12 सितंबर 2025 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) में फ़िलिस्तीन के लिए दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) पर आधारित “न्यूयॉर्क घोषणा” पारित हुई। इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव का उद्देश्य इज़रायल और फ़िलिस्तीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष का शांतिपूर्ण और न्यायपूर्ण समाधान ढूंढना है।
मतदान का परिणाम
इस प्रस्ताव पर कुल 164 देशों ने मतदान किया।
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समर्थन में: 142 देश (भारत सहित)
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विरोध में: 10 देश (जिनमें अमेरिका शामिल है)
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अनुपस्थित/तटस्थ: 12 देश
फ्रांस और सऊदी अरब द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव को व्यापक समर्थन मिला, जबकि अमेरिका और कुछ अन्य देशों ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए विरोध किया।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस प्रस्ताव को मध्य-पूर्व में शांति की ओर एक अपरिवर्तनीय मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम दोनों पक्षों के बीच सुरक्षा, न्याय और स्थायी सहयोग स्थापित करने का अवसर है।
भारत की स्थिति
भारत ने हमेशा से फ़िलिस्तीन के न्यायपूर्ण और स्वतंत्र राज्य के निर्माण का समर्थन किया है। भारत का मानना है कि दो-राष्ट्र समाधान ही इज़रायल-फ़िलिस्तीन संघर्ष का व्यावहारिक और स्थायी हल है।
भारत की नीति के मुख्य पहलू इस प्रकार हैं:
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फ़िलिस्तीन का समर्थन: भारत फ़िलिस्तीन के स्वतंत्र और संप्रभु राज्य का पक्षधर है।
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इज़रायल की सुरक्षा: भारत इज़रायल के अधिकारों और उसके सुरक्षित जीवन के लिए प्रतिबद्ध है।
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मान्यता प्राप्त सीमाओं में वार्ता: भारत दोनों पक्षों से बातचीत और सहमति के माध्यम से समाधान की वकालत करता है।
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संतुलित कूटनीति: भारत ने हमेशा फ़िलिस्तीन और इज़रायल दोनों के साथ अपने रणनीतिक, व्यापारिक और तकनीकी संबंधों को संतुलित रखा है।
संयुक्त राष्ट्र में मतदान करते हुए भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि शांति के लिए न्याय और संवाद सर्वोपरि हैं। यह कदम भारत की पारंपरिक नीति और मध्य-पूर्व में उसकी स्थिर भूमिका को पुनः पुष्ट करता है।
अमेरिका का विरोध
अमेरिका ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे “प्रचार का हथकंडा” बताया।
अमेरिका के मुख्य तर्क:
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यह प्रस्ताव हमास को वैधता प्रदान करता है।
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गाज़ा में पीड़ा और बंधकों के मुद्दों को हल करने की कूटनीतिक कोशिशों को कमजोर करता है।
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इसे समय से पूर्व और राजनीतिक रूप से प्रेरित माना गया।
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अमेरिका के अनुसार वास्तविक शांति केवल प्रत्यक्ष वार्ता और समझौते के माध्यम से ही संभव है, न कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों से।
वैश्विक और क्षेत्रीय प्रभाव
इस प्रस्ताव पर मतदान ने मध्य-पूर्व में शांति प्रयासों के लिए कई महत्वपूर्ण संकेत दिए:
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वैश्विक समर्थन: 142 देशों का समर्थन दिखाता है कि दो-राष्ट्र समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का व्यापक दबाव और इच्छा है।
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विरोध के असर: 10 देशों का विरोध यह दर्शाता है कि फिलिस्तीनी समूहों जैसे हमास की वैधता को लेकर कुछ देशों में संदेह और विवाद हैं।
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तटस्थ देशों का रुख: 12 देशों की अनुपस्थिति या तटस्थता जटिल परिस्थितियों में सावधानी और कूटनीतिक संतुलन को दर्शाती है।
भारत के लिए इस मतदान का प्रभाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यह भारत को फ़िलिस्तीन राज्यत्व का स्थायी समर्थक और मध्य-पूर्व में न्यायपूर्ण समाधान की दिशा में सक्रिय खिलाड़ी के रूप में प्रस्तुत करता है। साथ ही, इज़रायल के साथ भारत के रणनीतिक, रक्षा और आर्थिक संबंधों पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
भारत की ऐतिहासिक नीति के अनुरूप
भारत ने वर्षों से फ़िलिस्तीन और इज़रायल दोनों के साथ संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। इस नीति का उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता, न्याय और विकास को बढ़ावा देना है।
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भारत ने फ़िलिस्तीन के अधिकारों की रक्षा में हमेशा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज उठाई।
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इज़रायल के साथ भारत ने तकनीकी, रक्षा और व्यापारिक सहयोग को निरंतर जारी रखा।
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यह मतदान भारत की स्थिर, न्यायसंगत और नैतिक कूटनीति को और मजबूत करता है।
प्रमुख तथ्य (Key Takeaways)
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मतदान तिथि: 12 सितम्बर 2025
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प्रस्ताव का नाम: न्यूयॉर्क घोषणा (New York Declaration – Palestine Two-State Solution)
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प्रस्तुतकर्ता देश: फ्रांस और सऊदी अरब
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मतदान परिणाम: 142 समर्थन, 10 विरोध, 12 अनुपस्थित/तटस्थ
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भारत का रुख: समर्थन (दो-राष्ट्र समाधान का पक्ष)
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उद्देश्य: फ़िलिस्तीन के स्वतंत्र, संप्रभु राज्य और इज़रायल के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व
भारत ने यह कदम न केवल विश्व मंच पर न्याय और शांति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाया है, बल्कि मध्य-पूर्व में स्थिरता के लिए अपने संतुलित और दूरदर्शी दृष्टिकोण को भी दोहराया। इस मतदान से स्पष्ट होता है कि भारत न केवल कूटनीतिक रूप से जिम्मेदार है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

