जस्टिस विक्रम नाथ को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के नए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में नियुक्त किया गया है
जस्टिस विक्रम नाथ को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के नए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में नियुक्त किया गया है

जस्टिस विक्रम नाथ को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के नए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में नियुक्त किया गया है

भारत की न्यायिक और विधिक सहायता प्रणाली से जुड़ी एक महत्वपूर्ण नियुक्ति में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ को नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) के नए कार्यकारी अध्यक्ष (Executive Chairman) के रूप में नामित किया है।
विधि एवं न्याय मंत्रालय ने 19 नवंबर 2025 को जारी अधिसूचना के माध्यम से इस नामांकन की पुष्टि करते हुए बताया कि यह नियुक्ति लीगल सर्विसेज अथॉरिटीज़ एक्ट, 1987 के तहत की गई है।

यह नियुक्ति परंपरा का भी पालन करती है—क्योंकि NALSA के कार्यकारी अध्यक्ष का पद हमेशा भारत के मुख्य न्यायाधीश के बाद सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश को सौंपा जाता है।


NALSA क्या है और इसकी भूमिका क्यों है महत्वपूर्ण?

नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) भारत की वह प्रमुख संस्था है जो देशभर में कमजोर, वंचित और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को नि:शुल्क कानूनी सहायता प्रदान करने का कार्य करती है।
साथ ही यह देश में:

  • लोक अदालतों का संचालन,

  • कानूनी जागरूकता अभियान,

  • पीड़ितों का पुनर्वास,

  • और न्याय तक पहुंच बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम चलाती है।

ऐसे में इसका प्रमुख (कार्यकारी अध्यक्ष) न्यायपालिका में अत्यंत ज़िम्मेदारी वाला पद माना जाता है।


न्यायमूर्ति विक्रम नाथ: अनुभव और पृष्ठभूमि

नए कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त जस्टिस विक्रम नाथ का न्यायिक करियर व्यापक अनुभव और सुदृढ़ न्यायिक समझ से भरा है। उनकी प्रमुख उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं:

  • 2021 से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश

  • गुजरात हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश

  • इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश

न्यायपालिका में उनकी कार्यशैली—स्पष्ट निर्णय, त्वरित न्याय और सामाजिक उत्तरदायित्व—के लिए जानी जाती है।
NALSA में अपनी नई भूमिका में वे देशभर में चल रही कानूनी सहायता पहलों को दिशा देंगे। खासकर:

  • गरीब और कमजोर वर्गों तक कानूनी सहायता की पहुंच बढ़ाना

  • कानूनी जागरूकता कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाना

  • नाबालिग, महिलाएँ, दिव्यांगजन, SC/ST और विशेष रूप से संवेदनशील समूहों के लिए सहायता कार्यक्रमों को मजबूत करना

  • लोक अदालतों और मध्यस्थता प्रणालियों को अधिक सुदृढ़ बनाना

उनकी नियुक्ति से उम्मीद है कि NALSA की पहुंच और प्रभाव दोनों में गुणात्मक सुधार होगा।


न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी बने SCLSC के नए अध्यक्ष

इसी क्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी एक अन्य महत्वपूर्ण समिति—सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी (SCLSC)—के नए अध्यक्ष के रूप में न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार महेश्वरी को नामित किया है।
NALSA की ओर से 20 नवंबर 2025 को इस नियुक्ति की राजपत्र अधिसूचना जारी की गई।

SCLSC की भूमिका

SCLSC उन लोगों को नि:शुल्क कानूनी सहायता प्रदान करती है जो सुप्रीम कोर्ट में न्याय प्राप्त करना चाहते हैं लेकिन आर्थिक या सामाजिक कारणों से वकील करने में असमर्थ हैं। यह समिति:

  • सुप्रीम कोर्ट में दायर होने वाली सहायता-प्रार्थना याचिकाओं की जांच

  • योग्य आवेदकों को मुफ्त कानूनी प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराना

  • वंचितों और कमजोरों के लिए न्याय की अंतिम पायदान तक पहुंच सुनिश्चित करना

जैसे महत्वपूर्ण कार्य करती है।


न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार महेश्वरी: अनुभव और योगदान

SCLSC के नए अध्यक्ष जस्टिस महेश्वरी की न्यायिक यात्रा भी बेहद उल्लेखनीय रही है:

  • 2021 से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश

  • आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश

  • मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश

उनका अनुभव विशेष रूप से सेवा कानून, मानवाधिकार, प्रशासनिक मामलों और सामाजिक न्याय से जुड़े मामलों में व्यापक रहा है।
अध्यक्ष के रूप में वे SCLSC के:

  • नीतिगत संचालन

  • कानूनी सहायता कार्यक्रमों के क्रियान्वयन

  • और न्यायाधिकारियों तक कानूनी प्रतिनिधित्व की पहुंच को मजबूत करने

में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।


दोनों नियुक्तियों का व्यापक महत्व

NALSA और SCLSC देश की न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया के दो प्रमुख स्तंभ हैं। इन दोनों संस्थाओं के प्रमुखों की भूमिका भारत के न्याय तंत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि ये सीधे उन लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं जिन्हें सबसे अधिक सहायता की आवश्यकता होती है।

इन नियुक्तियों के माध्यम से:

1. कानूनी सहायता तंत्र को और मजबूती मिलेगी

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ गरीब और वंचित वर्गों तक कानूनी सहायता को अधिक प्रभावी रूप में पहुँचाने की दिशा में परिवर्तनकारी कदम उठा सकते हैं।

2. सुप्रीम कोर्ट स्तर पर सहायता तंत्र मजबूत होगा

न्यायमूर्ति महेश्वरी की नियुक्ति SCLSC की कार्यप्रणाली को और तेज़ तथा पारदर्शी बना सकती है।

3. लोक अदालतों और ADR (वैकल्पिक विवाद निपटान) को बढ़ावा

NALSA के अंतर्गत आने वाले लोक अदालत और मध्यस्थता मॉडल को और सुदृढ़ किया जा सकता है।

4. संवेदनशील समूहों तक बेहतर सहायता

महिलाएँ, बच्चे, अल्पसंख्यक, दिव्यांगजन और गरीब तबकों को न्याय तक पहुंच आसान होगी।


परीक्षा-उन्मुख स्थिर तथ्य (Static Facts)

  • NALSA के नए कार्यकारी अध्यक्ष: जस्टिस विक्रम नाथ

  • नियुक्ति: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा

  • अधिसूचना जारी करने वाला मंत्रालय: विधि एवं न्याय मंत्रालय (19 नवंबर 2025)

  • SCLSC के नए अध्यक्ष: जस्टिस जितेंद्र कुमार महेश्वरी

  • SCLSC की नियुक्ति: CJI सूर्य कांत द्वारा

  • NALSA की स्थापना: Legal Services Authorities Act, 1987

  • उद्देश्य: गरीब और वंचित वर्गों को नि:शुल्क कानूनी सहायता

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