GeM की ‘वूमेनिया’ पहल के 7 साल पूरे: महिला उद्यमिता
GeM की ‘वूमेनिया’ पहल के 7 साल पूरे: महिला उद्यमिता

GeM की ‘वूमेनिया’ पहल के 7 साल पूरे: महिला उद्यमिता

भारत के डिजिटल पब्लिक प्रोक्योरमेंट इकोसिस्टम ने महिला उद्यमिता को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। Government e-Marketplace (GeM) की प्रमुख पहल वूमेनिया (Womaniya) ने अपने 7 वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह पहल सरकारी खरीद में महिलाओं के नेतृत्व वाले माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज (MSEs) की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।

पिछले सात वर्षों में वूमेनिया ने देशभर में महिला उद्यमियों के लिए पहुंच (Access), पैमाना (Scale) और पहचान (Visibility) को पूरी तरह बदल दिया है और यह दिखाया है कि नीति-समर्थित डिजिटल प्लेटफॉर्म किस तरह संरचनात्मक असमानताओं को दूर कर सकते हैं।


खबरों में क्यों?

GeM ने वूमेनिया पहल के सात वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया है। इस अवसर पर यह सामने आया कि:

  • महिला-नेतृत्व वाले MSEs को

  • ₹80,000 करोड़ से अधिक के पब्लिक प्रोक्योरमेंट ऑर्डर प्राप्त हुए हैं

यह आंकड़ा महिला उद्यमों के लिए तय 3% अनिवार्य खरीद लक्ष्य से कहीं अधिक है, जो इस बात का प्रमाण है कि डिजिटल सार्वजनिक खरीद महिला उद्यमिता को मुख्यधारा में लाने का एक प्रभावी माध्यम बन चुकी है।


वूमेनिया पहल क्या है?

वूमेनिया की शुरुआत 14 जनवरी 2019 को महिलाओं उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की सरकारी बाज़ारों तक सीमित पहुँच की समस्या को दूर करने के लिए की गई थी।

इस पहल की प्रमुख विशेषताएँ हैं:

  • विक्रेताओं और सरकारी खरीदारों के बीच प्रत्यक्ष, पारदर्शी और पूर्णतः डिजिटल मंच

  • बिचौलियों की भूमिका का उन्मूलन

  • पारंपरिक प्रवेश बाधाओं (Entry Barriers) में कमी

समय के साथ, वूमेनिया केवल एक सुविधा मंच नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अवसर पारिस्थितिकी तंत्र (National Opportunity Ecosystem) के रूप में विकसित हो गई है, जो महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को प्रतिस्पर्धा, स्केल-अप और विश्वसनीयता स्थापित करने में सक्षम बनाती है।


सात वर्षों का प्रभाव और प्रमुख उपलब्धियाँ

14 जनवरी 2026 तक GeM पोर्टल पर:

  • 2 लाख से अधिक महिला-नेतृत्व वाले MSEs पंजीकृत

  • कुल ₹80,000 करोड़ से अधिक के सरकारी ऑर्डर प्राप्त

  • GeM के कुल ऑर्डर मूल्य में लगभग 4.7% हिस्सेदारी

यह उपलब्धि इस तथ्य को रेखांकित करती है कि जब नीतिगत समर्थन + डिजिटल प्लेटफॉर्म एक साथ काम करते हैं, तो समावेशी आर्थिक भागीदारी तेज़ी से बढ़ती है।


संस्थागत समर्थन और नीतिगत ज़ोर

नई दिल्ली में आयोजित स्मरणीय कार्यक्रम में कई प्रमुख संस्थानों ने भाग लिया, जिनमें:

  • एमएसएमई मंत्रालय

  • United Nations Resident Coordinator Office

  • UN Women India

वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि:

  • संस्थागत पहुँच (Institutional Access)

  • क्षमता निर्माण (Capacity Building)

  • और निरंतर नीतिगत समर्थन

महिला उद्यमिता के दीर्घकालिक विकास के लिए अनिवार्य हैं।
चर्चाओं में Gender-Responsive Public Procurement (GRPP) को महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मुख्यधारा में लाने का एक शक्तिशाली उपकरण बताया गया।


महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने में GeM की भूमिका

GeM नेतृत्व के अनुसार, वूमेनिया पहल अब एक संरचित और स्केलेबल इकोसिस्टम बन चुकी है।

GeM के माध्यम से:

  • पारदर्शी मूल्य खोज (Transparent Price Discovery)

  • उत्पादों की आसान तुलना

  • और राष्ट्रीय स्तर के बाज़ार तक सीधी पहुँच

संभव हुई है।

इसके साथ ही, महिला उद्यमियों के लिए:

  • General Financial Rules (GFR)

  • सरकारी खरीद प्रक्रियाओं

  • और बाज़ार रुझानों की समझ

को सार्वजनिक खरीद अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है।


डिजिटल पब्लिक प्रोक्योरमेंट और उद्यमशील लचीलापन

वूमेनिया पहल यह दर्शाती है कि जब प्रौद्योगिकी को नीतिगत उद्देश्यों से जोड़ा जाता है, तो:

  • दीर्घकालिक उद्यमशीलता लचीलापन (Entrepreneurial Resilience)

  • वित्तीय आत्मनिर्भरता

  • और महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों की स्थिरता

को बढ़ावा मिलता है।

यह पहल आत्मनिर्भर भारत और समावेशी विकास के व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है।


GeM और सार्वजनिक खरीद का व्यापक महत्व

Government e-Marketplace (GeM) भारत का राष्ट्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल है, जिसका उद्देश्य:

  • सरकारी खरीद में दक्षता

  • पारदर्शिता

  • और समावेशन

को बढ़ावा देना है।
यह पोर्टल सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य संस्थाओं को एक साझा डिजिटल मंच पर विक्रेताओं से जोड़ता है।

वूमेनिया जैसी लक्षित पहलें यह प्रमाणित करती हैं कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के भीतर किए गए हस्तक्षेप किस तरह:

  • लैंगिक असमानताओं को कम कर सकते हैं

  • महिला उद्यमिता को मुख्यधारा में ला सकते हैं

  • और समान व सतत विकास को गति दे सकते हैं

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