सी. पी. राधाकृष्णन बने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति
सी. पी. राधाकृष्णन बने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति

सी. पी. राधाकृष्णन बने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति

भारत ने अपना नया उपराष्ट्रपति चुन लिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के राज्यपाल रह चुके सी. पी. राधाकृष्णन को स्पष्ट बहुमत के साथ जीत मिली है। उन्हें कुल 452 वोट मिले, जिसके बाद वे भारत के 15वें उपराष्ट्रपति बने। 67 वर्षीय राधाकृष्णन ने विपक्ष के उम्मीदवार, वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को पराजित किया। इस चुनाव की खास बात यह रही कि संसद में 98.3% की रिकॉर्ड मतदान प्रतिशतता दर्ज की गई, जो सांसदों की सक्रियता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


चुनाव प्रक्रिया और परिणाम

चुनाव की तिथि: 9 सितंबर 2025
कुल निर्वाचन मंडल: 781 सांसद (लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर)
मतदान हुआ: 767 सांसदों ने वोट डाले
मान्य वोट: 752
अमान्य वोट: 15

इस चुनाव में एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने सी. पी. राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया था। विपक्ष की ओर से बी. सुदर्शन रेड्डी मैदान में थे। नतीजों में राधाकृष्णन ने स्पष्ट बहुमत से जीत हासिल की और उपराष्ट्रपति बनने का गौरव प्राप्त किया।


एनडीए और विपक्ष की ताकत

इस चुनाव में संख्याबल का गणित एनडीए के पक्ष में था।

  • एनडीए के पास: 425 सांसद

    • इनमें भाजपा के 342 सांसद शामिल थे।

  • विपक्ष के पास: 324 सांसद

    • इनमें कांग्रेस की हिस्सेदारी 126 सीटों की थी।

हालांकि, कुछ क्षेत्रीय दल जैसे बीजू जनता दल (बीजेडी), भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और शिरोमणि अकाली दल ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। इससे विपक्ष के उम्मीदवार रेड्डी की संभावनाएँ और कमजोर हो गईं। दूसरी ओर, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी समेत कई सहयोगी दलों ने एनडीए का समर्थन किया, जिससे राधाकृष्णन की जीत लगभग तय हो गई थी।


चुनाव दिवस की मुख्य झलकियाँ

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले वोट डालकर मतदान प्रक्रिया की शुरुआत की।

  • दोपहर 3 बजे तक लगभग 96% मतदान हो चुका था, जो अंततः बढ़कर 98.3% हो गया।

  • मतदान प्रक्रिया में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, अखिलेश यादव और एच. डी. देवगौड़ा जैसे बड़े नेताओं ने हिस्सा लिया।

  • जम्मू-कश्मीर के इंजीनियर राशिद, जो बारामूला से जेल में बंद सांसद हैं, ने विशेष सुरक्षा इंतज़ामों के बीच मतदान किया।

  • राधाकृष्णन की जीत के बाद उनके गृह नगर तिरुप्पुर (तमिलनाडु) में जश्न का माहौल रहा। स्थानीय लोगों ने भोजन के स्टॉल लगाए, पटाखे फोड़े और मंदिरों में विशेष प्रार्थनाएँ आयोजित कीं।


सी. पी. राधाकृष्णन का जीवन और राजनीतिक सफर

सी. पी. राधाकृष्णन का जन्म तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले में हुआ। उन्होंने किशोरावस्था से ही समाज और राजनीति की ओर रुझान दिखाया। मात्र 17 वर्ष की उम्र में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए।

उनका सक्रिय राजनीतिक सफर भारतीय जनता पार्टी से जुड़ने के बाद शुरू हुआ। वर्ष 1998 में कोयंबटूर से वे पहली बार लोकसभा सांसद चुने गए। इसके बाद वे 1999 के आम चुनावों में भी लगातार दूसरी बार सांसद बने। उस समय केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी और राधाकृष्णन ने कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों में योगदान दिया।

हाल ही में उपराष्ट्रपति बनने से पहले वे महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में कार्यरत थे। इस पद पर रहते हुए उन्होंने प्रशासनिक अनुभव हासिल किया, जो अब उन्हें उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति की भूमिका निभाने में सहायक होगा।


चुनाव का महत्व और ऐतिहासिक संदर्भ

सी. पी. राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति चुना जाना कई मायनों में खास है।

  1. वे तमिलनाडु से चुने जाने वाले दूसरे उपराष्ट्रपति हैं। उनसे पहले महान दार्शनिक और शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इस पद को सुशोभित कर चुके हैं।

  2. उनकी जीत से यह संदेश गया है कि संसद में एनडीए का दबदबा और सहयोगी दलों का समर्थन मजबूत है।

  3. यह चुनाव संसद की कार्यशैली और सांसदों की एकजुटता का प्रतीक भी है, क्योंकि मतदान प्रतिशत ऐतिहासिक रूप से ऊँचा रहा।


उपराष्ट्रपति के रूप में भूमिका

भारत का उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं और संसद की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने की जिम्मेदारी निभाते हैं।

सी. पी. राधाकृष्णन का अब तक का राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव उन्हें इस पद की जिम्मेदारियों के लिए उपयुक्त बनाता है। राज्यसभा में विभिन्न विचारों और दलों के बीच संतुलन बनाना और बहस को सकारात्मक दिशा देना उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

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