और सशक्त बनाने वाली भी

वह याद करती हैं कि कैसे वही माँ जो कभी उन्हें कठोर शब्दों से डाँटती थी, वही उन्हें दोस्तोयेव्स्की पढ़ाती थी और उनकी कल्पना को उड़ान देती थी। इस द्वंद्व को वह बेहद मार्मिक शब्दों में संक्षेपित करती हैं:
“आप साही को गले नहीं लगा सकते। फ़ोन पर भी नहीं।”

यह वाक्य पूरे संस्मरण का सार है—माँ के साथ दूरी और निकटता के बीच लगातार जूझते रिश्ते का प्रतीक।


साहित्यिक और भावनात्मक गहराई

Mother Mary Comes to Me का गद्य सरल, काव्यात्मक और आत्मचिंतनकारी है। कई हिस्सों में यह संस्मरण उपन्यास-सा प्रतीत होता है। स्वयं रॉय पाठकों से आग्रह करती हैं कि वे इसे उपन्यास की तरह पढ़ें:

“इस पुस्तक को वैसे ही पढ़िए जैसे आप एक उपन्यास पढ़ते हैं। यह कोई बड़ा दावा नहीं करती। लेकिन फिर, इससे बड़ा दावा कोई हो भी नहीं सकता।”

विशेष रूप से The God of Small Things शीर्षक अध्याय में, वह लिखती हैं कि कैसे उन्होंने व्यक्तिगत उथल-पुथल के बीच चार वर्षों में अपना पहला उपन्यास पूरा किया। यह उनके लेखन और जीवन के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करता है।


शोक एक उत्प्रेरक के रूप में

इस संस्मरण का आरंभ एक गहरे व्यक्तिगत शोक से हुआ। 1 सितम्बर 2022 को मैरी रॉय का निधन हुआ। इसके बाद अरुंधति रॉय ने महसूस किया कि वह अपनी माँ को कभी पूरी तरह समझ नहीं पाईं।

इस पुस्तक में शोक को छुपाया नहीं गया है, बल्कि उसे पूरी ईमानदारी से जीया गया है। लेखिका स्वीकार करती हैं कि यह संस्मरण लिखना कभी-कभी उनके छोटे-से स्व के साथ विश्वासघात जैसा लगा। फिर भी, उन्होंने आत्म-सुरक्षा से अधिक साहित्यिक सत्य को चुना।


साहित्य और जीवन के लिए अनिवार्य पाठ

रॉय की यह कृति केवल व्यक्तिगत संस्मरण नहीं है, बल्कि एक ऐसी गवाही है जो यह दिखाती है कि परिवार, समाज और साहित्य के बीच गहरे रिश्ते कैसे व्यक्ति की पहचान को आकार देते हैं।

यहाँ हमें अरुंधति रॉय एक ऐसी बेटी के रूप में दिखाई देती हैं, जो अपनी माँ से गुस्सा भी रखती है, उनसे दूरी भी चाहती है, लेकिन अंततः उनकी छाया और विरासत से कभी मुक्त नहीं हो पाती।


अन्य साहित्यिक कृतियों से तुलना

2025 में प्रकाशित जीत थयिल के संस्मरण Elsewhereans की तरह यह पुस्तक भी आत्मकथात्मक है। मगर जहाँ थयिल का संस्मरण यात्रा-वृत्तांत जैसा और अवलोकनपरक है, वहीं रॉय की लेखनी आत्ममंथनकारी, तीखी और भावनात्मक रूप से गहरी है।


परीक्षा हेतु प्रमुख बिंदु

  • लेखिका: अरुंधति रॉय

  • पुस्तक का शीर्षक: Mother Mary Comes to Me

  • प्रकाशन तिथि: 2 सितम्बर 2025

  • प्रकाशक: पेंगुइन हैमिश हैमिल्टन

  • विषय: माँ मैरी रॉय के साथ रिश्ते, व्यक्तिगत शोक, साहित्यिक विकास

  • विशेषता: साहसिक संस्मरण, जिसमें पारिवारिक जटिलताओं और रचनात्मक यात्रा का संतुलित चित्रण है

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