रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 2025 की भारत राज्य यात्रा ने चार वर्षों के अंतराल के बाद भारत–रूस संबंधों में शीर्ष-स्तरीय प्रत्यक्ष संवाद को फिर से सक्रिय कर दिया है। रूस–यूक्रेन युद्ध, पश्चिमी प्रतिबंध, वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल और बदलते भू-राजनीतिक संतुलन के बीच यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच 23वां भारत–रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन यह स्पष्ट संकेत देता है कि अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद दोनों देश अपने पारंपरिक और भरोसेमंद संबंधों को नई परिस्थितियों के अनुरूप मजबूत करना चाहते हैं।
राष्ट्रपति भवन में भव्य राजकीय स्वागत
नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में व्लादिमीर पुतिन को पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ स्वागत मिला। यह स्वागत दोनों देशों के ऐतिहासिक और विशेष रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है।
✅ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोरकोर्ट में उनका स्वागत किया
✅ भारतीय और रूसी राष्ट्रगान के बाद त्रि-सेवा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया
✅ CDS जनरल अनिल चौहान, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना उपस्थित रहे
✅ रूसी प्रतिनिधिमंडल में रक्षा मंत्री आंद्रे बेलोउसॉव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी का एयरपोर्ट जाकर स्वयं पुतिन का स्वागत करना दोनों नेताओं के व्यक्तिगत विश्वास और निरंतर संवाद को दर्शाता है।
मोदी–पुतिन शिखर वार्ता: 23वां भारत–रूस वार्षिक सम्मेलन
यात्रा का केंद्रबिंदु हैदराबाद हाउस में आयोजित शिखर वार्ता रही, जिसमें रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और कूटनीतिक समन्वय जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
मुख्य एजेंडे
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लंबित रक्षा आपूर्ति और अनुबंधों की समीक्षा
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ऊर्जा सहयोग और दीर्घकालिक कच्चे तेल आपूर्ति समझौते
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भारत से रूस के लिए कुशल श्रमिकों की गतिशीलता
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व्यापार और भुगतान प्रणालियों में वैकल्पिक समाधान
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लॉजिस्टिक्स, शिपिंग, स्वास्थ्य और उर्वरक क्षेत्रों में सहयोग
यह वार्ता ऐसे समय में हुई जब दोनों देश वैश्विक व्यवस्था में अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
रक्षा सहयोग: भारत–रूस रिश्तों की रीढ़
भारत की रक्षा क्षमताओं में आज भी बड़ी संख्या में रूसी मूल के प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इसी कारण रक्षा सहयोग इस यात्रा का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय रहा।
मुख्य रक्षा मुद्दे
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S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की शेष दो यूनिटों की आपूर्ति
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Su-30MKI लड़ाकू विमानों के अपग्रेड (रडार, एवियोनिक्स, हथियार)
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Su-57 फिफ्थ-जनरेशन फाइटर जेट पर संभावित तकनीकी चर्चा
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स्पेयर पार्ट्स, मरम्मत और संयुक्त उत्पादन लाइनों की समयबद्धता
इन चर्चाओं से संकेत मिलता है कि भारत, आत्मनिर्भर रक्षा नीति के साथ-साथ, आपूर्ति सुरक्षा और विविधीकरण के संतुलन पर काम कर रहा है।
ऊर्जा व्यापार: सामरिक और आर्थिक स्तंभ
2022 के बाद से भारत रूस के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा ग्राहकों में से एक बन गया है। यह सहयोग इस शिखर सम्मेलन का आर्थिक आधार स्तंभ रहा।
ऊर्जा सहयोग के प्रमुख बिंदु
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सस्ते रूसी तेल से भारत को घरेलू ईंधन कीमतें नियंत्रित रखने में मदद
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यूरोपीय बाजार सिमटने के बाद रूस के लिए भारत एक स्थिर और दीर्घकालिक भागीदार
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नए शिपिंग कॉरिडोर और बंदरगाह कनेक्टिविटी पर विचार
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भुगतान तंत्र में राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग की संभावनाएं
ऊर्जा सहयोग को दोनों देश राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक आवश्यकता के रूप में देखते हैं।
अमेरिकी शुल्क और वैश्विक दबाव: रणनीतिक संतुलन की परीक्षा
यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब अमेरिका ने रूसी तेल से जुड़े व्यापार पर अतिरिक्त शुल्क और दबाव की नीति अपनाई है।
मुख्य विवाद बिंदु
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अमेरिकी तर्क: रूसी तेल से रूस को युद्ध वित्तपोषण में मदद
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भारत का पक्ष: ऊर्जा नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हित और वहनीयता पर आधारित
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भारत–रूस संबंध किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं
शिखर वार्ता में यह मुद्दा अप्रत्यक्ष रूप से इस सवाल से जुड़ा रहा कि भारत वैश्विक दबावों के बीच रणनीतिक स्वतंत्रता कैसे बनाए रखेगा।
भू-राजनीतिक महत्व: सिर्फ द्विपक्षीय नहीं
भारत–रूस संबंध आज केवल रक्षा या ऊर्जा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि—
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बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था
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ग्लोबल साउथ की आवाज
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पश्चिमी प्रभुत्व के विकल्प
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क्षेत्रीय स्थिरता
जैसे व्यापक विषयों से भी जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि मोदी–पुतिन शिखर सम्मेलन को प्रतीकात्मक से कहीं अधिक रणनीतिक माना जा रहा है।

