10 नवंबर 2025 की सुबह दिल्ली का ऐतिहासिक लाल किला (Red Fort) एक बार फिर सुर्खियों में आ गया, जब इसके पास एक कम तीव्रता वाला विस्फोट हुआ। यह घटना राष्ट्रीय राजधानी के सबसे सुरक्षित और भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थलों में से एक पर घटित हुई, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी मच गई।
घटना का समय और स्थान
विस्फोट लाल किले के लाहौरी गेट के पास लगभग सुबह 10:25 बजे हुआ। उस समय परिसर में दर्जनों पर्यटक और स्थानीय लोग मौजूद थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, धमाका परिसर की दीवार से थोड़ी दूरी पर एक कचरे के डिब्बे के पास हुआ, जिससे हल्का धुआँ उठा और आसपास की खिड़कियों के शीशे टूट गए।
सुरक्षा बलों की त्वरित कार्रवाई
धमाके की आवाज़ सुनते ही वहां तैनात CISF और दिल्ली पुलिस के जवानों ने तुरंत क्षेत्र को घेर लिया। एनएसजी (राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड) और बम निरोधक दस्ते को मौके पर बुलाया गया। पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया गया और लाल किले को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।
हताहत और नुकसान
इस विस्फोट में 2 लोगों के हल्के घायल होने की सूचना है, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। कोई बड़ा जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने इसे सुरक्षा में गंभीर चूक के रूप में देखा है।
जांच एजेंसियों की भूमिका
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी), और आईबी (खुफिया ब्यूरो) ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की है। प्रारंभिक जांच में यह आईईडी (Improvised Explosive Device) होने की आशंका जताई गई है, जो संभवतः किसी बैग में रखी गई थी।
जांच टीमें आसपास के CCTV फुटेज खंगाल रही हैं और मौके से रासायनिक अवशेष इकट्ठा कर फॉरेंसिक जांच कर रही हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। केंद्रीय गृह मंत्री ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और दिल्ली में संवेदनशील स्थलों पर अलर्ट जारी किया गया।
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने भी घटना की निंदा करते हुए कहा कि “राजधानी के प्रतीक स्थल पर इस तरह का प्रयास अस्वीकार्य है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
लाल किला और सुरक्षा की पृष्ठभूमि
लाल किला भारत के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में से एक है, जहाँ हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री तिरंगा फहराते हैं। सुरक्षा के लिहाज से यह “रेड जोन” में आता है, जहाँ ड्रोन, संदिग्ध वस्तुएँ या अनधिकृत प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। 2025 की यह घटना सुरक्षा तंत्र की मजबूती और सतर्कता की नई चुनौती बनकर सामने आई है।
निष्कर्ष
लाल किला विस्फोट 2025 भले ही कम तीव्रता वाला रहा हो, लेकिन इसने देश की राजधानी में सुरक्षा के प्रति कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच एजेंसियों की प्राथमिकता अब यह जानना है कि यह घटना किसी आतंकी साजिश का हिस्सा थी या किसी स्थानीय स्तर की गड़बड़ी।
सरकार और सुरक्षा बलों की सक्रियता से स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इस घटना ने यह याद दिलाया है कि ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं।

