नागालैंड का सबसे भव्य और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सांस्कृतिक उत्सव—हॉर्नबिल महोत्सव—अपने 26वें संस्करण के साथ 1 दिसंबर 2025 को किसामा के नगा हेरिटेज विलेज में शुरू हुआ। यह उत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नगा जनजातियों की परंपराओं, इतिहास और जीवनशैली का एक जीवंत उत्सव है, जो दस दिनों तक पूरे नागालैंड को उत्सवमय रंगों में डूबो देता है।
1 दिसंबर, नागालैंड के स्थापना दिवस के साथ पड़ने की वजह से इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। किसामा स्थित हेरिटेज विलेज में हजारों पर्यटकों, स्थानीय कलाकारों, हस्तशिल्पकारों और जनजातीय प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने उद्घाटन समारोह को भव्य और ऐतिहासिक बना दिया।
भव्य उद्घाटन: यूनिटी प्लाज़ा में पारंपरिक और आधुनिकता का संगम
1 दिसंबर की शाम 4 बजे किसामा स्थित यूनिटी प्लाज़ा में उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता नागालैंड के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने की। उद्घाटन सत्र में पारंपरिक नृत्यों, लोक-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया।
प्रत्येक नगा जनजाति ने अपने पारंपरिक वस्त्रों, युद्ध-नृत्यों और लोकगाथाओं के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विशिष्टता प्रदर्शित की। इन प्रस्तुतियों ने न केवल नागा विरासत की विविधता को दिखाया, बल्कि समुदायों के बीच एकता और सांस्कृतिक गर्व को भी बल दिया।
अंतरराष्ट्रीय भागीदारी: हॉर्नबिल का वैश्विक रंग
इस वर्ष हॉर्नबिल महोत्सव में कई देशों ने ‘कंट्री पार्टनर’ के रूप में भाग लिया, जिनमें शामिल हैं—
-
यूनाइटेड किंगडम
-
आयरलैंड
-
फ्रांस
-
ऑस्ट्रिया
-
माल्टा
-
स्विट्ज़रलैंड
इन देशों की भागीदारी ने महोत्सव को एक ग्लोबल इंटरकल्चरल प्लेटफॉर्म बना दिया है।
अंतरराष्ट्रीय स्टॉलों, सांस्कृतिक प्रदर्शनियों और विश्व समुदाय से जुड़े प्रतिनिधियों ने इस महोत्सव के वैश्विक प्रभाव को और मजबूत किया।
अरुणाचल प्रदेश बना इस वर्ष का ‘स्टेट पार्टनर’
2025 में अरुणाचल प्रदेश को ‘स्टेट पार्टनर’ के रूप में चुना गया। इसके चलते राज्य के पारंपरिक नृत्य, हथकरघा उत्पाद, जनजातीय भोजन और संस्कृति को विशेष स्थान मिला।
स्टेट पार्टनरशिप ने न केवल दोनों पूर्वोत्तर राज्यों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाया, बल्कि हॉर्नबिल को एक अखिल-भारतीय सांस्कृतिक उत्सव का स्वरूप भी प्रदान किया।
प्रदर्शनियाँ, स्टॉल और कार्निवल: नगा जीवन का जीवंत अनुभव
उद्घाटन समारोह से पहले ही किसामा में विभागीय स्टॉल, थीमैटिक प्रदर्शनियाँ और कार्निवल गतिविधियाँ शुरू हो गई थीं। इन स्टॉलों ने आगंतुकों को नगा संस्कृति की गहराई से अवगत कराया। मुख्य आकर्षण रहे—
✔ नगा हस्तशिल्प
बांस की नक्काशी, लकड़ी का काम, पारंपरिक आभूषण और हथकरघा वस्त्रों का शानदार प्रदर्शन हुआ।
✔ अद्वितीय व्यंजन
नागालैंड के परंपरागत व्यंजन—स्मोक्ड मीट, बैम्बू शूट आधारित डिशेज, किण्वित खाद्य पदार्थ और ऑर्गेनिक नागा चिली—पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय रहे।
✔ जनजातीय कला और जीवनशैली
नगा घरों, कृषि उपकरणों और युद्ध-संस्कृति के प्रतीकों को प्रदर्शित करने वाले मॉडल गाँवों ने दर्शकों को पारंपरिक नागा जीवन का वास्तविक अनुभव प्रदान किया।
✔ कार्निवल गतिविधियाँ
रंग-बिरंगी परेड, बाइक रैली, फोटोग्राफी प्रतियोगिताएँ, स्पोर्ट्स इवेंट और हंटिंग गेम पर आधारित प्रदर्शनियाँ उत्सव को और रोमांचक बनाती रहीं।
महोत्सव की रौनक पूरे नागालैंड में फैली
हालाँकि किसामा इस महोत्सव का मुख्य स्थल है, लेकिन उत्सव की गतिविधियाँ केवल यहीं तक सीमित नहीं रहीं। कोहिमा, दीमापुर, मोन, वखा, तुएनसांग और पेरेन जैसे जिलों में भी विभिन्न जनजातीय कार्यक्रम, संगीत शो, फैशन परेड, कला प्रदर्शन और स्थानीय खेल प्रतियोगिताएँ आयोजित की जा रही हैं।
इससे पूरा नागालैंड एक बड़े सांस्कृतिक मंच में बदल जाता है, जहाँ हर समुदाय, गाँव और कलाकार अपनी पहचान दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के लिए उत्साहित रहता है।
पर्यटन और आर्थिक अवसरों का द्वार
हॉर्नबिल महोत्सव नागालैंड के पर्यटन क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा वार्षिक अवसर है। दस दिनों के दौरान:
-
लाखों पर्यटक
-
फोटोग्राफर
-
शोधकर्ता
-
ट्रैवल ब्लॉगर्स
-
मीडिया संगठन
नागालैंड का रुख करते हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान होता है—होटल, होमस्टे, टैक्सी सेवाएँ, हस्तशिल्प बिक्री और भोजनालयों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है।
नागालैंड टूरिज़्म के अनुसार, हॉर्नबिल महोत्सव ने पिछले दो दशकों में पूर्वोत्तर भारत के सांस्कृतिक पर्यटन को नई पहचान दी है।
हॉर्नबिल महोत्सव का विकास: पर्यटन से वैश्विक संस्कृति तक
वर्ष 2000 में नागालैंड सरकार ने इस महोत्सव की शुरुआत मुख्यतः पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की थी। लेकिन 26 वर्षों में हॉर्नबिल विकसित होकर बन चुका है—
-
एक वैश्विक सांस्कृतिक आदान-प्रदान मंच
-
जनजातीय कला और परंपराओं का संरक्षक
-
आर्थिक सशक्तिकरण का साधन
-
पूर्वोत्तर को मुख्यधारा से जोड़ने का सेतु
आज हॉर्नबिल न केवल नागालैंड बल्कि भारत की भी सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख ब्रांड बन चुका है।

