भारत ने पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ICGS ‘समुद्र प्रताप’ कमीशन किया
भारत ने पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ICGS ‘समुद्र प्रताप’ कमीशन किया

भारत ने पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ICGS ‘समुद्र प्रताप’ कमीशन किया

भारत ने समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। 5 जनवरी 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गोवा में भारतीय तटरक्षक पोत ICGS ‘समुद्र प्रताप’ को राष्ट्र को समर्पित किया। यह पोत न केवल भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिज़ाइन किया गया प्रदूषण नियंत्रण पोत (Pollution Control Vessel – PCV) है, बल्कि यह भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के बेड़े का अब तक का सबसे बड़ा जहाज भी है।

गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित यह पोत समुद्री क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक बड़ा और ठोस कदम माना जा रहा है।


क्यों है यह ख़बरों में?

ICGS समुद्र प्रताप इसलिए चर्चा में है क्योंकि—

  • यह भारत का पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत है

  • इसे औपचारिक रूप से भारतीय तटरक्षक बल में कमीशन किया गया है

  • इससे समुद्री पर्यावरण संरक्षण, तटीय निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी

यह उपलब्धि भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल करती है, जिनके पास समर्पित और अत्याधुनिक प्रदूषण नियंत्रण पोत हैं।


ICGS समुद्र प्रताप क्या है?

समुद्र प्रताप एक बहु-भूमिका (Multi-Role) प्रदूषण नियंत्रण पोत है, जिसे विशेष रूप से समुद्री प्रदूषण, तेल रिसाव और आपात स्थितियों से निपटने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

इसकी प्रमुख विशेषताएँ—

  • जहाज में 60% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग

  • तेल रिसाव, रासायनिक प्रदूषण और समुद्री आपदाओं से निपटने की क्षमता

  • अग्निशमन, तटीय गश्त और दीर्घकालिक निगरानी अभियानों के लिए उपयुक्त

  • उन्नत स्वचालन (Automation) और आधुनिक प्रदूषण प्रतिक्रिया प्रणालियाँ

यह पोत भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता को गुणात्मक रूप से बढ़ाने वाला मंच है।


समुद्र प्रताप की प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ

समुद्र प्रताप को अत्याधुनिक हथियारों और प्रणालियों से लैस किया गया है—

  • समुद्री सुरक्षा अभियानों हेतु 30 मिमी CRN-91 गन

  • 12.7 मिमी की दो स्थिरित रिमोट-नियंत्रित गन, एकीकृत फायर कंट्रोल सिस्टम के साथ

  • सटीक संचालन के लिए डायनामिक पोज़िशनिंग सिस्टम (DPS) और रिट्रैक्टेबल स्टर्न थ्रस्टर

  • प्रदूषण नियंत्रण के लिए फ्लश टाइप साइड स्वीपिंग आर्म्स

  • उच्च क्षमता वाली बाह्य अग्निशमन प्रणाली

  • प्रदूषण प्रतिक्रिया नाव (डेविट सहित) और सी बोट डेविट

  • शाफ्ट जनरेटर और कई स्वदेशी विकसित ऑनबोर्ड प्रणालियाँ

जहाज के अधिकांश पुर्ज़ों का देश में निर्माण भारत की मजबूत घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को दर्शाता है।


परिचालन भूमिका और ज़िम्मेदारियाँ

ICGS समुद्र प्रताप भारतीय तटरक्षक बल के लिए एक बहु-उपयोगी मंच के रूप में कार्य करेगा—

  • समुद्री प्रदूषण प्रतिक्रिया और नियंत्रण

  • समुद्री प्रदूषण नियमों का प्रवर्तन

  • खोज एवं बचाव (Search and Rescue – SAR) अभियान

  • समुद्री कानून प्रवर्तन

  • भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की सुरक्षा

इसका विशेष डिज़ाइन तेल रिसाव, रासायनिक रिसाव और अन्य समुद्री पर्यावरणीय आपात स्थितियों में त्वरित तैनाती सुनिश्चित करता है।


रणनीतिक और पर्यावरणीय महत्व

समुद्र प्रताप का कमीशनिंग भारत की समुद्री रणनीति और पर्यावरणीय जिम्मेदारी—दोनों के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • यह तेल रिसाव और समुद्री दुर्घटनाओं पर तेज़ और प्रभावी प्रतिक्रिया की भारत की क्षमता को मजबूत करता है

  • कोरल रीफ, मत्स्य संसाधन और तटीय समुदायों की आजीविका की रक्षा में सहायक

  • समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन सुनिश्चित करता है

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर कहा कि समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा केवल रणनीतिक आवश्यकता नहीं, बल्कि एक नैतिक दायित्व भी है। यह पोत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने वाले एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति के रूप में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करता है।


समावेशी और भविष्य-तैयार तटरक्षक बल

ICGS समुद्र प्रताप एक और ऐतिहासिक पहल का साक्षी बना—

  • पहली बार भारतीय तटरक्षक बल के किसी अग्रिम पंक्ति के पोत पर दो महिला अधिकारियों की नियुक्ति की गई

  • यह ICG के लैंगिक-तटस्थ और समावेशी स्वरूप की दिशा में बड़ा कदम है

सरकार ने तटरक्षक बल को—

  • प्लेटफॉर्म-केंद्रित संगठन से

  • खुफिया-संचालित और एकीकृत समुद्री सुरक्षा बल

में बदलने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।


आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया का सशक्त उदाहरण

समुद्र प्रताप का स्वदेशी डिज़ाइन और निर्माण—

  • रक्षा आयात पर निर्भरता कम करता है

  • घरेलू जहाज निर्माण उद्योग को बढ़ावा देता है

  • तकनीकी कौशल, नवाचार और रोज़गार सृजन को प्रोत्साहित करता है

यह परियोजना दिखाती है कि भारत अब केवल युद्धपोत ही नहीं, बल्कि विशेषीकृत और तकनीकी रूप से जटिल जहाज भी स्वदेश में बनाने में सक्षम है।

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