यूनेस्को की बड़ी पहल: लुप्तप्राय पारंपरिक कलाओं और शिल्पों को ‘तत्काल सुरक्षा सूची’ में शामिल किया गया
यूनेस्को की बड़ी पहल: लुप्तप्राय पारंपरिक कलाओं और शिल्पों को ‘तत्काल सुरक्षा सूची’ में शामिल किया गया

यूनेस्को की बड़ी पहल: लुप्तप्राय पारंपरिक कलाओं और शिल्पों को ‘तत्काल सुरक्षा सूची’ में शामिल किया गया

वैश्विक सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण की दिशा में यूनेस्को (UNESCO) ने एक महत्वपूर्ण और समयोचित कदम उठाया है। हाल ही में, कई लुप्तप्राय पारंपरिक कलाओं और शिल्पों को यूनेस्को की “तत्काल संरक्षण की आवश्यकता वाली अमूर्त सांस्कृतिक विरासत” (Intangible Cultural Heritage in Need of Urgent Safeguarding) की सूची में शामिल किया गया है।

यह निर्णय उन सांस्कृतिक परंपराओं की नाजुक स्थिति को उजागर करता है, जो आज आधुनिकीकरण, शहरीकरण, पलायन, समुदायों की घटती भागीदारी और आर्थिक सहयोग की कमी जैसे कारणों से गंभीर संकट का सामना कर रही हैं। यदि समय रहते ठोस प्रयास नहीं किए गए, तो ये परंपराएँ स्थायी रूप से लुप्त हो सकती हैं।


यूनेस्को की ‘अर्जेंट सेफगार्डिंग लिस्ट’ क्या है?

यूनेस्को की Urgent Safeguarding List अमूर्त सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी एक विशेष सूची है। इसका उद्देश्य उन सांस्कृतिक प्रथाओं, परंपराओं और ज्ञान प्रणालियों की पहचान करना है, जिनका अस्तित्व तत्काल खतरे में है।

इस सूची की प्रमुख विशेषताएँ

  • इसमें संगीत, नृत्य, शिल्प, लोककला, रीति-रिवाज़ और मौखिक परंपराएँ शामिल की जाती हैं

  • ये वे परंपराएँ होती हैं, जिनका अंतर-पीढ़ी हस्तांतरण कमजोर हो चुका है

  • सूची में शामिल होने के बाद संबंधित परंपराएँ—

    • अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता

    • तकनीकी सहयोग

    • क्षमता निर्माण (Capacity Building)

    • विशेषज्ञ मार्गदर्शन

के लिए पात्र हो जाती हैं

यूनेस्को का फोकस केवल परंपरा को “सूचीबद्ध” करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे जीवित रखने वाले समुदायों को सशक्त बनाना भी इसका मुख्य उद्देश्य है।


नए शिलालेख (Inscriptions) और उनका सांस्कृतिक महत्व

इस बार सूची में शामिल किए गए कई तत्व एशिया और अफ्रीका की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख उदाहरण हैं—

1. बोरिंडो – पाकिस्तान

बोरिंडो पाकिस्तान का एक प्राचीन पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्र है।

  • यह क्षेत्र की मौखिक और संगीत विरासत से गहराई से जुड़ा है

  • लोक कथाओं, सामाजिक आयोजनों और सांस्कृतिक स्मृति को संरक्षित करने में इसकी अहम भूमिका रही है

  • आधुनिक संगीत और बदलती जीवनशैली के कारण इसका प्रयोग तेजी से घटा है

2. मवाज़िंदिका नृत्य – केन्या

मवाज़िंदिका केन्या की एक आध्यात्मिक और अनुष्ठानिक नृत्य परंपरा है।

  • यह सामुदायिक अनुष्ठानों और सामाजिक एकता का अभिन्न हिस्सा है

  • धार्मिक आस्था, सामूहिक पहचान और पारंपरिक मूल्यों से जुड़ा है

  • युवा पीढ़ी की घटती भागीदारी के कारण इसके अस्तित्व पर संकट है

3. डोंग हो लोक वुडब्लॉक प्रिंटिंग – वियतनाम

डोंग हो वुडब्लॉक प्रिंटिंग वियतनाम की प्रसिद्ध लोक कला है।

  • यह अपनी विशिष्ट कलात्मक शैली और कहानी कहने की परंपरा के लिए जानी जाती है

  • ग्रामीण जीवन, लोक विश्वासों और सामाजिक मूल्यों को चित्रों के माध्यम से दर्शाती है

  • मशीन-निर्मित प्रिंट्स और बदलते बाज़ार के कारण यह शिल्प लुप्तप्राय हो गया है

इन शिलालेखों के माध्यम से यूनेस्को ने न केवल इनके कलात्मक मूल्य, बल्कि इनके सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को भी मान्यता दी है।


भारत में ऐतिहासिक यूनेस्को सत्र

इन नए शिलालेखों की घोषणा दिल्ली के लाल किले में आयोजित यूनेस्को सत्र के दौरान की गई। यह कई मायनों में ऐतिहासिक रहा—

  • यह पहली बार था जब भारत ने इस तरह के यूनेस्को सत्र की मेज़बानी की

  • लाल किला जैसे ऐतिहासिक स्थल का चयन विरासत संरक्षण के प्रतीकात्मक महत्व को दर्शाता है

  • इस आयोजन ने वैश्विक सांस्कृतिक शासन में भारत की बढ़ती भूमिका को उजागर किया

इस सत्र की मेज़बानी यह भी दर्शाती है कि भारत न केवल अपनी मूर्त विरासत, बल्कि अमूर्त सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण को भी समान महत्व देता है।


वैश्विक भागीदारी और समीक्षा प्रक्रिया

यूनेस्को की यह प्रक्रिया वैश्विक सहयोग पर आधारित है। वर्तमान में—

  • लगभग 80 देशों द्वारा

  • 67 से अधिक नॉमिनेशन

  • यूनेस्को को समीक्षा के लिए प्रस्तुत किए गए हैं

इन नॉमिनेशन में शामिल हैं—

  • संगीत और नृत्य रूप

  • पारंपरिक शिल्प

  • रीति-रिवाज़

  • पारंपरिक ज्ञान प्रणालियाँ

समीक्षा के प्रमुख मानदंड

  • परंपरा के लुप्त होने का स्तर

  • संरक्षण की तात्कालिकता

  • स्थानीय समुदायों की भागीदारी

  • भविष्य में टिकाऊ संरक्षण की संभावना

यूनेस्को स्पष्ट रूप से मानता है कि सामुदायिक सहभागिता के बिना किसी भी अमूर्त विरासत का दीर्घकालिक संरक्षण संभव नहीं है


यह पहल क्यों महत्वपूर्ण है?

यह पहल केवल सांस्कृतिक संरक्षण तक सीमित नहीं है। इसके व्यापक प्रभाव हैं—

  • सांस्कृतिक विविधता की रक्षा

  • स्थानीय समुदायों की आजीविका को समर्थन

  • सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से तालमेल

  • पारंपरिक ज्ञान के माध्यम से पर्यावरणीय संतुलन

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