भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मिजोरम से जैव विविधता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि सामने आई है। मिजोरम के वैज्ञानिकों की एक टीम ने रूस, जर्मनी और वियतनाम के शोधकर्ताओं के सहयोग से रीड स्नेक (Reed Snake) की एक नई प्रजाति की पहचान की है। इस खोज से न केवल वर्षों पुरानी वर्गीकरण संबंधी गलतियों को सुधारा गया है, बल्कि भारत के सरीसृप जीव-जंतुओं (Reptiles) में एक पहले से अज्ञात प्रजाति को भी औपचारिक रूप से शामिल किया गया है।
इस नई प्रजाति का वैज्ञानिक नाम Calamaria mizoramensis रखा गया है, जो राज्य के नाम पर आधारित है। यह शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Zootaxa में प्रकाशित हुआ है।
क्यों खबरों में है?
इस खोज का नेतृत्व एच. टी. लालरेमसांगा, प्राणी विज्ञान विभाग के प्रोफेसर, मिजोरम विश्वविद्यालय ने किया। उनके अनुसार, गहराई से की गई शारीरिक संरचना (Morphology) की जांच और DNA विश्लेषण के बाद यह स्पष्ट हुआ कि मिजोरम में पाई जाने वाली यह आबादी अब तक ज्ञात किसी भी Calamaria प्रजाति से अलग है।
सोमवार को प्रकाशित इस अध्ययन ने यह स्थापित कर दिया कि यह सांप दक्षिण-पूर्व एशिया की सामान्य प्रजातियों का हिस्सा नहीं, बल्कि मिजोरम के लिए विशिष्ट और अलग वंश का प्रतिनिधित्व करता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए त्वरित तथ्य (Prelims Ready)
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क्या: मिजोरम में नई रीड स्नेक प्रजाति की खोज
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वैज्ञानिक नाम: Calamaria mizoramensis
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स्थान: मिजोरम, भारत
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प्रकाशन: Zootaxa (अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका)
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संरक्षण स्थिति: Least Concern (IUCN – अनुमानित)
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वैश्विक महत्व: Calamaria वंश की कुल प्रजातियाँ अब ~70
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राष्ट्रीय महत्व: भारत की सरीसृप विविधता में वृद्धि
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राज्य अपडेट: मिजोरम की हर्पेटोफौना अब 169 प्रजातियाँ
वर्षों पुरानी गलतफहमी कैसे दूर हुई?
प्रोफेसर लालरेमसांगा के अनुसार, इस सांप के नमूने पहली बार 2008 में मिजोरम से एकत्र किए गए थे। उस समय इन्हें दक्षिण-पूर्व एशिया में पाई जाने वाली सामान्य रीड स्नेक प्रजातियों का हिस्सा माना गया था।
हालिया अध्ययन में:
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शरीर के आकार और स्केल पैटर्न का सूक्ष्म विश्लेषण
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माइटोकॉन्ड्रियल DNA की तुलना
की गई, जिससे यह सामने आया कि मिजोरम की आबादी अपने सबसे करीबी रिश्तेदारों से 15 प्रतिशत से अधिक आनुवंशिक रूप से अलग है। वैज्ञानिक मानकों के अनुसार, यह अंतर एक नई प्रजाति घोषित करने के लिए पर्याप्त है।
शोध क्षेत्र और नमूना संग्रह
शोध दल ने पिछले एक दशक में मिजोरम के कई क्षेत्रों से एकत्र किए गए नमूनों का अध्ययन किया, जिनमें शामिल हैं:
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आइजोल
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रीएक
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सिहफिर
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सॉलेंग
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मामित और कोलासिब जिले के कुछ हिस्से
यह व्यापक भौगोलिक अध्ययन इस बात की पुष्टि करता है कि Calamaria mizoramensis केवल एक सीमित स्थान तक सिमटी नहीं है, बल्कि राज्य के विभिन्न वन क्षेत्रों में फैली हुई है।
सरीसृप और उभयचरों की अद्यतन सूची
इस अध्ययन का एक और महत्वपूर्ण पहलू मिजोरम के सरीसृप और उभयचर जीवों की अद्यतन सूची है। शोधकर्ताओं ने दस्तावेज़ किया कि राज्य में अब कुल:
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52 उभयचर (Amphibians)
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117 सरीसृप (Reptiles)
यानी कुल 169 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यह आंकड़ा मिजोरम को उत्तर-पूर्व भारत के सबसे समृद्ध हर्पेटोफौना राज्यों में शामिल करता है।
संरक्षण स्थिति और पारिस्थितिकी
उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर, शोधकर्ताओं ने IUCN रेड लिस्ट मानदंडों के तहत इस प्रजाति को ‘कम चिंताजनक (Least Concern)’ श्रेणी में रखा है। इसके प्रमुख कारण हैं:
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कई स्थानों पर इसकी उपस्थिति
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वर्तमान में कोई बड़ा मानवजनित खतरा नहीं
यह प्रजाति:
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विषैली नहीं है
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मनुष्यों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है
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आमतौर पर निशाचर और अर्ध-भूमिगत होती है
ये सांप नम, पहाड़ी जंगलों में रहते हैं और इन्हें समुद्र तल से 670 से 1,295 मीटर की ऊँचाई तक देखा गया है—यहाँ तक कि मिजोरम विश्वविद्यालय परिसर जैसे मानव बस्तियों के पास भी।
वैश्विक संदर्भ: Calamaria वंश
Calamaria वंश में विश्व स्तर पर पहले 69 मान्यता प्राप्त प्रजातियाँ थीं। Calamaria mizoramensis के जुड़ने से यह संख्या लगभग 70 हो गई है। इस वंश की विशेषता यह है कि:
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अधिकांश प्रजातियाँ छोटी और गुप्त होती हैं
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इनका अध्ययन सीमित रहा है
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दक्षिण-पूर्व एशिया और उत्तर-पूर्व भारत में इनकी विविधता अधिक है
उत्तर-पूर्व भारत में जैव सर्वेक्षण की आवश्यकता
शोधकर्ताओं ने इस खोज के माध्यम से यह भी रेखांकित किया है कि उत्तर-पूर्व भारत के वनाच्छादित पहाड़ी क्षेत्रों में अब भी:
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कई प्रजातियाँ ठीक से दर्ज नहीं की गई हैं
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निरंतर और गहन जैविक सर्वेक्षण की आवश्यकता है
यह खोज नीति-निर्माताओं और वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि जैव विविधता संरक्षण और शोध को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

