मोदी सरकार ने रेयर अर्थ सेक्टर में बड़ा कदम उठाते हुए ₹7,280 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट शुरू
मोदी सरकार ने रेयर अर्थ सेक्टर में बड़ा कदम उठाते हुए ₹7,280 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट शुरू

मोदी सरकार ने रेयर अर्थ सेक्टर में बड़ा कदम उठाते हुए ₹7,280 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट शुरू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 26 नवंबर 2025 को भारत के लिए एक ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्व वाले निर्णय को मंजूरी दी। सरकार ने ₹7,280 करोड़ रुपये की ‘सिन्‍टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) निर्माण प्रोत्साहन योजना’ को हरी झंडी दे दी है। यह योजना भारत को हाई-टेक विनिर्माण में आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक रेयर अर्थ सप्लाई चेन में भारत की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण कदम है।

यह भारत में अपनी तरह की पहली ऐसी योजना है जो पूरी मूल्य श्रृंखला (Value Chain) — रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर तैयार परमानेंट मैग्नेट तक — को देश में विकसित करेगी। अभी तक भारत इस क्षेत्र में लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर है। खासकर चीन से भारी मात्रा में REPMs आयात किए जाते हैं। इस योजना के शुरू होने से भारत न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि भविष्य में इन महत्वपूर्ण मैग्नेट्स का निर्यातक भी बन सकता है।


6,000 MTPA क्षमता वाला पहला इंटीग्रेटेड REPM इकोसिस्टम

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत में 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) की सिन्‍टर्ड Rare Earth Permanent Magnets की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता स्थापित करना है। यह लक्ष्य हासिल करने के लिए देश में पहली बार एक पूरी तरह एकीकृत उत्पादन इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा, जिसमें शामिल हैं—

  • Rare Earth Oxides से Rare Earth Metals का रूपांतरण

  • Metals से हाई-परफॉर्मेंस Alloy बनाना

  • Alloy से सिन्‍टर्ड REPMs तैयार करना

यानी REPM निर्माण की पूरी प्रक्रिया अब भारत में होगी, जिससे सप्लाई चेन, रोजगार, और तकनीकी क्षमता में भारी वृद्धि होगी।


₹7,280 करोड़ की वित्तीय संरचना — उद्योग को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

इस योजना का कुल बजट ₹7,280 करोड़ है, जिसमें शामिल हैं:

1️⃣ ₹6,450 करोड़ — बिक्री आधारित प्रोत्साहन (Sales-linked Incentives)

इन प्रोत्साहनों को अगले 5 वर्षों तक दिया जाएगा ताकि कंपनियाँ उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित हों।

2️⃣ ₹750 करोड़ — पूंजी सब्सिडी (Capital Subsidy)

यह सब्सिडी 6,000 MTPA की उत्पादन क्षमता स्थापित करने के लिए प्लांट और मशीनरी पर खर्च की जाएगी।

यह प्रोत्साहन संरचना भारत में पहली बार तैयार की गई है और हाई-टेक मैग्नेट के निर्माण को नई गति देने के लिए पूरी तरह उद्योग-केंद्रित है।


लाभार्थी कैसे चुनेंगे?

सरकार इस योजना के लिए 5 कंपनियों का चयन करेगी।
प्रत्येक कंपनी को 1,200 MTPA की अधिकतम उत्पादन क्षमता का लक्ष्य दिया जाएगा।

कंपनियों का चयन वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया (Global Competitive Bidding) के माध्यम से होगा, जिससे केवल योग्य, तकनीकी रूप से सक्षम और अनुभवी कंपनियाँ इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में प्रवेश पाएंगी।


योजना अवधि: कुल 7 वर्ष

  • पहले 2 वर्ष — मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं और इकोसिस्टम की स्थापना

  • अगले 5 वर्ष — उत्पादन बढ़ाने के लिए बिक्री-आधारित प्रोत्साहन प्रदान किए जाएंगे

यह समयसीमा भारत की उत्पादन क्षमताओं को स्थायी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से तय की गई है।


Rare Earth Permanent Magnets क्या होते हैं और क्यों महत्वपूर्ण हैं?

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPMs) दुनिया के सबसे शक्तिशाली मैग्नेट्स में से एक हैं। ये हाई-टेक उद्योगों की रीढ़ माने जाते हैं। इनका उपयोग इन क्षेत्रों में अत्यधिक आवश्यक है—

1. इलेक्ट्रिक वाहन (EVs)

EV मोटर्स पूरी तरह REPMs पर आधारित होती हैं, जिससे ऊर्जा कुशलता बढ़ती है।

2. नवीकरणीय ऊर्जा

  • पवन टरबाइन

  • सौर ट्रैकिंग सिस्टम

इनमें REPMs ऊर्जा उत्पादन की दक्षता बढ़ाते हैं।

3. रक्षा और एयरोस्पेस

  • रडार सिस्टम

  • लड़ाकू विमान

  • मिसाइल मार्गदर्शन प्रणालियाँ

4. उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स

  • स्पीकर

  • हेडफोन

  • हार्ड डिस्क ड्राइव

  • कंप्यूटर उपकरण

भारत अभी तक इन महत्वपूर्ण मैग्नेट्स के लिए चीन पर अत्यधिक निर्भर है। इस योजना के बाद भारत आत्मनिर्भर बनेगा और रणनीतिक क्षेत्रों में सप्लाई चेन सुरक्षा मजबूत होगी।


हाई-टेक विनिर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता की बड़ी छलांग

भारत के इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, अंतरिक्ष, ड्रोन तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहे हैं। इन सभी क्षेत्रों में REPMs मूलभूत भूमिका निभाते हैं।

इस योजना से—

  • भारत की हाई-टेक उद्योगों में निर्भरता कम होगी

  • स्थानीय विनिर्माण क्षमता बढ़ेगी

  • MSME सेक्टर को नई संभावनाएँ मिलेंगी

  • सप्लाई चेन सुरक्षित और मजबूत होगी

  • भारत की वैश्विक तकनीकी स्थिति सुदृढ़ होगी

यह परियोजना नेट ज़ीरो 2070 लक्ष्यों को भी समर्थन देती है, क्योंकि EVs और नवीकरणीय ऊर्जा सेक्टर REPMs पर आधारित होते हैं।


रणनीतिक और आर्थिक क्षेत्र को मिलेगा सीधा लाभ

  • इलेक्ट्रिक मोबिलिटी: EV मोटर्स की लागत घटेगी

  • रक्षा प्रणाली: आयात निर्भरता कम होगी, स्वदेशी रक्षा उत्पादन मजबूत होगा

  • पवन ऊर्जा: टरबाइन की दक्षता बढ़ेगी

  • इलेक्ट्रॉनिक्स: उत्पादन लागत घटेगी, निर्यात बढ़ेगा

यह योजना भारत के रेयर अर्थ उद्योग को नया आकार देगी और देश को एक वैश्विक मैग्नेट निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।


स्थिर तथ्य — एक नज़र में

विवरण तथ्य
योजना का नाम सिन्‍टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण प्रोत्साहन योजना
मंजूरी तिथि 26 नवंबर 2025
कुल बजट ₹7,280 करोड़
प्रोत्साहन संरचना ₹6,450 करोड़ (बिक्री आधारित) + ₹750 करोड़ (पूंजी सब्सिडी)
उत्पादन लक्ष्य 6,000 MTPA सिन्‍टर्ड REPMs
लाभार्थी कंपनियाँ 5
योजना अवधि 7 वर्ष (2 वर्ष स्थापना + 5 वर्ष प्रोत्साहन)

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