ओडिशा ने एक बार फिर अपने तटीय प्रबंधन और सतत पर्यटन प्रयासों से राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की है। राज्य के सुनापुर बीच और पुरी के गोल्डन बीच को वर्ष 2025–26 के लिए प्रतिष्ठित ‘ब्लू फ्लैग’ प्रमाणन प्रदान किया गया है। यह अंतरराष्ट्रीय लेबल दर्शाता है कि ये समुद्र तट स्वच्छ, सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल और वैश्विक मानकों के अनुरूप हैं।
सुनापुर बीच को यह मान्यता लगातार तीसरी बार मिली है, जबकि पुरी गोल्डन बीच लगातार सातवीं बार ब्लू फ्लैग सूची में शामिल हुआ है, जो इसे भारत के सबसे विश्वसनीय और टिकाऊ समुद्र तटों में से एक बनाता है।
ब्लू फ्लैग प्रमाणन डेनमार्क स्थित संस्था फ़ाउंडेशन फ़ॉर एनवायरनमेंटल एजुकेशन (FEE) द्वारा दिया जाता है। पूरे देश में कुल 13 समुद्र तट इस सूची में शामिल हुए हैं, जिनमें से 12 को पूर्ण प्रमाणन और पुडुचेरी के ईडन बीच को शर्तों के साथ प्रमाणन प्राप्त हुआ है। ओडिशा के दोनों समुद्र तट पूर्ण प्रमाणन की सूची में शामिल हैं।
ब्लू फ्लैग प्रमाणन क्या है?
ब्लू फ्लैग दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित ईको-लेबल्स में से एक है, जो उन समुद्र तटों और मरीना को प्रदान किया जाता है जो उच्चतम स्तर की पर्यावरणीय गुणवत्ता और पर्यटन सुरक्षा मानकों को पूरा करते हैं।
इसके लिए कुल 33 कठोर मानदंडों का पालन अनिवार्य होता है, जिनमें शामिल हैं:
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उत्तम जल गुणवत्ता
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कचरा और पर्यावरण प्रबंधन
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सुरक्षा व्यवस्था
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पर्यावरण शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम
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आपदा प्रतिक्रिया क्षमता
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सतत पर्यटन अवसंरचना
जो समुद्र तट इन मानकों को लगातार बनाए रखते हैं, केवल वे ही ब्लू फ्लैग प्रमाणन का दर्जा हासिल कर पाते हैं। यह प्रमाणन किसी देश की तटीय प्रबंधन प्रणाली की वैश्विक गुणवत्ता दर्शाता है।
ओडिशा की ब्लू फ्लैग सफलता कहानी
1. सुनापुर बीच (गंजाम जिला)
लगातार तीसरे वर्ष प्रमाणित हुआ सुनापुर बीच अपनी स्वच्छता, प्राकृतिक सुंदरता और समुदाय-आधारित संरक्षण मॉडल के लिए देशभर में एक आदर्श बनकर उभरा है।
इसके प्रमुख विशेषताएँ:
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बहुड़ा नदी और बंगाल की खाड़ी का संगम
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स्वच्छ और शांत वातावरण
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पर्यावरण-संवेदी पर्यटन मॉडल
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नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण और सख्त कचरा प्रबंधन प्रणाली
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स्थानीय समुदाय द्वारा संचालित सुरक्षा और संरक्षण प्रयास
सुनापुर बीच प्रकल्प का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी। प्रशासन और समुदाय के संयुक्त प्रयासों ने इसे लगातार तीसरी बार अंतरराष्ट्रीय मानदंडों पर खरा उतारा है।
2. पुरी का गोल्डन बीच
पुरी गोल्डन बीच को लगातार सातवीं बार ब्लू फ्लैग प्रमाणित किया गया है — जो इसे भारत के सबसे लंबे समय तक प्रमाणित रहने वाले बीचों में शामिल करता है।
इसके कारण यह बीच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए एक आकर्षक और सुरक्षित गंतव्य बन गया है।
पुरी गोल्डन बीच की प्रमुख विशेषताएँ:
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अत्याधुनिक स्वच्छता और कचरा निस्तारण प्रणाली
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समर्पित स्नान क्षेत्र (Dedicated bathing zone)
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प्रशिक्षित लाइफगार्ड और स्कैनिंग सिस्टम
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सभी आयु और क्षमताओं के लोगों के लिए अनुकूलित सुविधाएँ
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दिव्यांग-अनुकूल मार्ग और पर्यावरण शिक्षा केंद्र
सुरक्षा, पर्यावरण-अनुकूल डिज़ाइन और स्मार्ट मैनेजमेंट के कारण यह बीच तटीय पर्यटन का एक मॉडल बन चुका है।
भारत की राष्ट्रीय स्थिति (2025–26)
वर्ष 2025–26 में भारत के कुल 13 समुद्र तटों को ब्लू फ्लैग प्रमाणन प्राप्त हुआ है। इनमें से:
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12 बीच पूर्ण रूप से प्रमाणित
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1 बीच (ईडन बीच, पुडुचेरी) को शर्तों सहित प्रमाणन
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ओडिशा के सुनापुर और पुरी बीच पूर्ण प्रमाणित बीचों की सूची में शामिल
यह उपलब्धि भारतीय तटीय राज्यों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि देश सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार पर्यटन की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।
सस्टेनेबल टूरिज़्म और सामुदायिक भागीदारी
ओडिशा में ब्लू फ्लैग प्रमाणन प्राप्त करने के पीछे प्रशासन, स्थानीय समुदाय और तटीय प्रबंधन टीमों के संयुक्त प्रयासों की अहम भूमिका रही है।
दोनों समुद्र तटों पर पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाएँ न सिर्फ़ सुरक्षा और सुविधा बढ़ाती हैं बल्कि पर्यावरण संवेदनशीलता को भी बढ़ावा देती हैं:
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प्रशिक्षित लाइफगार्ड और पैरामेडिक्स
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व्हीलचेयर-अनुकूल बीच एक्सेस पथ
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ज़ीरो-लिक्विड-डिस्चार्ज आधारित कचरा प्रबंधन
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CCTV निगरानी
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सोलर ऊर्जा आधारित सुविधाएँ
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पर्यावरण शिक्षा केंद्र और सूचना बोर्ड
यह सुनिश्चित करता है कि पर्यटकों को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल अनुभव मिल सके और स्थानीय आजीविका को भी बढ़ावा मिले।
स्थैतिक तथ्य (Static Facts)
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सुनापुर बीच: लगातार तीसरे वर्ष ब्लू फ्लैग प्रमाणित
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पुरी गोल्डन बीच: लगातार सातवें वर्ष प्रमाणित
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ब्लू फ्लैग कार्यक्रम: FEE (डेनमार्क) द्वारा संचालित
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मानदंड: कुल 33 — जल गुणवत्ता, कचरा प्रबंधन, सुरक्षा, जागरूकता
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भारत में प्रमाणित बीच (2025–26): 13
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स्थान: सुनापुर — बहुड़ा नदी और बंगाल की खाड़ी का संगम

