भूमिका राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, स्वतंत्रता के बाद भारत की तीसरी शिक्षा नीति है, जिसे देश की शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुसार आधुनिक और समावेशी बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। इस नीति ने स्कूली और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन की नींव रखी। अब, जब नीति के क्रियान्वयन को पांच वर्ष पूरे हो चुके हैं, तो यह उपयुक्त समय है कि हम इसकी उपलब्धियों और चुनौतियों की समग्र समीक्षा करें।
स्कूली शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव
- नई संरचना: 10+2 से 5+3+3+4 NEP 2020 के तहत पारंपरिक 10+2 प्रणाली की जगह 5+3+3+4 ढांचे को अपनाया गया है:
- आधारभूत चरण: पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 2
- तैयारी चरण: कक्षा 3 से 5
- माध्यमिक चरण: कक्षा 6 से 8
- सेकेंडरी चरण: कक्षा 9 से 12
हर चरण के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCFSE 2023) के माध्यम से स्पष्ट अधिगम परिणाम निर्धारित किए गए हैं। इससे छात्रों की समग्र विकास पर जोर दिया गया है।
- एकीकृत पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकें NCERT ने कक्षा 1 से 8 के लिए नई पाठ्यपुस्तकें जारी की हैं, जिनमें इतिहास, भूगोल, नागरिकशास्त्र और अर्थशास्त्र को एकीकृत कर सामाजिक विज्ञान बनाया गया है। कक्षा 9-12 की पुस्तकें भी जल्द आने की संभावना है।
- प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ECCE) NEP का लक्ष्य 2030 तक सार्वभौमिक ECCE को लागू करना है। इसके लिए “जादुई पिटारा” और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या फ्रेमवर्क जारी किए गए हैं।
- कक्षा 1 में प्रवेश की न्यूनतम आयु अब 6 वर्ष निर्धारित की गई है। इससे कक्षा 1 में नामांकन 2.16 करोड़ से घटकर 1.87 करोड़ (2023-24) हुआ है।
- हालाँकि, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और पूर्व शिक्षा केंद्रों के बुनियादी ढांचे में सुधार की ज़रूरत बनी हुई है।
- बेसिक लर्निंग पर ज़ोर: निपुण भारत मिशन 2021 में शुरू हुए निपुण भारत मिशन का उद्देश्य कक्षा 3 तक बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान सुनिश्चित करना है। हाल की रिपोर्ट के अनुसार:
- 64% छात्र भाषा में दक्ष हैं।
- 60% छात्र गणित में दक्ष हैं।
यद्यपि यह उत्साहजनक है, लेकिन लक्ष्य की प्राप्ति अभी दूर है।
- मल्टीपल एंट्री-एग्जिट प्रणाली और क्रेडिट लचीलापन Academic Bank of Credits (ABC) के तहत छात्र 1 साल की पढ़ाई पर प्रमाणपत्र, 2 साल पर डिप्लोमा और 4 साल पर डिग्री प्राप्त कर सकते हैं। यह प्रणाली शिक्षा को लचीला और समावेशी बनाती है।
उच्च शिक्षा में सुधार और कार्यान्वयन की स्थिति
- राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCrF) अब स्कूल स्तर पर भी कौशल आधारित शिक्षा को क्रेडिट में बदला जा सकता है। CBSE ने पायलट प्रोग्राम शुरू किया है, जिससे स्कूली छात्र भी क्रेडिट सिस्टम से जुड़ रहे हैं।
- कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) 2022 में शुरू किए गए CUET ने स्नातक प्रवेश में एकरूपता लाई है। इससे छात्रों को विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं के तनाव से राहत मिली है।
- अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति
- IIT मद्रास: ज़ांज़ीबार
- IIT दिल्ली: अबू धाबी
- IIM अहमदाबाद: दुबई
- भारत में GIFT सिटी, गुजरात में विदेशी संस्थानों की स्थापना (जैसे यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्प्टन)
- चार वर्षीय डिग्री कार्यक्रम बहु-निकासी विकल्पों के साथ 4 साल की डिग्री NEP की एक प्रमुख पहल है। इसे कुछ केंद्रीय विश्वविद्यालयों और केरल में लागू किया गया है। लेकिन इसका विस्तार अभी सीमित है।
- भाषा और माध्यम
- नीति के अनुसार कक्षा 5 तक मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- CBSE और NCERT ने स्थानीय भाषाओं में सामग्री तैयार करनी शुरू की है।
- तीन-भाषा सूत्र विवादास्पद है — विशेषकर तमिलनाडु जैसे राज्यों में।
लंबित सुधार और चुनौतियाँ
- बोर्ड परीक्षा में बदलाव CBSE ने कक्षा 10 की परीक्षा को 2026 से साल में दो बार कराने की घोषणा की है। यह कदम परीक्षा के दबाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। कर्नाटक में यह मॉडल पहले ही अपनाया जा चुका है।
- समग्र मूल्यांकन और रिपोर्ट कार्ड PARAKH के तहत समग्र मूल्यांकन कार्ड में शैक्षणिक, सह-पाठ्यचर्या और आत्म-मूल्यांकन शामिल किए गए हैं। लेकिन कई राज्य बोर्डों ने इसे अभी तक लागू नहीं किया है।
- शिक्षक शिक्षा सुधार
- राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा पाठ्यचर्या (NCTE) अभी लंबित है।
- चार वर्षीय एकीकृत B.Ed (ITEP) को लेकर कई संस्थान असहमत हैं, विशेषकर जो पहले से B.El.Ed जैसे पाठ्यक्रम चला रहे हैं।
- उच्च शिक्षा आयोग (HECI) UGC, AICTE और NAAC को समाहित कर HECI बनाने का प्रस्ताव अभी मसौदा स्तर पर है। इससे शिक्षा क्षेत्र में नियामक एकरूपता आएगी, लेकिन अभी इस पर सहमति नहीं बन पाई है।
केंद्र-राज्य टकराव और राजनीतिक बाधाएं
- राज्यों की असहमति:
- केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने NEP को राज्य की स्वायत्तता में हस्तक्षेप मानते हुए कई MoU पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया।
- तमिलनाडु ने तीन-भाषा सूत्र और 4-वर्षीय डिग्री ढांचे दोनों का विरोध किया।
- कर्नाटक ने राष्ट्रीय नीति को छोड़ कर अपनी राज्य शिक्षा नीति घोषित की है।
- वित्तीय अड़चनें:
- केंद्र सरकार ने कुछ राज्यों के समग्र शिक्षा अभियान के फंड रोक दिए, जिन्हें NEP सुधारों से जोड़ा गया। इस पर तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की है।
निष्कर्ष NEP 2020 ने भारत की शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में कई प्रभावशाली कदम उठाए हैं। नीति की दृष्टि आधुनिक, समावेशी, लचीली और वैश्विक मानकों से मेल खाने वाली है। हालांकि, इसके प्रभावी कार्यान्वयन में अभी कई बाधाएं हैं — जिनमें प्रमुख हैं संस्थागत विलंब, राजनीतिक मतभेद, वित्तीय सीमाएं और संसाधनों की कमी।
