भारत में तेजी से बदलती रोजगार व्यवस्था के बीच, सरकार और निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी को नया बल मिला है। तकनीक-सक्षम और लचीले रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत सरकार ने फूड डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म Zomato के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस समझौते के तहत, नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल के माध्यम से हर वर्ष लगभग 2.5 लाख रोजगार अवसर सृजित किए जाएंगे, जिनमें प्रमुख रूप से गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स शामिल होंगे। यह पहल न केवल युवाओं और महिला नौकरी-प्रार्थियों को नए अवसर प्रदान करेगी, बल्कि भारत की गिग इकॉनमी को औपचारिक रोजगार व्यवस्था का हिस्सा बनाने की दिशा में भी एक ऐतिहासिक कदम है।
NCS पोर्टल क्या है?
नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल को वर्ष 2015 में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य नियोक्ताओं और नौकरी खोजने वालों के बीच एक डिजिटल कड़ी स्थापित करना है। यह प्लेटफ़ॉर्म नौकरी, प्रशिक्षण, करियर काउंसलिंग, और स्किल डेवलपमेंट से संबंधित सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराता है।
NCS पोर्टल के माध्यम से अब तक 7.7 करोड़ से अधिक नौकरियां सूचीबद्ध की जा चुकी हैं और लाखों उम्मीदवारों ने इसके जरिये अपने लिए अवसर पाए हैं।
यह प्लेटफ़ॉर्म डिजिटल इंडिया मिशन के तहत रोजगार क्षेत्र में पारदर्शिता, दक्षता और समावेशिता बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम है।
Zomato के साथ समझौते की मुख्य बातें
सरकार और Zomato के बीच हुए इस समझौते के बाद NCS पोर्टल पर एक नई “एग्रीगेटर” श्रेणी (Aggregator Category) जोड़ी गई है। इसके अंतर्गत Zomato हर साल लगभग 2.5 लाख नए आजीविका अवसर सूचीबद्ध करेगा।
ये अवसर मुख्य रूप से गिग वर्कर्स, खासकर डिलीवरी पार्टनर्स, के लिए होंगे। इन नौकरियों की कुछ खास बातें हैं:
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रीयल-टाइम और तकनीक-सक्षम कार्य वातावरण
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कार्य समय में लचीलापन (Flexible working hours)
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सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से एकीकरण, ताकि गिग वर्कर्स को बीमा और अन्य लाभ मिल सकें
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शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सुलभता, जिससे छोटे शहरों के युवाओं को भी मौके मिलेंगे
इस पहल को प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) और विकसित भारत 2047 दृष्टिकोण से जोड़ा गया है। इसका लक्ष्य है — भारत में रोजगार सृजन के साथ-साथ रोजगार के औपचारिकीकरण (Formalization) को गति देना।
भारत की गिग इकॉनमी और इस पहल का महत्व
भारत की गिग इकॉनमी (Gig Economy) तेजी से बढ़ रही है। NITI Aayog की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 77 लाख गिग वर्कर्स हैं, और वर्ष 2030 तक यह संख्या 2.35 करोड़ तक पहुँच सकती है।
गिग वर्कर्स वे लोग हैं जो ऐप या प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से काम करते हैं — जैसे फूड डिलीवरी, कैब ड्राइविंग, फ्रीलांस डिज़ाइनिंग, या ऑनलाइन सर्विसेज़ देना।
हालांकि, इन वर्कर्स को पारंपरिक अर्थों में “औपचारिक रोजगार” का दर्जा नहीं मिलता, जिससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा, बीमा, या पेंशन जैसी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता।
Zomato और NCS की यह साझेदारी इस दिशा में एक बड़ा बदलाव लाने जा रही है। इस पहल से:
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गिग वर्कर्स को औपचारिक रोजगार का दर्जा मिलेगा।
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उन्हें डिजिटल पंजीकरण के माध्यम से सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
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रोजगार की गरिमा और स्थिरता बढ़ेगी।
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अन्य प्लेटफ़ॉर्म कंपनियों को भी इस मॉडल को अपनाने के लिए प्रेरणा मिलेगी।
इससे न केवल रोजगार सृजन में वृद्धि होगी, बल्कि गिग सेक्टर को एक संरचित और पारदर्शी व्यवस्था में लाने में मदद मिलेगी।
युवाओं और महिलाओं के लिए अवसर
भारत में युवाओं की आबादी सबसे बड़ी कार्यबल बनकर उभर रही है। ऐसे में लचीले और तकनीक-आधारित रोजगार मॉडल युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं।
Zomato की इस पहल से विशेष रूप से महिलाओं को भी फायदा होगा —
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वे अपने समय के अनुसार काम कर सकेंगी,
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घर के पास उपलब्ध गिग नौकरियों को चुन सकेंगी,
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और डिजिटल माध्यम से सीधा पंजीकरण कर पाएंगी।
सरकार का उद्देश्य है कि ऐसे प्लेटफ़ॉर्म्स के ज़रिए रोजगार और आजीविका के अवसरों में लैंगिक समानता (Gender Inclusion) को बढ़ावा दिया जाए।
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) से जुड़ाव
यह MoU प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) का एक अहम हिस्सा है। इस योजना का उद्देश्य है —
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रोजगार के नए अवसर सृजित करना,
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गिग और असंगठित क्षेत्र को औपचारिक दायरे में लाना,
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और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के विज़न को साकार करना।
इस साझेदारी के जरिए सरकार यह संकेत दे रही है कि प्राइवेट प्लेटफ़ॉर्म्स को अब रोजगार नीति का साझेदार बनाया जाएगा, जिससे पारंपरिक नौकरी ढांचे से आगे बढ़कर नई डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा दिया जा सके।
निष्कर्ष
भारत सरकार और Zomato के बीच हुआ यह समझौता न केवल एक कॉर्पोरेट साझेदारी है, बल्कि यह भारत के रोजगार भविष्य का संकेतक भी है।
जहां एक ओर सरकार डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स को औपचारिक रोजगार तंत्र में शामिल करने का प्रयास कर रही है, वहीं Zomato जैसे प्लेटफ़ॉर्म इस दिशा में साझेदारी करके गिग इकॉनमी को स्थायित्व और सम्मान दिलाने में भूमिका निभा रहे हैं।
इस पहल से आने वाले वर्षों में लाखों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है, साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था में तकनीक-सक्षम रोजगार के नए मॉडल स्थापित होंगे।
मुख्य तथ्य एक नज़र में
| विषय | विवरण |
|---|---|
| पोर्टल | नेशनल करियर सर्विस (NCS) |
| लॉन्च वर्ष | 2015 |
| मंत्रालय | श्रम एवं रोजगार मंत्रालय |
| नया साझेदार | Zomato |
| वार्षिक रोजगार लक्ष्य | 2.5 लाख अवसर |
| संबंधित योजना | प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) |
| मुख्य उद्देश्य | गिग अर्थव्यवस्था का औपचारिकीकरण और समावेशी विकास |
