भारत ने शुरू की ऑनलाइन राष्ट्रीय औषधि लाइसेंसिंग प्रणाली
भारत ने शुरू की ऑनलाइन राष्ट्रीय औषधि लाइसेंसिंग प्रणाली

भारत ने शुरू की ऑनलाइन राष्ट्रीय औषधि लाइसेंसिंग प्रणाली

भारत ने दवाओं की सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। खांसी की सिरप से जुड़ी कई बच्चों की मौतों के बाद देश में अब एक सशक्त डिजिटल निगरानी प्रणाली — ऑनलाइन नेशनल ड्रग लाइसेंसिंग सिस्टम (Online National Drug Licensing System – ONDLS) — लागू की गई है। यह पहल सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) द्वारा संचालित है और इसका उद्देश्य देशभर में फार्मा-ग्रेड सॉल्वेंट्स (Pharma-grade solvents) के उत्पादन, वितरण और उपयोग की रीयल-टाइम निगरानी सुनिश्चित करना है।

ONDLS भारत की फार्मास्यूटिकल सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को नए स्तर पर ले जाने वाला कदम है, जिससे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सकेगा जिनमें दूषित सॉल्वेंट्स के कारण बच्चों की जानें गई थीं।


🔹 क्यों जरूरी हुआ ONDLS?

इस प्रणाली की शुरुआत का सीधा संबंध हालिया मध्य प्रदेश में खांसी की सिरप से बच्चों की मौतों से है।
जांच में पाया गया कि दवा में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol – DEG) — एक औद्योगिक सॉल्वेंट — की मिलावट थी, जो अत्यंत जहरीला है।

यह वही रसायन है जिसने 1970 के दशक से लेकर अब तक भारत और दुनिया के कई देशों में सैकड़ों बच्चों की जान ली है

इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत में दवाओं की गुणवत्ता जांच और कच्चे माल की ट्रेसबिलिटी (Traceability) में गंभीर खामियां हैं।

सरकार पर इस बार व्यवस्थित और तकनीकी समाधान लागू करने का दबाव था, जिसके परिणामस्वरूप ONDLS का निर्माण किया गया — ताकि हर दवा में उपयोग होने वाली सामग्री का स्रोत और गुणवत्ता ट्रैक की जा सके।


🔹 क्या है ONDLS?

ऑनलाइन नेशनल ड्रग लाइसेंसिंग सिस्टम (ONDLS) एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है जो भारत में फार्मास्यूटिकल ग्रेड सॉल्वेंट्स की लाइसेंसिंग, ट्रैकिंग और गुणवत्ता निगरानी को स्वचालित करता है।

इस प्रणाली के माध्यम से अब देश में दवा बनाने वाली हर इकाई को अपने कच्चे माल (raw materials) — खासकर तरल सॉल्वेंट्स — के प्रत्येक बैच का उत्पादन से लेकर उपयोग तक का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज करना अनिवार्य होगा।


🔹 ONDLS के मुख्य कार्य

  1. रीयल-टाइम निगरानी:
    हर फार्मा सॉल्वेंट का बैच उत्पादन, स्टोरेज और सप्लाई चेन के हर चरण पर डिजिटल रूप से ट्रैक किया जाएगा।

  2. गुणवत्ता प्रमाणन:
    प्रत्येक बैच को केवल तभी उपयोग के लिए मंजूरी मिलेगी जब उसके साथ मान्य Certificate of Analysis (CoA) अपलोड होगा।

  3. अवैध या दूषित बैच की रोकथाम:
    अगर किसी सॉल्वेंट में औद्योगिक गुणवत्ता या मिलावट पाई जाती है, तो उसे स्वतः ब्लॉक कर दिया जाएगा, जिससे वह बाजार में न पहुँच सके।

  4. डिजिटल दस्तावेज़ प्रबंधन:
    सभी लाइसेंस, निरीक्षण रिपोर्ट और परीक्षण परिणाम अब एकीकृत डिजिटल सिस्टम में संग्रहीत होंगे।


🔹 निगरानी में आने वाले उच्च जोखिम वाले सॉल्वेंट्स

CDSCO ने उन सॉल्वेंट्स की सूची तय की है जिन्हें ONDLS में अनिवार्य रूप से ट्रैक किया जाएगा, क्योंकि इन्हीं में मिलावट की सबसे अधिक संभावना होती है:

  • ग्लिसरीन (Glycerin)

  • प्रोपिलीन ग्लाइकोल (Propylene Glycol)

  • सोर्बिटोल (Sorbitol)

  • माल्टिटोल (Maltitol)

  • एथिल अल्कोहल (Ethyl Alcohol)

  • हाइड्रोजेनेटेड स्टार्च हाइड्रोलिसेट (Hydrogenated Starch Hydrolysate)

इन सभी का उपयोग सिरप, सस्पेंशन और अन्य तरल दवाओं में होता है।
हालांकि शुद्ध अवस्था में ये सुरक्षित हैं, लेकिन यदि इनमें DEG जैसी औद्योगिक मिलावट हो जाए, तो यह घातक विष साबित हो सकती है।

ONDLS सुनिश्चित करेगा कि केवल फार्मा-ग्रेड, प्रमाणित सॉल्वेंट्स का ही उपयोग दवाओं में किया जाए।


🔹 प्रणाली की तकनीकी विशेषताएँ

  • बैच-वार डेटा एंट्री:
    प्रत्येक निर्माता को हर बैच के लिए डेटा दर्ज करना अनिवार्य होगा।

  • पुराने लाइसेंस प्रबंधन मॉड्यूल (Old Licence Management):
    पुराने लाइसेंसों को भी सिस्टम में एकीकृत किया गया है, ताकि पूरा ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।

  • राज्य और केंद्र स्तर पर निगरानी:
    राज्य औषधि नियंत्रक (SDCAs) निरीक्षण और अनुपालन रिपोर्ट तैयार करेंगे, जबकि CDSCO राष्ट्रीय स्तर पर मॉनिटरिंग करेगा।

  • AI-आधारित जोखिम विश्लेषण:
    सिस्टम संदिग्ध पैटर्न या आपूर्ति शृंखला में विसंगति का स्वतः पता लगाएगा।


🔹 राज्यों की जिम्मेदारी

CDSCO ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे:

  • सभी लाइसेंसधारी सॉल्वेंट निर्माताओं का डेटा ONDLS में अपलोड कराएँ।

  • अनुपालन ऑडिट और औचक निरीक्षण नियमित रूप से करें।

  • निर्माताओं और वितरकों के लिए जागरूकता अभियान चलाएँ ताकि वे प्रणाली का पालन करें।

इसके अलावा, प्रत्येक राज्य में प्रशिक्षण सत्र (Training Modules) आयोजित किए जाएंगे ताकि ड्रग इंस्पेक्टरों और लाइसेंस अधिकारियों को डिजिटल मॉनिटरिंग की तकनीकी समझ दी जा सके।


🔹 पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम

ONDLS न केवल दवा उद्योग को डिजिटल पारदर्शिता की ओर ले जा रहा है, बल्कि यह उपभोक्ता सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक नीति सुधार भी है।

यह प्रणाली सरकार को निम्नलिखित लाभ देगी:

  • अवैध सॉल्वेंट उत्पादन और सप्लाई पर अंकुश

  • राज्य और केंद्र एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय

  • बच्चों और कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षित दवाएँ

  • अंतरराष्ट्रीय नियामक मानकों (WHO, US-FDA) के अनुरूप निगरानी


🔹 आगे की राह

CDSCO ने घोषणा की है कि ONDLS को आने वाले महीनों में दवा निर्माण, पैकेजिंग और वितरण से जुड़ी अन्य सामग्रियों तक भी विस्तारित किया जाएगा।
भविष्य में यह प्रणाली ब्लॉकचेन आधारित फार्मा ट्रेसबिलिटी नेटवर्क में बदली जा सकती है, जो भारत को विश्व के सबसे सुरक्षित दवा उत्पादन केंद्रों में शामिल करेगा।

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