फिलीपींस ने दक्षिण पूर्व एशिया का पहला कोरल क्रायोबैंक स्थापित किया
फिलीपींस ने दक्षिण पूर्व एशिया का पहला कोरल क्रायोबैंक स्थापित किया

फिलीपींस ने दक्षिण पूर्व एशिया का पहला कोरल क्रायोबैंक स्थापित किया

फिलीपींस ने वर्ष 2025 में दक्षिण-पूर्व एशिया का पहला कोरल लार्वा क्रायोबैंक (Coral Larvae Cryobank) स्थापित किया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा और कोरल की आनुवंशिक विविधता को संरक्षित करना है। यह पहल उस समय की गई है जब जलवायु परिवर्तन, समुद्र के बढ़ते तापमान, प्रदूषण और मानवीय गतिविधियों के कारण विश्वभर में कोरल रीफ तेजी से नष्ट हो रहे हैं।


कोरल क्रायोबैंक पहल क्या है?

यह परियोजना एक बहुराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग का हिस्सा है, जिसमें फिलीपींस, ताइवान, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान शामिल हैं। इस पहल का उद्देश्य भविष्य में कोरल रीफ बहाली और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्निर्माण के लिए एक आनुवंशिक “बैकअप” तैयार करना है।

मुख्य उद्देश्य:

  • कोरल के लार्वा (Larvae) को अत्यधिक निम्न तापमान पर फ्रीज करके संग्रहित करना।

  • भविष्य में इन लार्वा को रीफ पुनर्स्थापन (Reef Restoration) के लिए पुनर्जीवित करना।

  • समुद्री जैव विविधता को बनाए रखना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से रीफ को सुरक्षित रखना।


क्रायोप्रिज़र्वेशन तकनीक कैसे काम करती है?

क्रायोप्रिज़र्वेशन (Cryopreservation) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें जीवित कोशिकाओं, ऊतकों या लार्वा को बहुत कम तापमान (–196°C) पर लिक्विड नाइट्रोजन में सुरक्षित रखा जाता है।

प्रक्रिया के प्रमुख चरण:

  1. कोरल लार्वा को पहले क्रायोप्रोटेक्टेंट्स जैसे ग्लिसरॉल, एथिलीन ग्लाइकोल या DMSO के साथ तैयार किया जाता है।

  2. इसके बाद विट्रीफिकेशन (Vitrification) नामक तकनीक से कोशिकाओं के अंदर मौजूद पानी को हटाकर तेजी से ठंडा किया जाता है।

  3. इस प्रक्रिया में बर्फ के क्रिस्टल नहीं बनते, जिससे कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं होता।

  4. संरक्षित लार्वा दशकों तक संग्रहित रह सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें पुनर्जीवित कर समुद्री रीफ में पुनःस्थापित किया जा सकता है।

यह तकनीक वैज्ञानिकों को समुद्री पारिस्थितिकी के भविष्य को सुरक्षित रखने का एक स्थायी समाधान प्रदान करती है।


कोरल त्रिभुज (Coral Triangle): समुद्र का अमेज़न

फिलीपींस जिस क्षेत्र में स्थित है, उसे कोरल त्रिभुज (Coral Triangle) कहा जाता है। यह क्षेत्र विश्व की समुद्री जैव विविधता का केंद्र माना जाता है।

इसमें शामिल देश हैं:
इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन द्वीप और तिमोर-लेस्ते।

मुख्य विशेषताएँ:

  • दुनिया की 75% से अधिक कोरल प्रजातियाँ यहीं पाई जाती हैं।

  • वैश्विक रीफ मछली प्रजातियों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इस क्षेत्र में है।

  • यहाँ विशाल मैंग्रोव वन और समुद्री कछुओं की छह प्रजातियाँ भी पाई जाती हैं।

यह क्षेत्र न केवल पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण है बल्कि लाखों लोगों की आजीविका, क्षेत्रीय खाद्य सुरक्षा और तटीय अर्थव्यवस्था का भी आधार है।


कोरल पारिस्थितिकी पर बढ़ते खतरे

वैश्विक स्तर पर कोरल रीफ्स तेजी से नष्ट हो रहे हैं।
Status of Coral Reefs of the World 2020 रिपोर्ट के अनुसार, 2009 से 2018 के बीच विश्वभर में 14% कोरल नष्ट हो चुके हैं।

मुख्य कारण:

  • जलवायु परिवर्तन और बढ़ता समुद्री तापमान

  • कोरल ब्लीचिंग (Coral Bleaching)

  • प्रदूषण और औद्योगिक अपशिष्ट

  • विनाशकारी मछली पकड़ने की तकनीकें

  • अनियंत्रित तटीय विकास और पर्यटन गतिविधियाँ

इन सभी कारणों से समुद्री जैव विविधता का संतुलन बिगड़ रहा है और लाखों समुद्री जीवों का आवास खतरे में है।


कोरल क्या हैं और क्यों महत्वपूर्ण हैं?

कोरल (Corals) समुद्री अस्थि-विहीन जीव (Marine Invertebrates) हैं जो पॉलीप्स (Polyps) नामक सूक्ष्म जीवों की कॉलोनियों में रहते हैं। ये कैल्शियम कार्बोनेट का उत्सर्जन करके एक कठोर ढांचा बनाते हैं, जो आगे चलकर कोरल रीफ (Coral Reef) का रूप लेता है।

कोरल रीफ्स का महत्व:

  • यह समुद्री जीवों का 25% आवास प्रदान करते हैं।

  • तटीय क्षेत्रों को तूफानों और कटाव से बचाते हैं।

  • मछली पालन और पर्यटन उद्योग के लिए आवश्यक हैं।

  • समुद्र में कार्बन डाइऑक्साइड संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।


कोरल ब्लीचिंग क्या है?

जब समुद्र का तापमान बढ़ता है या प्रदूषण बढ़ जाता है, तो कोरल अपने अंदर मौजूद सिम्बायोटिक शैवाल (Zooxanthellae) को बाहर निकाल देते हैं।
इन शैवालों से ही कोरल को रंग और भोजन दोनों मिलता है।
शैवाल के निकल जाने पर कोरल सफेद (Bleached) दिखने लगते हैं और यदि स्थिति जल्दी सुधरती नहीं है, तो वे मर भी सकते हैं।


कोरल रीफ्स के प्रमुख प्रकार

  1. फ्रिंजिंग रीफ्स (Fringing Reefs): तटीय क्षेत्रों के पास पाए जाते हैं।

  2. बैरीयर रीफ्स (Barrier Reefs): तट से दूर, लैगून द्वारा अलग।

  3. एटोल्स (Atolls): डूबे हुए ज्वालामुखी द्वीपों के चारों ओर वृत्ताकार रूप में।


स्थायी तथ्य (Static Facts)

विषय विवरण
देश फिलीपींस
लॉन्च वर्ष 2025
तकनीक क्रायोप्रिज़र्वेशन (विट्रीफिकेशन)
क्रायोबैंक उद्देश्य कोरल लार्वा और आनुवंशिक विविधता संरक्षित करना
तापमान लगभग –196°C (लिक्विड नाइट्रोजन में)
सहयोगी देश ताइवान, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड
कोरल त्रिभुज क्षेत्र इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, PNG, सोलोमन द्वीप, तिमोर-लेस्ते
वैश्विक कोरल हानि (2009–2018) 14%

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