ढाका में आयोजित 24वीं एशियन आर्चरी चैंपियनशिप 2025 भारत के लिए ऐतिहासिक साबित हुई। भारतीय तीरंदाजी टीम ने अपने अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक—जिनमें 6 स्वर्ण, 3 रजत और 1 कांस्य शामिल हैं—हासिल किए और पदक तालिका में प्रथम स्थान पर कब्ज़ा किया।
यह प्रदर्शन न केवल भारतीय तीरंदाजी की बढ़ती ताकत दिखाता है, बल्कि एशियाई तीरंदाजी में लंबे समय से कायम दक्षिण कोरिया की बादशाहत को चुनौती देने वाला नया मोड़ भी साबित हुआ।
अंकिता और धीरज की स्वर्णिम चमक: व्यक्तिगत स्पर्धाओं में इतिहास रचा
भारत के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि रही रिकर्व व्यक्तिगत स्पर्धाओं में दो स्वर्ण पदक, जहाँ दोनों शीर्ष भारतीय तीरंदाज़ों ने दमदार प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया।
अंकिता भावगत – महिला रिकर्व स्वर्ण
अंकिता भावगत ने फाइनल में दक्षिण कोरिया की ओलंपिक रजत पदक विजेता नाम सुह्येओन को शानदार अंदाज़ में 7-3 से हराया।
यह जीत इसलिए और खास हो जाती है क्योंकि अंकिता ने सेमीफाइनल में अपनी ही साथी और पूर्व विश्व नंबर-1 दीपिका कुमारी को शूट-ऑफ में हराकर फाइनल में जगह बनाई थी।
दबाव में खेलते हुए अंकिता ने मानसिक मजबूती, सटीकता और निरंतरता—तीनों का बेहतरीन संतुलन दिखाया।
धीरज बोम्मादेवारा – पुरुष रिकर्व स्वर्ण
पुरुष रिकर्व में धीरज बोम्मादेवारा ने अपने हमवतन राहुल को 6-2 से हराकर भारत को दूसरा स्वर्ण दिलाया।
भारत का यह 1–2 फिनिश इस बात का प्रमाण है कि देश रिकर्व तीरंदाजी में अब एशिया की मजबूत ताकतों में शामिल हो चुका है।
टीम इवेंट्स में भारत की दमदार उपस्थिति
व्यक्तिगत इवेंट्स के साथ-साथ टीम इवेंट्स में भी भारतीय तीरंदाजों ने असाधारण प्रदर्शन किया, जिसने कुल पदक संख्या को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचाया।
रिकर्व टीम इवेंट्स
-
महिला रिकर्व टीम, जिसमें अंकिता भी शामिल थीं, ने फाइनल में रोमांचक मुकाबले में दक्षिण कोरिया को हराकर स्वर्ण जीता।
-
संगीता ने महिला रिकर्व में कांस्य जीता, जहाँ उन्होंने दीपिका कुमारी को शूट-ऑफ में हराया।
यह प्रदर्शन दर्शाता है कि भारत की रिकर्व तीरंदाजी अब व्यक्तिगत प्रतिभा के साथ-साथ टीम मजबूतियों में भी दुनिया की शीर्ष टीमों के बराबर खड़ी है।
कंपाउंड श्रेणी में भी भारत का दबदबा
कंपाउंड श्रेणी में भारतीय तीरंदाजों ने लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कई स्वर्ण पदक जीते।
महिला कंपाउंड टीम – स्वर्ण
दीपशिखा, ज्योति शूरखा वेणम और पृथिका प्रदीप की टीम ने कोरिया को 236–234 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
कंपाउंड मिक्स्ड टीम – स्वर्ण
अभिषेक वर्मा और दीपशिखा की जोड़ी ने बांग्लादेश को हराते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। इस प्रदर्शन ने कंपाउंड सेक्शन में भारत की स्थिरता और ताकत को फिर साबित किया।
पुरुष कंपाउंड टीम – रजत
पुरुष कंपाउंड टीम कड़े मुकाबले में कजाख़स्तान से हार गई और रजत पदक से संतोष करना पड़ा, लेकिन प्रदर्शन बेहद प्रतिस्पर्धी रहा।
दक्षिण कोरिया का दबदबा टूटा: एशियाई तीरंदाजी में नया युग
एशियाई तीरंदाजी में विशेषकर रिकर्व इवेंट में दक्षिण कोरिया का दो दशकों का दबदबा रहा है।
लेकिन 2025 की यह चैंपियनशिप एशिया में शक्ति-संतुलन बदलने का संकेत देती है।
भारत ने इस टूर्नामेंट में:
-
महिला रिकर्व व्यक्तिगत स्वर्ण
-
पुरुष रिकर्व व्यक्तिगत स्वर्ण
-
महिला रिकर्व टीम स्वर्ण
तीनों इवेंट्स में कोरिया को पछाड़कर साफ संदेश दिया कि एशियाई तीरंदाजी अब सिर्फ कोरिया के इर्द-गिर्द नहीं घूमती।
सबसे बड़ी उपलब्धि रही पुरुष टीम रिकर्व में कोरिया की 12 साल पुरानी विजयी श्रृंखला का अंत, जिसने पूरे तीरंदाजी जगत को चौंका दिया।
रिकॉर्ड पदक: भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
2025 की चैंपियनशिप में भारत ने कुल 10 पदक जीते:
-
6 स्वर्ण
-
3 रजत
-
1 कांस्य
यह उपलब्धि भारत के तीरंदाजी इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
भारत की सफलता के पीछे क्या है?
भारत की इस शानदार उपलब्धि के पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
1. बेहतर प्रशिक्षण ढांचा
देशभर में नए आर्चरी सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कैंप और कोचिंग मॉडल ने खिलाड़ियों की क्षमता बढ़ाई है।
2. उन्नत उपकरण और आधुनिक तकनीक का उपयोग
एरो डायनेमिक्स, बायोमैकेनिक्स और डेटा एनालिसिस ने भारत के प्रशिक्षण को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया है।
3. आर्चरी प्रीमियर लीग जैसी प्रतियोगिताएँ
इससे घरेलू स्तर पर खिलाड़ियों को उच्च मानक के मुकाबले और एक्सपोज़र मिले।
4. युवा खिलाड़ियों का उभार
अंकिता और धीरज जैसे युवा खिलाड़ियों ने दिखाया कि भारत की नई पीढ़ी अब दुनिया से टक्कर लेने के लिए तैयार है।
पदक तालिका (भारत)
| पदक | संख्या |
|---|---|
| स्वर्ण | 6 |
| रजत | 3 |
| कांस्य | 1 |
| कुल पदक | 10 |
यह सिर्फ आँकड़ा नहीं, बल्कि भारत की नई तीरंदाजी ताकत का प्रमाण है।
प्रभाव और भविष्य: भारत के लिए बड़ी उम्मीदें
2025 एशियन आर्चरी चैंपियनशिप में भारत का यह प्रदर्शन सिर्फ एक टूर्नामेंट विजेता बनने की कहानी नहीं, बल्कि एक उभरती तीरंदाजी महाशक्ति की शुरुआत है।
इस प्रदर्शन ने:
-
युवा खिलाड़ियों को प्रेरित किया
-
भारत की तैयारी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया
-
एशियाई तीरंदाजी में शक्ति-संतुलन बदल दिया
अंकिता भावगत, धीरज बोम्मादेवारा, दीपशिखा जैसे खिलाड़ियों की सफलता ने देश में नए तीरंदाजों को प्रेरित किया है।
मुख्य स्थैतिक तथ्य (Static GK)
-
इवेंट: 24वीं एशियन आर्चरी चैंपियनशिप
-
स्थान: ढाका, बांग्लादेश
-
भारत के कुल पदक: 10
-
स्वर्ण: 6
-
रजत: 3
-
कांस्य: 1
-
व्यक्तिगत स्वर्ण: अंकिता भावगत (महिला रिकर्व), धीरज बोम्मादेवारा (पुरुष रिकर्व)
-
टीम स्वर्ण: महिला रिकर्व टीम, महिला कंपाउंड टीम, कंपाउंड मिक्स्ड टीम
-
कोरिया की रिकर्व में 12 साल की बादशाहत समाप्त

