यह बड़ा निर्णय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने लिया है। नई श्रृंखला का उद्देश्य देश की आर्थिक स्थिति को अधिक सटीक, अद्यतन और बदलते समय के अनुरूप दर्शाना है। नीति-निर्माण, आर्थिक योजना, बजट विश्लेषण और अकादमिक शोध—सभी के लिए यह बदलाव अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आधार वर्ष क्यों बदला जाता है?
राष्ट्रीय खाते—जिनसे देश का GDP, GVA, निवेश, उपभोग और अन्य महत्वपूर्ण संकेतक निकलते हैं—को समय-समय पर अपडेट करना जरूरी होता है। इसकी वजह यह है कि अर्थव्यवस्था लगातार बदलती रहती है: लोग अलग तरह से खर्च करने लगते हैं, नए सेक्टर उभरते हैं, तकनीक बढ़ती है, और उत्पादन तथा रोजगार के पैटर्न में बदलाव आता है। ऐसे में पुराने आधार वर्ष पर बने आँकड़े वास्तविक तस्वीर को सही तरह से नहीं दर्शा पाते।
आधार वर्ष बदलने के मुख्य कारणों में शामिल हैं:
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अर्थव्यवस्था की संरचना में आए बदलावों का बेहतर प्रदर्शन
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नए और अधिक सटीक डाटा स्रोतों का उपयोग
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अंतरराष्ट्रीय मानकों, विशेषकर SNA 2008, के अनुरूप पद्धति अपनाना
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उपभोग पैटर्न, उत्पादन प्रवृत्तियों और निवेश संरचना में बदलावों का समायोजन
भारत में पिछली बार बड़ा संशोधन 2015 में हुआ था, जब आधार वर्ष 2004–05 से बदलकर 2011–12 किया गया। 2026 में जारी होने वाली नई श्रृंखला एक ऐसे दौर को कैप्चर करेगी जिसमें कोविड-19 के बाद अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव आए, डिजिटल सेक्टर की हिस्सेदारी तेज़ी से बढ़ी, और सेवाक्षेत्र की भूमिका और मजबूत हुई।
नई श्रृंखला में क्या होगा नया?
MoSPI की योजना है कि नई श्रृंखला में डेटा स्रोतों का व्यापक विस्तार किया जाए। इसमें डिजिटल पेमेंट्स, ऑनलाइन सेवाओं, ई-कॉमर्स, गिग और प्लेटफ़ॉर्म इकॉनमी जैसे क्षेत्रों को बेहतर तरीके से मापा जाएगा। भारत में असंगठित क्षेत्र का हिस्सा बहुत बड़ा है, इसलिए उसके अनुमान भी नई पद्धतियों से अधिक सटीक किए जाएंगे।
नई श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी होगा कि डेटा संग्रहण और गणना प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाई जाए। इस दिशा में मंत्रालय सलाहकार समिति और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से व्यापक प्रयास कर रहा है।
राष्ट्रीय खाता सांख्यिकी सलाहकार समिति (ACNAS)
नई श्रृंखला तैयार करने के लिए राष्ट्रीय खाता सांख्यिकी सलाहकार समिति (ACNAS) गठित की गई है, जिसके अध्यक्ष प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो. बी.एन. गोल्डर हैं। समिति का काम है नई पद्धतियों, डेटा स्रोतों और संकलन प्रक्रियाओं की समीक्षा कर सरकार को सिफारिशें देना।
समिति के प्रमुख कार्य:
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सटीकता बढ़ाने के लिए नए डेटा स्रोतों की पहचान
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पुराने या अप्रासंगिक स्रोतों को अपडेट या हटाने की सिफारिश
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अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विधियों का समायोजन
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राष्ट्रीय खातों को नीति-निर्माताओं और शोधकर्ताओं के लिए अधिक उपयोगी बनाना
पारदर्शिता के लिए चर्चा पत्र
MoSPI ने नई श्रृंखला की पद्धति और डेटा संरचना को समझाने के उद्देश्य से चर्चा पत्र (Discussion Papers) जारी करने शुरू कर दिए हैं।
पहला चर्चा पत्र:
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उत्पादन और आय आधारित अनुमानों पर केंद्रित
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GDP और GVA की नाममात्र एवं वास्तविक गणना में संभावित बदलावों की व्याख्या
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विभिन्न क्षेत्रों में डेटा स्रोतों के अपडेट की जानकारी
आगामी चर्चा पत्र:
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व्यय-आधारित अनुमान (Consumption, Investment, Government Expenditure, Net Exports) पर केंद्रित
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उपभोग और निवेश मापन की नई पद्धतियों की व्याख्या
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आधुनिक सेवाओं और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बेहतर तरीके से शामिल करने की प्रक्रिया
इन चर्चा पत्रों का उद्देश्य छात्रों, शोधकर्ताओं, अर्थशास्त्रियों और नीति-निर्माताओं को नई श्रृंखला की संरचना और पद्धति को गहराई से समझने में मदद करना है।
नई श्रृंखला से होने वाले संभावित लाभ
नई राष्ट्रीय खाता श्रृंखला के कई महत्त्वपूर्ण फायदे होंगे:
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GDP के अधिक सटीक और समयानुकूल अनुमान
अद्यतन डेटा स्रोतों के कारण आर्थिक विकास की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। -
डिजिटल और उभरते क्षेत्रों का बेहतर आकलन
गिग इकॉनमी, ई-कॉमर्स, डिजिटल सेवाओं और स्टार्टअप सेक्टर की हिस्सेदारी अब अधिक स्पष्ट होगी। -
असंगठित और अनौपचारिक क्षेत्रों का सुधारित मापन
अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा अब सही तरह से कैप्चर होगा। -
नीति-निर्माण के लिए अधिक विश्वसनीय आधार
बजट, आर्थिक पूर्वानुमान, निवेश रणनीतियों और कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ेगी। -
अंतरराष्ट्रीय तुलना और विश्वसनीयता में सुधार
SNA 2008 के अनुरूप डेटा होने से भारत के आँकड़े वैश्विक मानकों के साथ बेहतर मेल खाएँगे।
नई श्रृंखला – एक नज़र में
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नया आधार वर्ष: 2022–23
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जारी करने की तिथि: 27 फ़रवरी 2026
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पूर्व आधार वर्ष: 2011–12
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मुख्य मंत्रालय: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI)
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सलाहकार समिति के अध्यक्ष: प्रो. बी.एन. गोल्डर

