भारत के वित्तीय नियामकीय ढाँचे में एक बड़ा बदलाव हुआ है। सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्रीनिवास इन्जेटी को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) गवर्निंग बोर्ड का नया चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की मंजूरी के बाद हुई। एशिया के सबसे बड़े और सबसे सक्रिय स्टॉक एक्सचेंजों में से एक में यह कदम सुशासन, पारदर्शिता और निवेशक संरक्षण की दिशा में रणनीतिक पहल माना जा रहा है।
विशिष्ट प्रशासनिक करियर
श्रीनिवास इन्जेटी 1983 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं। चार दशकों से अधिक लंबे करियर में उन्होंने वित्तीय सेवाओं, कॉर्पोरेट गवर्नेंस, नियामकीय सुधार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय में सचिव रहते हुए उन्होंने कंपनी कानून और दिवाला समाधान तंत्र में कई ऐतिहासिक सुधारों की अगुवाई की। कॉर्पोरेट गवर्नेंस ढाँचे को मज़बूत करने के उनके प्रयासों ने भारत को वैश्विक स्तर पर निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक गंतव्य बनाया।
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (Insolvency and Bankruptcy Code – IBC) का सफल कार्यान्वयन था। इस कानून ने भारत में संकटग्रस्त कंपनियों के समाधान की प्रक्रिया को तेज़, पारदर्शी और निवेशक अनुकूल बनाया।
IFSCA के प्रथम चेयरपर्सन
श्रीनिवास इन्जेटी को भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA) का पहला चेयरपर्सन नियुक्त किया था। उनके नेतृत्व में गिफ्ट सिटी (GIFT City) को एक प्रतिस्पर्धी वैश्विक वित्तीय केंद्र बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहलें की गईं।
उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियाँ:
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वैश्विक बैंकिंग और बीमा संचालन को बढ़ावा देकर गिफ्ट सिटी में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय गतिविधियों को आकर्षित करना।
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फिनटेक नवाचार को प्रोत्साहित करना और भारत को वैश्विक डिजिटल वित्त क्षेत्र में स्थापित करना।
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ग्रीन और सस्टेनेबल फाइनेंस की दिशा में नीति बनाना, ताकि जलवायु परिवर्तन से जुड़े निवेशों को बढ़ावा मिल सके।
इन्जेटी की दृष्टि और नेतृत्व ने भारत के गिफ्ट आईएफएससी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और इसे निवेश और नवाचार का केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाई।
व्यापक अनुभव और नेतृत्व क्षमता
अपने प्रशासनिक करियर में इन्जेटी ने कई अन्य महत्वपूर्ण भूमिकाएँ भी निभाईं।
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खेल सचिव के रूप में उन्होंने खेल नीति और खेल प्रशासन में सुधार किए।
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राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) के चेयरमैन रहते हुए उन्होंने आवश्यक दवाओं को आम जनता के लिए किफायती बनाने की दिशा में कदम उठाए।
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संयुक्त राष्ट्र (UN) असाइनमेंट के दौरान उन्होंने वैश्विक शासन और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर काम किया।
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SEBI, LIC और अन्य प्रमुख वित्तीय संस्थानों के बोर्ड में सदस्य रहकर उन्होंने निवेशक हितों और नियामकीय सुधारों पर महत्वपूर्ण योगदान दिया।
यह विविध अनुभव उन्हें एनएसई जैसे विशाल वित्तीय संस्थान की निगरानी और संचालन के लिए उपयुक्त बनाता है।
NSE और SEBI की भूमिका
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है, जहाँ रोज़ाना अरबों रुपये के लेन-देन होते हैं। यह न केवल भारतीय पूंजी बाज़ार की धुरी है, बल्कि एशिया और विश्व स्तर पर भी इसकी पहचान मज़बूत है। ऐसे संस्थान में गवर्निंग बोर्ड का नेतृत्व किसी भी तरह की पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वहीं, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) 1992 से भारत के पूंजी बाजार की मुख्य नियामक संस्था है। इसका गठन निवेशकों के हितों की रक्षा, बाजार की पारदर्शिता और वित्तीय धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए किया गया था। SEBI की मंजूरी इस बात का प्रतीक है कि सरकार और नियामक दोनों ही NSE जैसे संस्थानों में सुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या मतलब है?
श्रीनिवास इन्जेटी की नियुक्ति का सीधा प्रभाव निवेशकों के भरोसे और बाजार की स्थिरता पर पड़ेगा।
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पारदर्शिता: उनके प्रशासनिक अनुभव से एक्सचेंज के कार्यों में और अधिक पारदर्शिता आएगी।
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विश्वसनीयता: IBC और IFSCA जैसे सुधारों के उनके अनुभव से निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा।
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संतुलित निर्णय: वित्तीय क्षेत्र और कॉर्पोरेट जगत की गहरी समझ के कारण वे निवेशकों और संस्थानों के बीच संतुलन बनाने में सक्षम होंगे।
महत्वपूर्ण तथ्य
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नियुक्ति: श्रीनिवास इन्जेटी – एनएसई गवर्निंग बोर्ड के नए चेयरपर्सन।
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अनुभव: 1983 बैच के सेवानिवृत्त IAS अधिकारी, 40 वर्षों से अधिक का अनुभव।
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पूर्व पद: कॉर्पोरेट कार्य सचिव और IFSCA के प्रथम चेयरपर्सन।
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विशेष योगदान: IBC का कार्यान्वयन, गिफ्ट सिटी को वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में स्थापित करना।
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SEBI: NSE में इस नियुक्ति को मंजूरी देने वाली नियामक संस्था।

