विश्व चैंपियनशिप 2025: भारत ने पुरुषों की कंपाउंड तीरंदाजी में रचा इतिहास, जीता स्वर्ण पदक
विश्व चैंपियनशिप 2025: भारत ने पुरुषों की कंपाउंड तीरंदाजी में रचा इतिहास, जीता स्वर्ण पदक

विश्व चैंपियनशिप 2025: भारत ने पुरुषों की कंपाउंड तीरंदाजी में रचा इतिहास, जीता स्वर्ण पदक

भारत ने 7 सितंबर 2025 को ग्वांग्जू, दक्षिण कोरिया में आयोजित विश्व तीरंदाज़ी चैंपियनशिप में स्वर्णिम इतिहास रच दिया। पुरुषों की कंपाउंड टीम स्पर्धा में भारतीय तिकड़ी ऋषभ यादव, अमन सैनी और पृथमेश फुगे ने दमदार प्रदर्शन करते हुए फ्रांस को 235–233 से हराकर देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाया। यह उपलब्धि भारतीय कंपाउंड तीरंदाज़ी के लिए एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है, क्योंकि इससे पहले भारत ने इस इवेंट में कभी भी स्वर्ण पदक हासिल नहीं किया था।

ऐतिहासिक फाइनल: भारत बनाम फ्रांस

फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक और उतार-चढ़ाव से भरा रहा। फ्रांस की मज़बूत टीम—निकोलस गिरार्ड, जीन फिलिप बूल्च और फ्रांस्वा डुबोइस—ने शुरुआती बढ़त बनाई।

  • पहले राउंड में भारत 57–59 से पीछे हो गया।

  • दूसरे राउंड में भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव झेलते हुए शानदार वापसी की और लगातार छह परफेक्ट 10 मारकर स्कोर 117–117 कर दिया।

  • तीसरे राउंड तक मुकाबला बराबरी का रहा और स्कोर 176–176 पर था।

  • निर्णायक चौथे राउंड में पृथमेश फुगे ने लगातार छह परफेक्ट 10 लगाए, जिनमें आखिरी तीर भी शामिल था। इसी के साथ भारत ने 235–233 से जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

यह फाइनल भारतीय तीरंदाज़ी इतिहास के सबसे यादगार पलों में से एक बन गया, जहाँ दबाव के क्षणों में टीम ने गजब का संयम और आत्मविश्वास दिखाया।

रणनीति और कोच की भूमिका

भारत की इस सफलता के पीछे रणनीतिक सोच और कोच जीवनजोत सिंह तेजा का अहम योगदान रहा। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ राउंड ऑफ 16 में संघर्ष के बाद कोच ने खिलाड़ियों के शॉटिंग क्रम में बदलाव किया।

नया क्रम इस प्रकार था—

  • पहले शूटर: ऋषभ यादव

  • दूसरे शूटर: अमन सैनी

  • अंतिम शूटर: पृथमेश फुगे

यह बदलाव पूरे टूर्नामेंट में भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ। कोच तेजा ने इस मौके पर कहा कि भारत में अब घरेलू तीरंदाज़ी का स्तर काफी ऊँचा हो गया है। जूनियर स्तर पर भी खिलाड़ी लगातार 350–355/360 तक स्कोर करने लगे हैं, जिससे भविष्य में भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में पकड़ और मजबूत होगी।

स्टार प्रदर्शन

इस ऐतिहासिक जीत में हर खिलाड़ी का योगदान महत्वपूर्ण रहा, लेकिन कुछ प्रदर्शन विशेष रूप से यादगार रहे।

  • ऋषभ यादव – भारत के शीर्ष क्वालिफ़ायर रहे और उन्होंने मिक्स्ड टीम में भी रजत पदक जीता। उनके लगातार स्थिर प्रदर्शन ने टीम को आत्मविश्वास दिया।

  • अमन सैनी – मिडल शूटर की भूमिका में उन्होंने टीम के स्कोर को स्थिर बनाए रखा और अहम समय पर परफेक्ट शॉट्स दिए।

  • पृथमेश फुगे – सबसे कम रैंकिंग वाले खिलाड़ी होने के बावजूद फाइनल में असाधारण प्रदर्शन किया। उनके निर्णायक छह परफेक्ट 10 भारत की जीत की कुंजी बने।

ऋषभ यादव को अनुभवी तीरंदाज़ अभिषेक वर्मा का मार्गदर्शन मिला है। 2018 में पदार्पण करने के बाद से यादव धीरे-धीरे भारतीय तीरंदाज़ी का भरोसेमंद चेहरा बन चुके हैं।

मिक्स्ड टीम में रजत पदक

पुरुषों की कंपाउंड टीम की स्वर्णिम सफलता के अलावा, भारत ने मिक्स्ड टीम इवेंट में भी शानदार प्रदर्शन किया।

  • ऋषभ यादव और ज्योति सुरेखा वेन्नम की जोड़ी फाइनल तक पहुँची।

  • फाइनल में नीदरलैंड्स की शीर्ष वरीयता प्राप्त जोड़ी माइक श्लोएसर और साने डी लाट से भारत को 155–157 से हार का सामना करना पड़ा और रजत पदक मिला।

यह प्रदर्शन खास महत्व रखता है, क्योंकि 2023 बर्लिन संस्करण के बाद भारत ने फिर से मिक्स्ड टीम में पदक जीता। साथ ही, 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक में मिक्स्ड कंपाउंड टीम स्पर्धा को शामिल किया जाएगा, जिससे भारत की संभावनाएँ और भी बढ़ जाती हैं।

महिला टीम की निराशा

हालाँकि भारतीय अभियान ज्यादातर सफल रहा, लेकिन महिला कंपाउंड टीम की हार निराशाजनक रही। 2017 से लगातार हर विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली भारतीय महिला टीम इस बार प्री-क्वार्टर फाइनल में ही बाहर हो गई। यह ग्वांग्जू अभियान की एकमात्र बड़ी कमी मानी जा रही है।

भारतीय तीरंदाज़ी के लिए मील का पत्थर

भारत का यह स्वर्ण पदक न केवल एक टूर्नामेंट जीत है बल्कि देश की कंपाउंड तीरंदाज़ी की बढ़ती ताकत का प्रतीक भी है। लंबे समय से भारत रिकर्व तीरंदाज़ी में अंतरराष्ट्रीय मंच पर संघर्ष कर रहा था, लेकिन कंपाउंड तीरंदाज़ी ने देश को नई पहचान दी है।

इस जीत ने साबित कर दिया कि भारतीय तीरंदाज़ अब किसी भी बड़े मंच पर दबाव का सामना कर सकते हैं और दुनिया की शीर्ष टीमों को मात दे सकते हैं।

परीक्षा हेतु प्रमुख तथ्य

  • इवेंट: पुरुष कंपाउंड टीम

  • परिणाम: भारत ने फ्रांस को 235–233 से हराया

  • स्वर्ण पदक विजेता: ऋषभ यादव, अमन सैनी, पृथमेश फुगे

  • स्थान: ग्वांग्जू, दक्षिण कोरिया

  • मिक्स्ड टीम: रजत पदक (ऋषभ यादव और ज्योति सुरेखा वेन्नम)

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