भारत ने ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। 11 नवंबर 2025 को विद्युत एवं आवास और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने देश की पहली मेगावॉट-घंटा (MWh) क्षमता वाली वैनाडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी (Vanadium Redox Flow Battery – VRFB) प्रणाली का शुभारंभ किया। यह अत्याधुनिक 3 MWh प्रणाली एनटीपीसी नेत्रा (NTPC NETRA), ग्रेटर नोएडा में स्थापित की गई है, जो एनटीपीसी का प्रमुख अनुसंधान एवं विकास केंद्र है।
इस अवसर पर विद्युत सचिव श्री पंकज अग्रवाल और एनटीपीसी के सीएमडी श्री गुरदीप सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह परियोजना भारत की दीर्घ-अवधि ऊर्जा भंडारण (Long Duration Energy Storage – LDES) क्षमताओं को सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण और ग्रिड स्थिरता को नई मजबूती मिलेगी।
वैनाडियम फ्लो बैटरी क्या है?
पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरियों के विपरीत, वैनाडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी एक द्रव-आधारित ऊर्जा भंडारण प्रणाली है जो विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं में वैनाडियम आयनों का उपयोग करती है। यह बैटरी विद्युत ऊर्जा को दो इलेक्ट्रोलाइट टैंकों में रासायनिक रूप में संग्रहित करती है।
इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें बिजली को लंबे समय तक सुरक्षित रूप से रखा जा सकता है, जिससे सौर और पवन जैसी अनियमित नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त बिजली को स्थिर रूप से उपयोग किया जा सके।
मुख्य विशेषताएँ
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अग्निरोधी (Non-flammable): VRFB में आग लगने का जोखिम नहीं होता, जिससे यह अधिक सुरक्षित बनती है।
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लंबी सायकल जीवन अवधि (Long Cycle Life): यह तकनीक लाखों चार्ज-डिस्चार्ज चक्रों तक काम कर सकती है।
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स्केलेबल डिज़ाइन: पावर और ऊर्जा क्षमता को अलग-अलग बढ़ाया जा सकता है, जिससे आवश्यकता के अनुसार विस्तार संभव है।
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कम रखरखाव लागत: इसकी कार्यप्रणाली रासायनिक रूप से स्थिर होती है, जिससे रखरखाव अपेक्षाकृत कम रहता है।
इस स्वदेशी प्रणाली का विकास भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता (Energy Self-Reliance) को बढ़ाता है और लिथियम व दुर्लभ खनिजों पर निर्भरता को घटाता है, जो प्रायः चीन और अन्य देशों से आयातित होते हैं।
भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों में योगदान
भारत ने 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन (Net Zero Emission) का लक्ष्य तय किया है। इस दिशा में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का तेजी से विस्तार हो रहा है, परंतु इनकी अनियमित प्रकृति (intermittency) के कारण ऊर्जा भंडारण की आवश्यकता बढ़ती जा रही है।
NTPC NETRA की यह परियोजना भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) और कार्बन न्यूट्रैलिटी के लक्ष्यों के अनुरूप है। इसका उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा के हिस्से को बढ़ाना, लोड संतुलन (load balancing) सुनिश्चित करना और बिजली की अबाधित आपूर्ति (uninterrupted power supply) प्रदान करना है।
श्री मनोहर लाल ने इस अवसर पर कहा —
“इस प्रकार के नवाचार भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण की दिशा में अग्रसर करते हैं। एनटीपीसी नेत्रा जैसे अनुसंधान केंद्र देश की भविष्य की ऊर्जा संरचना के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को ग्रीन हाइड्रोजन, कार्बन कैप्चर, और वेस्ट-टू-एनर्जी जैसी नई तकनीकों में निरंतर अनुसंधान करते रहना चाहिए ताकि आने वाले वर्षों में देश की ऊर्जा प्रणाली और अधिक टिकाऊ व स्मार्ट बन सके।
एनटीपीसी नेत्रा की अन्य नवाचार परियोजनाएँ
मंत्री ने अपने दौरे के दौरान कई नवाचार परियोजनाओं की भी समीक्षा की, जिनमें शामिल हैं:
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ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी प्लांट – स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए।
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एसटीपी जल आधारित ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र – अपशिष्ट जल से ऊर्जा उत्पादन का मॉडल।
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सॉलिड ऑक्साइड आधारित उच्च तापमान भाप इलेक्ट्रोलाइज़र – उच्च दक्षता वाली हाइड्रोजन उत्पादन प्रणाली।
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नगर निगम ठोस अपशिष्ट (RDF) आधारित स्टीम गैसीफिकेशन प्लांट – कचरे से ऊर्जा उत्पन्न करने की तकनीक।
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एसी माइक्रोग्रिड (4 MWp सोलर + 1 MWh लिथियम-एनएमसी बैटरी स्टोरेज) – स्थानीय स्तर पर स्थायी ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु।
ये सभी परियोजनाएँ एनटीपीसी की स्वच्छ ऊर्जा अनुसंधान और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं तथा भारत की कम-कार्बन अर्थव्यवस्था (Low-Carbon Economy) की नींव मजबूत करती हैं।
मुख्य तथ्य एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| घटना की तिथि | 11 नवंबर 2025 |
| स्थान | एनटीपीसी नेत्रा (NETRA), ग्रेटर नोएडा |
| बैटरी प्रकार | वैनाडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी (VRFB) |
| क्षमता | 3 MWh |
| उद्घाटनकर्ता | श्री मनोहर लाल, विद्युत एवं आवास एवं शहरी कार्य मंत्री |
| उद्देश्य | दीर्घ-अवधि ऊर्जा भंडारण और नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण |
| अन्य तकनीकें | ग्रीन हाइड्रोजन, कार्बन कैप्चर, वेस्ट-टू-एनर्जी, माइक्रोग्रिड्स |
| महत्व | भारत की पहली MWh-स्तरीय VRFB प्रणाली; ऊर्जा परिवर्तन और ग्रिड स्थिरता में सहायक |

