भारत की समुद्री शक्ति और आर्थिक आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक कदम इंडिया मेरीटाइम वीक (IMW) 2025 में देखने को मिला। इस आयोजन के दौरान विशाखापट्टनम पोर्ट अथॉरिटी (VPA) ने कुल ₹39,216 करोड़ मूल्य के कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर कर देश-विदेश के निवेशकों और विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
ये समझौते न केवल भारत की ब्लू इकॉनमी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं, बल्कि आंध्र प्रदेश को समुद्री उद्योग, जहाज निर्माण और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में एक रणनीतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेंगे।
इंडिया मेरीटाइम वीक 2025: भारत के समुद्री भविष्य की झलक
मुंबई में आयोजित IMW 2025 भारत सरकार के पोर्ट्स, शिपिंग एंड वाटरवेज मंत्रालय का एक प्रमुख वार्षिक कार्यक्रम है, जिसमें देश और दुनिया के प्रमुख पोर्ट प्राधिकरण, शिपिंग कंपनियां, लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ और निवेशक शामिल होते हैं।
इस वर्ष का आयोजन “Navigating the Blue Future” थीम पर आधारित था, जिसका उद्देश्य भारत की समुद्री क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करना था।
विशाखापट्टनम पोर्ट अथॉरिटी के प्रमुख समझौते
VPA ने इस आयोजन में कई रणनीतिक साझेदारों के साथ एमओयू किए हैं, जो बंदरगाह अवसंरचना (port infrastructure), लॉजिस्टिक दक्षता, और शिपबिल्डिंग क्षमताओं को बढ़ाने पर केंद्रित हैं।
| एमओयू भागीदार | परियोजना का फोकस |
|---|---|
| आंध्र प्रदेश सरकार | दुगराजपट्टनम में प्रमुख पोर्ट-cum-शिपबिल्डिंग और रिपेयर क्लस्टर |
| मेकॉन इंडिया लिमिटेड | लॉजिस्टिक्स सुधार हेतु स्टैकयार्ड और रेलवे साइडिंग्स |
| एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड | हार्बर पार्क भूमि का विकास और मॉनेटाइजेशन |
| हडको (HUDCO) | कार्गो बर्थ का मशीनीकरण और हरित तकनीक से आधुनिकीकरण |
| रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) | पोर्ट परिसर के भीतर आंतरिक फ्लाईओवर और कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर |
₹29,662 करोड़ की दुगराजपट्टनम मेगा शिपबिल्डिंग परियोजना
इस एमओयू श्रृंखला में सबसे बड़ा निवेश ₹29,662 करोड़ का है, जो आंध्र प्रदेश सरकार के साथ दुगराजपट्टनम में मेगा पोर्ट-cum-शिपबिल्डिंग और रिपेयर क्लस्टर स्थापित करने के लिए किया गया है।
यह परियोजना “मेक इन इंडिया” के तहत देशी जहाज निर्माण (Shipbuilding) और मरम्मत (Repair) उद्योग को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
परियोजना के प्रमुख लाभ:
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हजारों लोगों के लिए रोजगार सृजन
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देशी जहाज निर्माण को बढ़ावा
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आंध्र प्रदेश को वैश्विक शिपबिल्डिंग हब के रूप में विकसित करना
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भारत के तटीय औद्योगिक गलियारों (Coastal Industrial Corridors) से बेहतर एकीकरण
इसके अलावा, दक्षिण कोरियाई कंपनी HD Korean Shipbuilders Offshore Engineers Ltd ने भी इस क्लस्टर में तकनीकी सहयोग के लिए रुचि दिखाई है, जिससे यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित होगी।
लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की दिशा में कदम
मेकॉन इंडिया लिमिटेड के साथ लगभग ₹3,000 करोड़ का एमओयू आधुनिक स्टैकयार्ड, रेलवे साइडिंग्स और कार्गो मैनेजमेंट सिस्टम विकसित करने के लिए किया गया है।
इससे न केवल कार्गो हैंडलिंग समय कम होगा, बल्कि व्यापारिक कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।
वहीं, हडको के साथ ₹487.38 करोड़ के निवेश से कार्गो बर्थ का मशीनीकरण और हरित तकनीक के माध्यम से आधुनिकीकरण किया जाएगा। इससे पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ संचालन (Sustainable Operations) सुनिश्चित होगा।
एनबीसीसी (इंडिया) और RVNL के साथ हुए समझौते बंदरगाह क्षेत्र में भूमि के विकास, रियल एस्टेट मॉनेटाइजेशन और आंतरिक कनेक्टिविटी सुधार पर केंद्रित हैं।
ब्लू इकॉनमी मिशन के लक्ष्यों से जुड़ी पहल
इन सभी परियोजनाओं का उद्देश्य भारत के ब्लू इकॉनमी मिशन, सागरमाला परियोजना, और समुद्री विज़न 2030 के लक्ष्यों के अनुरूप है।
सरकार का लक्ष्य है कि भारत को आने वाले दशक में एशिया का अगला लॉजिस्टिक्स और पोर्ट हब बनाया जाए।
ब्लू इकॉनमी के तहत भारत अपने तटीय क्षेत्रों को आर्थिक वृद्धि के प्रमुख केंद्रों में बदलने की दिशा में कार्य कर रहा है, जिससे समुद्री व्यापार, जहाज निर्माण, मत्स्य पालन, और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में तीव्र प्रगति हो सके।
सरकार और उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
पोर्ट्स, शिपिंग और वाटरवेज मंत्री ने कहा —
“IMW 2025 में विशाखापट्टनम पोर्ट अथॉरिटी द्वारा किए गए ये समझौते भारत को एक सशक्त समुद्री राष्ट्र बनाने की दिशा में निर्णायक कदम हैं। ये निवेश आंध्र प्रदेश को ब्लू इकॉनमी के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेंगे।”
वहीं, VPA चेयरमैन ने कहा —
“₹39,000 करोड़ से अधिक के निवेश भारत के पोर्ट इकोसिस्टम को पुनर्परिभाषित करेंगे। यह बंदरगाह अब डिजिटल, ग्रीन और हाई-कैपेसिटी पोर्ट के रूप में उभरने की दिशा में अग्रसर है।”

