भारत सरकार ने 14 सितंबर 2025 को एक अहम प्रशासनिक नियुक्ति करते हुए वरिष्ठ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमित खरे को उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन का सचिव नियुक्त किया है। यह नियुक्ति तीन वर्षों के अनुबंध आधार पर की गई है और खरे अपना कार्यभार संभालने की तिथि से इसकी अवधि पूरी करेंगे।
इस नियुक्ति को मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) की मंजूरी प्राप्त है। यह निर्णय राधाकृष्णन के उपराष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण करने के कुछ ही दिनों बाद लिया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार प्रशासनिक रूप से अनुभवी और भरोसेमंद अधिकारियों को संवैधानिक संस्थानों में सक्रिय भूमिका देने की नीति पर कायम है।
प्रधानमंत्री कार्यालय में अहम भूमिका निभा रहे थे
अमित खरे इससे पहले 12 अक्टूबर 2021 से प्रधानमंत्री के सलाहकार के रूप में कार्यरत थे। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में उन्हें सामाजिक क्षेत्र से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी दी गई थी, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, और जनकल्याण जैसे विषय प्रमुख रहे।
वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 (NEP 2020) के निर्माण और क्रियान्वयन में कोर टीम का भी हिस्सा रहे हैं। शिक्षा प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन लाने वाली इस नीति की रूपरेखा तैयार करने में उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है।
अनुभव और ईमानदारी की पहचान: अमित खरे कौन हैं?
अमित खरे 1985 बैच के झारखंड कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी हैं। उन्हें ईमानदार, दृढ़निश्चयी और नीतिगत सोच रखने वाले अधिकारी के रूप में जाना जाता है। उनका प्रशासनिक करियर विविध अनुभवों से भरा रहा है।
उनका नाम पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आया था जब वे 1995 से 1997 के दौरान पश्चिम सिंहभूम (तत्कालीन बिहार) के जिलाधिकारी रहते हुए बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाले को उजागर करने वाले प्रमुख अधिकारियों में शामिल रहे। यह वही घोटाला है, जिसमें बाद में लालू प्रसाद यादव सहित कई बड़े राजनेताओं को दोषी ठहराया गया।
इसके अलावा, खरे ने केंद्र सरकार में उच्च शिक्षा सचिव और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव जैसे प्रमुख पदों पर कार्य किया है। उन्होंने बिहार और झारखंड में वित्त, शिक्षा और सामान्य प्रशासन जैसे अहम विभागों में भी अपनी सेवाएं दी हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद भी उनकी विशेषज्ञता को नज़रअंदाज नहीं किया गया और अक्टूबर 2021 में उन्हें प्रधानमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया था। उनका यह कार्यकाल जून 2026 तक तय था, लेकिन अब उन्हें उपराष्ट्रपति सचिवालय में एक नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
निजी सचिव की नियुक्ति भी हुई
उपराष्ट्रपति सचिवालय में प्रशासनिक संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए आईएएस अधिकारी चंद्रशेखर एस को उपराष्ट्रपति के निजी सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है।
वे 2014 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी हैं और अपेक्षाकृत युवा प्रशासनिक सेवा अधिकारी होते हुए भी उन्हें यह जिम्मेदारी देना इस बात का संकेत है कि अनुभवी और युवा अधिकारियों का संतुलन सरकार की नियुक्तियों में प्राथमिकता बना हुआ है।
उपराष्ट्रपति सचिवालय में बदलाव की पृष्ठभूमि
12 सितंबर 2025 को सी. पी. राधाकृष्णन ने भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। यह चुनाव पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों से दिए गए इस्तीफे के चलते हुआ।
राधाकृष्णन ने 9 सितंबर को हुए चुनाव में सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश बी. सुधर्शन रेड्डी को हराकर यह पद हासिल किया। उन्होंने यह चुनाव 152 मतों के अंतर से जीता। शपथ ग्रहण समारोह में जगदीप धनखड़ भी पहली बार सार्वजनिक रूप से नजर आए।
सरकार का रुझान: अनुभव को महत्व
अमित खरे की सचिव के रूप में नियुक्ति इस बात का प्रतीक है कि सरकार अब भी अनुभवी, नीतिगत दृष्टिकोण रखने वाले अधिकारियों को संवैधानिक पदों के संचालन में अहम भूमिका देने में विश्वास करती है।
खरे की पृष्ठभूमि शिक्षा, मीडिया, वित्त और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में रही है, जिससे उपराष्ट्रपति सचिवालय को न केवल प्रशासनिक स्थिरता मिलेगी, बल्कि नीति निर्धारण में भी एक दिशा मिलेगी।

