भारत की अर्थव्यवस्था में पिछले एक दशक से गहरा बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहाँ करोड़पतियों और हाई-नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) का केंद्र मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे महानगर हुआ करते थे, वहीं अब तस्वीर बदल रही है। मर्सिडीज़-बेंज हुरुन इंडिया वेल्थ रिपोर्ट 2025 ने खुलासा किया है कि आज करोड़पतियों का सबसे तेज़ उभार टियर-II शहरों में हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के शीर्ष 10 मिलियनेयर घरानों वाले शहरों में से 7 शहर टियर-II कैटेगरी से आते हैं। यह प्रवृत्ति भारतीय वित्तीय परिदृश्य में बड़े बदलाव का संकेत देती है, जहाँ अवसर और संपत्ति अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहे।
हुरुन इंडिया वेल्थ रिपोर्ट 2025 : मुख्य बिंदु
-
भारत में अब 8.71 लाख मिलियनेयर घराने मौजूद हैं।
-
मिलियनेयर की परिभाषा: ₹8.5 करोड़ (लगभग 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर) या उससे अधिक निवल संपत्ति वाले घराने।
-
यह संख्या 2021 की तुलना में 90% वृद्धि दर्शाती है।
-
भारत के कुल घरानों में से लगभग 0.31% घराने अब मिलियनेयर कैटेगरी में हैं।
-
देश के शीर्ष 10 राज्य मिलियनेयर घरानों के 79% से अधिक का घर हैं।
-
खास बात यह है कि शीर्ष 10 शहरों की सूची में अब 7 टियर-II शहर शामिल हो गए हैं।
वे 7 टियर-II शहर, जहाँ सबसे ज्यादा मिलियनेयर
-
अहमदाबाद – गुजरात की औद्योगिक राजधानी, जहाँ कपड़ा, फार्मास्युटिकल्स और केमिकल्स का बड़ा क्लस्टर है। कई बड़े कारोबारी घराने यहीं से संचालित होते हैं।
-
सूरत – दुनिया का हीरा पॉलिशिंग हब और टेक्सटाइल उद्योग का गढ़। यहाँ MSME सेक्टर ने हजारों नए करोड़पति बनाए हैं।
-
जयपुर – पर्यटन, आभूषण, हैंडीक्राफ्ट और रियल एस्टेट निवेश ने इसे करोड़पतियों का नया केंद्र बना दिया है।
-
वडोदरा – पेट्रोकेमिकल्स, इंजीनियरिंग और औद्योगिक इकाइयों का हब, जिसने संपन्नता को गति दी।
-
नागपुर – महाराष्ट्र का उभरता लॉजिस्टिक्स और एग्री-ट्रेडिंग हब, साथ ही स्मार्ट सिटी विकास परियोजनाओं ने संपत्ति मूल्य को बढ़ाया।
-
विशाखापट्टनम – आंध्र प्रदेश का औद्योगिक और बंदरगाह शहर, जहाँ आईटी और रियल एस्टेट निवेश तेजी से बढ़े हैं।
-
लखनऊ – उत्तर प्रदेश की राजधानी, जहाँ इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य और रियल एस्टेट ने समृद्ध वर्ग को जन्म दिया है।
टियर-II शहरों में मिलियनेयर क्यों बढ़ रहे हैं?
1. MSME और उद्यमिता का उभार
सूरत, अहमदाबाद और जयपुर जैसे शहरों में छोटे और मध्यम उद्योग (MSMEs) और उद्यमिता ने करोड़पतियों की नई फौज खड़ी की है।
-
सूरत का हीरा और टेक्सटाइल उद्योग अरबों का निर्यात करता है।
-
अहमदाबाद और वडोदरा उद्योगपतियों और निवेशकों के लिए केंद्र बन चुके हैं।
2. रियल एस्टेट का मूल्यवृद्धि
स्मार्ट सिटी मिशन, औद्योगिक कॉरिडोर और शहरीकरण ने इन शहरों में संपत्ति मूल्यों को कई गुना बढ़ा दिया है। जो लोग दशकों पहले जमीन या संपत्ति में निवेश कर चुके थे, वे आज करोड़पति बन चुके हैं।
3. वित्तीय बाज़ारों तक पहुँच
डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन ट्रेडिंग और म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म्स ने छोटे शहरों में भी निवेश की संस्कृति को बढ़ावा दिया है। अब निवेशक केवल सोना और ज़मीन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्टॉक मार्केट, ग्लोबल फंड्स और स्टार्टअप्स में भी निवेश कर रहे हैं।
4. बेहतर कनेक्टिविटी
हवाई अड्डे, राजमार्ग, मेट्रो कनेक्टिविटी और डिजिटल अवसंरचना ने इन शहरों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाज़ारों से सीधे जोड़ दिया है। इससे उद्योग और निवेश दोनों को नई गति मिली है।
5. विविध निवेश संस्कृति
नए जमाने के निवेशक जोखिम लेने से पीछे नहीं हटते। यही कारण है कि स्टार्टअप्स, टेक्नोलॉजी वेंचर्स और नई एग्री-टेक कंपनियों में भी टियर-II शहरों से पूंजी प्रवाहित हो रही है।
टियर-II शहरों का उदय: आर्थिक लोकतंत्रीकरण की निशानी
इन 7 टियर-II शहरों का “मिलियनेयर मैप” में शामिल होना इस बात का संकेत है कि अब आर्थिक विकास केवल दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे शहरों तक सीमित नहीं है।
-
यह रुझान संपत्ति के लोकतंत्रीकरण (Democratisation of Wealth) की तरफ इशारा करता है।
-
छोटे शहरों से बड़े उद्योगपति और कारोबारी घराने निकल रहे हैं।
-
स्थानीय प्रतिभा, उद्यमिता और सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ने इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
याद रखने योग्य तथ्य
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| रिपोर्ट का नाम | मर्सिडीज़-बेंज हुरुन इंडिया वेल्थ रिपोर्ट 2025 |
| भारत में मिलियनेयर घराने | 8.71 लाख |
| परिभाषा | ₹8.5 करोड़ या 1 मिलियन USD से अधिक निवल संपत्ति |
| वृद्धि | 2021 की तुलना में 90% अधिक |
| शीर्ष टियर-II शहर | अहमदाबाद, सूरत, जयपुर, वडोदरा, नागपुर, विशाखापट्टनम, लखनऊ |
| शीर्ष टियर-I शहर | मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु |
| राज्यवार हिस्सेदारी | शीर्ष 10 राज्य – 79% से अधिक मिलियनेयर घराने |

