दुलहस्ती स्टेज-II जलविद्युत परियोजना: सरकार के ग्रीन पैनल से मिली मंजूरी
दुलहस्ती स्टेज-II जलविद्युत परियोजना: सरकार के ग्रीन पैनल से मिली मंजूरी

दुलहस्ती स्टेज-II जलविद्युत परियोजना: सरकार के ग्रीन पैनल से मिली मंजूरी

भारत की नवीकरणीय ऊर्जा रणनीति को मजबूती देते हुए केंद्र सरकार के पर्यावरण अनुमोदन तंत्र ने जम्मू और कश्मीर के किश्तवार जिले में चिनाब नदी पर प्रस्तावित दुलहस्ती चरण-II जलविद्युत परियोजना को हरी झंडी दे दी है। यह स्वीकृति केवल एक परियोजना की मंजूरी नहीं है, बल्कि सिंधु बेसिन में जलविद्युत क्षमता के विस्तार और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद भारत रणनीतिक नदी बेसिनों में बुनियादी ढाँचे के विकास को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है। पर्यावरणीय स्वीकृति के साथ ही अब इस परियोजना के लिए निर्माण निविदाएँ जारी करने का रास्ता साफ हो गया है।


विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति से मिली मंजूरी

दुलहस्ती चरण-II परियोजना को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत जलविद्युत परियोजनाओं पर विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) ने अपनी 45वीं बैठक के दौरान मंजूरी प्रदान की। समिति ने परियोजना के—

  • पर्यावरणीय प्रभाव

  • नदी प्रवाह प्रबंधन

  • जैव विविधता संरक्षण

  • सामाजिक और क्षेत्रीय प्रभाव

जैसे पहलुओं का आकलन करने के बाद इसे स्वीकृति दी।

इस मंजूरी के साथ, लगभग ₹3,200 करोड़ से अधिक की अनुमानित लागत वाली परियोजना के लिए निर्माण कार्य शुरू करने की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।


सिंधु जल संधि के संदर्भ में परियोजना का महत्व

विशेषज्ञ समिति ने यह भी उल्लेख किया कि सिंधु जल संधि के अंतर्गत चिनाब नदी बेसिन भारत और पाकिस्तान के बीच साझा है। हालाँकि, यह भी दर्ज किया गया कि यह संधि 23 अप्रैल 2025 से निलंबित है।

संधि के अस्थायी निलंबन के कारण केंद्र सरकार अब—

  • घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने

  • जल संसाधनों के बेहतर उपयोग

  • रणनीतिक और सीमावर्ती क्षेत्रों में अवसंरचना सुदृढ़ करने

के उद्देश्य से सिंधु बेसिन में कई जलविद्युत परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है। दुलहस्ती चरण-II इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।


दुलहस्ती चरण-II की तकनीकी विशेषताएँ

दुलहस्ती चरण-II परियोजना को आधुनिक इंजीनियरिंग और कम पर्यावरणीय प्रभाव को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है। इसके प्रमुख तकनीकी विवरण इस प्रकार हैं—

  • स्थापित क्षमता: 260 मेगावाट

    • 130 मेगावाट की दो इकाइयाँ

  • चरण-I से छोड़े गए पानी को

    • 3,685 मीटर लंबी सुरंग के माध्यम से मोड़ा जाएगा

  • 8.5 मीटर व्यास की सुरंग

    • घोड़े की नाल (Horse-shoe) आकार की संरचना

  • सर्ज शाफ्ट और प्रेशर शाफ्ट के साथ

    • भूमिगत पावर हाउस

  • नदी के प्राकृतिक प्रवाह के अनुरूप

    • कुशल और कम-प्रभाव वाला संचालन

इन विशेषताओं के कारण परियोजना से स्वच्छ और स्थिर बिजली उत्पादन की उम्मीद की जा रही है।


परियोजना की पृष्ठभूमि

दुलहस्ती चरण-II, पहले से संचालित दुलहस्ती चरण-I जलविद्युत परियोजना का विस्तार है।

  • चरण-I की स्थापित क्षमता: 390 मेगावाट

  • परिचालन प्रारंभ: वर्ष 2007

नया चरण अतिरिक्त 260 मेगावाट की क्षमता जोड़ेगा। यह परियोजना रन-ऑफ-द-रिवर (Run of the River) मॉडल पर आधारित है, यानी—

  • कोई बड़ा जलाशय नहीं बनाया जाएगा

  • चरण-I से छोड़े गए पानी का पुनः उपयोग होगा

  • पर्यावरणीय प्रभाव न्यूनतम रहेगा

यह मॉडल पहाड़ी और संवेदनशील पारिस्थितिकी वाले क्षेत्रों के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है।


रणनीतिक और ऊर्जा सुरक्षा का दृष्टिकोण

दुलहस्ती चरण-II को मिली मंजूरी का महत्व केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। यह—

  • जम्मू और कश्मीर में भारत की जलविद्युत उपस्थिति को मज़बूत करती है

  • नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को समर्थन देती है

  • सीमावर्ती और रणनीतिक क्षेत्रों में

    • आधारभूत ढाँचे को सुदृढ़ करती है

  • राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और

    • ग्रिड स्थिरता में योगदान करती है

जलविद्युत परियोजनाएँ तेज़ रैम्प-अप क्षमता के कारण सौर और पवन ऊर्जा जैसे अन्य अक्षय स्रोतों को संतुलित करने में भी मदद करती हैं।


पर्यावरण संरक्षण और संतुलन

परियोजना को मंजूरी देते समय विशेषज्ञ समिति ने कई पर्यावरणीय शर्तें भी निर्धारित की हैं, जिनमें—

  • न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह (Environmental Flow)

  • मलबा और अपशिष्ट प्रबंधन

  • भूस्खलन रोकथाम उपाय

  • स्थानीय समुदायों की आजीविका और पुनर्वास

शामिल हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहे।


भारत की जलविद्युत नीति में दुलहस्ती चरण-II

भारत सरकार बड़े जलविद्युत प्रोजेक्ट्स को अब—

  • नवीकरणीय ऊर्जा

  • ग्रिड बैलेंसिंग

  • ग्रीन एनर्जी ट्रांज़िशन

के महत्वपूर्ण घटक के रूप में देख रही है। दुलहस्ती चरण-II इसी नीति दृष्टिकोण को दर्शाता है, जहाँ ऊर्जा आवश्यकता और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया गया है।


मुख्य बिंदु (Key Points)

  • 260 मेगावाट की दुलहस्ती चरण-II परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी

  • स्थान: किश्तवार जिला, जम्मू और कश्मीर

  • नदी: चिनाब नदी

  • स्वीकृति: पर्यावरण मंत्रालय के अंतर्गत विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति

  • मौजूदा 390 मेगावाट दुलहस्ती चरण-I का विस्तार

  • रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना

  • अनुमानित लागत: ₹3,200 करोड़+

  • पृष्ठभूमि: सिंधु जल संधि के निलंबन के बीच मंजूरी


परीक्षा-आधारित प्रश्न

प्रश्न: दुलहस्ती चरण-II जलविद्युत परियोजना किस नदी पर स्थित है?

A. झेलम
B. चिनाब (✔ सही उत्तर)
C. राबी
D. सिंधु

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