भारत 2025 IUCN कांग्रेस में अपनी पहली ‘रेड लिस्ट ऑफ स्पीशीज़’ जारी करेगा
भारत 2025 IUCN कांग्रेस में अपनी पहली ‘रेड लिस्ट ऑफ स्पीशीज़’ जारी करेगा

भारत 2025 IUCN कांग्रेस में अपनी पहली ‘रेड लिस्ट ऑफ स्पीशीज़’ जारी करेगा

जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भारत 9 से 15 अक्टूबर 2025 के बीच अबू धाबी (संयुक्त अरब अमीरात) में आयोजित होने वाले IUCN वर्ल्ड कंज़र्वेशन कांग्रेस 2025 में अपनी पहली राष्ट्रीय रेड लिस्ट ऑफ एंडेंजर्ड स्पीशीज़ (National Red List of Endangered Species) का अनावरण करेगा।
यह पहल भारत की समृद्ध पारिस्थितिकी और प्रजातियों की सुरक्षा के लिए एक डेटा-आधारित नीति ढांचा तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।

इस राष्ट्रीय सूची का उद्देश्य है — संकटग्रस्त प्रजातियों की पहचान, उनकी स्थिति का आकलन और संरक्षण प्राथमिकताओं को सुदृढ़ करना। यह सूची भारत की अनूठी जैव विविधता और पारिस्थितिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।


भारत का प्रतिनिधित्व और नेतृत्व

भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किर्ति वर्धन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन तथा विदेश मामलों) करेंगे।
वे इस सम्मेलन में भारत की नई पहल — राष्ट्रीय रेड लिस्ट, मानव–वन्यजीव सह-अस्तित्व परियोजनाएँ और नेचर-पॉज़िटिव इकोनॉमी की दृष्टि प्रस्तुत करेंगे।


रेड लिस्ट क्या है और इसका महत्व

रेड लिस्ट ऑफ थ्रेटेन्ड स्पीशीज़ (Red List of Threatened Species), अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा तैयार की जाने वाली एक वैश्विक सूची है जो किसी भी प्रजाति के विलुप्ति जोखिम (Extinction Risk) का वैज्ञानिक मूल्यांकन करती है।
IUCN की यह सूची विश्वभर में जैव विविधता आकलन का सबसे विश्वसनीय और मानक उपकरण मानी जाती है।

भारत की राष्ट्रीय रेड लिस्ट इसी अंतरराष्ट्रीय ढांचे के अनुरूप होगी, लेकिन यह देश-विशिष्ट आंकड़ों, पारिस्थितिक तंत्रों और स्थानीय खतरों को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी।

🔹 भारत की राष्ट्रीय रेड लिस्ट के उद्देश्य:

  • संकटग्रस्त प्रजातियों की पहचान और उनकी स्थिति का वैज्ञानिक विश्लेषण

  • संरक्षण रणनीतियों को डेटा-संचालित बनाना

  • राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर प्राथमिक संरक्षण योजनाओं को दिशा देना

  • वैश्विक लक्ष्यों (जैसे Convention on Biological Diversity – CBD) के अंतर्गत भारत की रिपोर्टिंग को सशक्त बनाना


भारत और IUCN का संबंध

भारत वर्ष 1969 से IUCN का राज्य सदस्य (State Member) है।
भारत ने दशकों से संरक्षण नीति, वन्यजीव अनुसंधान और जैव विविधता प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई है।
हालाँकि, यह पहली बार होगा जब भारत अपनी स्वयं की राष्ट्रीय रेड लिस्ट ऑफ स्पीशीज़ जारी करेगा — जो इसे ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और ब्राज़ील जैसे देशों की श्रेणी में ला खड़ा करेगा जिनके पास पहले से राष्ट्रीय रेड लिस्ट ढांचा मौजूद है।

यह पहल भारत की “Nature-Positive Economy” की दिशा में कदम है, जो Kunming-Montreal Global Biodiversity Framework (GBF) के लक्ष्यों और 2030 तक बायोडायवर्सिटी नेट गेन की वैश्विक प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।


भारत की जैव विविधता: वैश्विक दृष्टि से विशिष्ट

भारत दुनिया के 17 “मेगा-डायवर्स देशों” में से एक है, जो पृथ्वी की लगभग 8% ज्ञात प्रजातियों का घर है।

यहाँ मौजूद हैं:

  • 45,000 से अधिक पुष्पीय पौधों की प्रजातियाँ

  • 500 से अधिक स्तनधारी प्रजातियाँ

  • 400 से अधिक सरीसृप प्रजातियाँ

  • 1,300+ पक्षी प्रजातियाँ

  • हजारों कीट और उभयचर प्रजातियाँ

राष्ट्रीय रेड लिस्ट में शामिल होंगी — स्तनधारी, पक्षी, सरीसृप, उभयचर, कीट और पौधे, जिनका मूल्यांकन IUCN मानदंडों के आधार पर किया जाएगा, जैसे:

  • Critically Endangered (अत्यंत संकटग्रस्त)

  • Endangered (संकटग्रस्त)

  • Vulnerable (असुरक्षित)

  • Near Threatened (लगभग संकटग्रस्त)

इन मूल्यांकनों में आवास विनाश, प्रदूषण, आक्रामक प्रजातियाँ, जलवायु परिवर्तन और मानव गतिविधियों से उत्पन्न खतरे प्रमुख कारक होंगे।


IUCN वर्ल्ड कंज़र्वेशन कांग्रेस 2025 के बारे में

IUCN वर्ल्ड कंज़र्वेशन कांग्रेस हर चार वर्ष में एक बार आयोजित की जाती है और इसे संरक्षण नीति निर्धारण का विश्व मंच माना जाता है।
यह सरकारों, NGOs, वैज्ञानिकों, स्वदेशी समुदायों और वैश्विक नीति-निर्माताओं को एक साथ लाती है ताकि प्रकृति संरक्षण और सतत विकास पर सामूहिक निर्णय लिए जा सकें।

🔹 अबू धाबी कांग्रेस (2025) की प्रमुख थीम्स:

  1. Scaling Up Resilient Conservation Action – संरक्षण कार्यों की सुदृढ़ता और विस्तार

  2. Reducing Climate Overshoot Risks – जलवायु जोखिमों में कमी

  3. Delivering on Equity in Conservation – संरक्षण में समानता सुनिश्चित करना

  4. Transitioning to Nature-Positive Economies – प्रकृति-पॉज़िटिव अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण

  5. Disruptive Innovation and Leadership for Conservation – संरक्षण में नवाचार और नेतृत्व

🔹 पिछली कांग्रेस:

2021 में मार्सेई (फ्रांस) में आयोजित कांग्रेस में 9,200 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए थे, जहाँ “Marseille Manifesto” जारी किया गया था — जो वैश्विक जैव विविधता और जलवायु कार्रवाई के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना गया।


भारत की प्रमुख पहलें जो कांग्रेस में प्रदर्शित होंगी

भारत इस मंच पर अपनी कई सफल संरक्षण परियोजनाएँ प्रस्तुत करेगा, जैसे:

  • प्रोजेक्ट टाइगर – दुनिया का सबसे सफल बाघ संरक्षण कार्यक्रम

  • प्रोजेक्ट एलीफेंट – एशियाई हाथियों की सुरक्षा हेतु राष्ट्रीय प्रयास

  • प्रोजेक्ट डॉल्फिन – नदी और समुद्री डॉल्फिन संरक्षण

  • नेशनल मिशन ऑन बायोडायवर्सिटी एंड ह्यूमन वेल-बीइंग (NMBHW) – जैव विविधता और मानव विकास का संतुलन

इसके अतिरिक्त, भारत अपनी नई राष्ट्रीय रेड लिस्ट फ्रेमवर्क को भी प्रदर्शित करेगा, जो संरक्षण विज्ञान में उसका अगला बड़ा कदम है।


भारत का वैश्विक प्रभाव और सहयोग

भारत के प्रतिनिधिमंडल के साथ-साथ इस सम्मेलन में वैश्विक नेतृत्वकर्ता भी शामिल होंगे:

  • एस्ट्रिड शॉमेकर – कार्यकारी सचिव, Convention on Biological Diversity (CBD)

  • मुख्तार बाबायेव – COP29 अध्यक्ष

  • ग्रेथेल एग्विलर – महानिदेशक, IUCN

  • रिकी केज – ग्रैमी विजेता पर्यावरण दूत

भारत की भागीदारी यह स्पष्ट करेगी कि वह केवल जैव विविधता संरक्षण में सहभागी नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक अग्रणी आवाज है।


मुख्य तथ्य सारांश

विषय विवरण
कार्यक्रम IUCN वर्ल्ड कंज़र्वेशन कांग्रेस 2025
स्थान एवं तिथि अबू धाबी, यूएई – 9 से 15 अक्टूबर 2025
मुख्य घोषणा भारत की पहली राष्ट्रीय रेड लिस्ट ऑफ एंडेंजर्ड स्पीशीज़
प्रतिनिधित्व किर्ति वर्धन सिंह, राज्य मंत्री (पर्यावरण, वन एवं विदेश मामले)
IUCN सदस्यता वर्ष 1969
पिछली कांग्रेस 2021, मार्सेई (फ्रांस)
मुख्य फोकस प्रजाति आकलन, आवास खतरे, विलुप्ति जोखिम
थीम्स संरक्षण, जलवायु, समानता, नवाचार, प्रकृति-पॉज़िटिव अर्थव्यवस्था

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