6 अक्टूबर 2025 को फ्रांस की राजनीति में ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने पूरे देश को हैरान कर दिया। प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकॉर्नु (Sébastien Lecornu) ने अपनी नई कैबिनेट की घोषणा के मात्र 14 घंटे बाद ही इस्तीफा दे दिया। यह घटना फ्रांस में पहले से चल रही राजनीतिक अस्थिरता को और गहरा कर गई, जिससे शेयर बाजार और यूरो मुद्रा दोनों पर नकारात्मक असर पड़ा।
पृष्ठभूमि: लगातार बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के पुनर्निर्वाचन (2022) के बाद से ही फ्रांस में राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। संसद में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, जिसके कारण सरकारें कमजोर और अस्थायी साबित होती रहीं।
2024 में कराए गए स्नैप चुनाव (Snap Election) से स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ गई। परिणामस्वरूप नेशनल असेंबली (National Assembly) पहले से भी अधिक विभाजित हो गई। इस स्थिति में राष्ट्रपति मैक्रों ने सितंबर 2025 में अपने करीबी सहयोगी सेबास्टियन लेकॉर्नु को प्रधानमंत्री नियुक्त किया था।
लेकॉर्नु से उम्मीद थी कि वे दाएं और मध्यमार्गी दलों के बीच एक सामंजस्यपूर्ण गठबंधन बना पाएंगे। लेकिन कुछ ही हफ्तों में स्पष्ट हो गया कि उनके नेतृत्व में भी संसद को एकजुट करना लगभग असंभव है।
इस्तीफे के कारण
1. कैबिनेट को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएँ
लेकॉर्नु ने 5 अक्टूबर की रात अपनी कैबिनेट की घोषणा की, जिसमें पुराने चेहरों और विवादास्पद नामों की पुनः वापसी ने राजनीतिक हलचल मचा दी। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि नई सरकार में “कोई नया दृष्टिकोण नहीं” है और यह “सिर्फ मैक्रों की नीतियों की पुनरावृत्ति” है।
यह आलोचना केवल विपक्ष तक सीमित नहीं रही; कुछ सहयोगी और मध्यमार्गी सांसदों ने भी इस कैबिनेट को अस्वीकार्य बताया। नतीजा यह हुआ कि कैबिनेट की पहली बैठक से पहले ही सरकार के गिरने की आशंका गहराने लगी।
2. बहुमत का संकट
लेकॉर्नु की सरकार के पास संसद में कोई स्पष्ट समर्थन नहीं था। लगभग हर प्रमुख राजनीतिक दल ने संकेत दिया था कि वे सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहे हैं।
ऐसे माहौल में सरकार चलाना लगभग असंभव था। स्थिति का आकलन करते हुए लेकॉर्नु ने सोमवार सुबह राष्ट्रपति मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंप दिया।
3. राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया
एलिसी पैलेस (Élysée Palace) ने कुछ ही घंटों में इस्तीफे की पुष्टि कर दी। राष्ट्रपति मैक्रों ने अब देश में नई सरकार के गठन या संभावित रूप से फिर से संसद भंग कर चुनाव कराने के विकल्पों पर विचार शुरू किया है।
फ्रांस की राजनीतिक स्थिति
फ्रांस में यह लगातार पाँचवीं बार है जब दो वर्षों के भीतर प्रधानमंत्री को बदलना पड़ा है। इससे यह संकेत मिलता है कि देश गंभीर शासनगत गतिरोध (Governance Gridlock) का सामना कर रहा है।
नेशनल असेंबली में बहुमत की कमी के कारण कोई भी सरकार स्थिर नहीं रह पा रही। विपक्षी दलों का रवैया कठोर है, और गठबंधन की राजनीति में लगातार टकराव की स्थिति बनी हुई है।
मैक्रों के सामने अब सीमित विकल्प हैं — या तो वे नए प्रधानमंत्री के रूप में किसी सर्वसम्मत व्यक्ति को आगे लाएँ, या फिर संसद को भंग कर नए आम चुनाव की घोषणा करें।
आर्थिक असर
लेकॉर्नु के इस्तीफे का असर फ्रांस के आर्थिक तंत्र पर भी तुरंत देखा गया।
फ्रांसीसी शेयर बाजार CAC 40 में गिरावट दर्ज की गई और यूरो मुद्रा में हल्का दबाव देखने को मिला।
निवेशकों ने इस घटनाक्रम को “फ्रांस की नीति-निर्माण क्षमता पर संकट” के रूप में देखा।
अगले वर्ष का बजट पारित होना भी अब अनिश्चित हो गया है, क्योंकि नई सरकार बनने तक संसद की कार्यवाही बाधित रहेगी।
अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो फ्रांस को अस्थायी वित्तीय प्रावधानों के सहारे प्रशासन चलाना पड़ सकता है।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
वामपंथी दलों ने राष्ट्रपति मैक्रों की नीतियों को असफल बताते हुए उन्हें इस्तीफा देने की मांग की है। उनका आरोप है कि सरकार जनता की आवाज़ से दूर हो चुकी है।
दूसरी ओर, दक्षिणपंथी दलों और नेशनल रैली पार्टी ने संसद को भंग कर तुरंत नए चुनाव कराने की मांग उठाई है।
कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह अस्थिरता बनी रहती है, तो फ्रांस में एक “सहमति आधारित गठबंधन सरकार” की संभावना बढ़ सकती है।
जनता की प्रतिक्रिया
फ्रांस की जनता में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर निराशा की भावना देखी जा रही है।
पिछले दो वर्षों में पाँच प्रधानमंत्रियों का बदलना यह दर्शाता है कि शासन की निरंतरता पूरी तरह टूट चुकी है।
सोशल मीडिया पर लोग इस राजनीतिक अस्थिरता को “संविधानिक संकट” तक बताने लगे हैं।
विशेषकर युवा वर्ग में यह भावना प्रबल हो रही है कि पारंपरिक राजनीतिक दल जनता के मुद्दों से कट चुके हैं।
निष्कर्ष
6 अक्टूबर 2025 का दिन फ्रांस के राजनीतिक इतिहास में अभूतपूर्व रूप से दर्ज रहेगा।
प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकॉर्नु का 14 घंटे में दिया गया इस्तीफा यह दर्शाता है कि देश का राजनीतिक ढाँचा अब बेहद नाज़ुक हो चुका है।
फ्रांस एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ न तो सरकार स्थिर है, न ही विपक्ष संगठित।
राष्ट्रपति मैक्रों के सामने अब चुनौती यह है कि वे देश को फिर से राजनीतिक संतुलन की दिशा में कैसे ले जाएँ।
अगर यह संकट जल्द नहीं सुलझा, तो न केवल फ्रांसीसी राजनीति बल्कि यूरोपीय संघ की स्थिरता और यूरोपीय बाजारों पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
स्थायी तथ्य (Fact Sheet)
| विषय | विवरण |
|---|---|
| राष्ट्रपति | इमैनुएल मैक्रों |
| प्रधानमंत्री (त्यागपत्र देने वाले) | सेबास्टियन लेकॉर्नु |
| इस्तीफा तिथि | 6 अक्टूबर 2025 |
| कार्यकाल | एक माह से भी कम |
| कैबिनेट गठन से इस्तीफे तक का समय | लगभग 14 घंटे |
| मैक्रों के शासन में क्रम | दो वर्षों में पाँचवें प्रधानमंत्री |

