पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण वैश्विक पहल — रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स (Responsible Nations Index – RNI) — का औपचारिक शुभारंभ किया। यह सूचकांक इस विचार को केंद्र में रखता है कि किसी देश की महानता केवल उसकी आर्थिक वृद्धि या सैन्य शक्ति से नहीं, बल्कि इस बात से भी तय होनी चाहिए कि वह अपने नागरिकों, समाज और मानवता के प्रति कितना जिम्मेदार व्यवहार करता है।
आज के दौर में जब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था प्रतिस्पर्धा, शक्ति संतुलन और संसाधनों के नियंत्रण पर केंद्रित है, ऐसे में RNI एक वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जो नैतिक शासन, समावेशी विकास और मानवीय मूल्यों को प्रगति का मूल आधार मानता है।
समाचार में क्यों?
पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने नई दिल्ली में रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स (RNI) का उद्घाटन किया।
यह सूचकांक देशों का आकलन उनकी आर्थिक या सैन्य शक्ति के बजाय मानवता के प्रति उनकी जिम्मेदारी, नैतिक शासन और समावेशी नीतियों के आधार पर करता है। यह पहल वैश्विक स्तर पर शासन की गुणवत्ता को मापने की दिशा में एक नई सोच को दर्शाती है।
रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स (RNI) क्या है?
रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स एक वैश्विक मूल्यांकन ढांचा है, जिसका उद्देश्य यह मापना है कि कोई देश:
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अपने नागरिकों के अधिकारों और कल्याण की रक्षा कैसे करता है,
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पर्यावरण संरक्षण के लिए कितनी गंभीरता दिखाता है,
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वैश्विक ज्ञान, शांति और सहयोग में क्या योगदान देता है,
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और नीति-निर्माण में नैतिक मूल्यों को कितनी प्राथमिकता देता है।
पारंपरिक वैश्विक सूचकांक जैसे कि GDP रैंकिंग, सैन्य शक्ति सूचकांक या प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक मुख्यतः आर्थिक उत्पादन, सैन्य क्षमता और रणनीतिक प्रभाव पर केंद्रित होते हैं। इसके विपरीत, RNI एक मानव-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाता है, जो विकास की गुणवत्ता को विकास की मात्रा से अधिक महत्वपूर्ण मानता है।
इस सूचकांक का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रगति का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचे और नीति-निर्माण में नैतिक जिम्मेदारी को केंद्रीय स्थान मिले।
सूचकांक के मुख्य स्तंभ
रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है:
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नैतिक शासन (Ethical Governance)
इसमें पारदर्शिता, जवाबदेही, भ्रष्टाचार नियंत्रण, कानून का शासन और संस्थागत ईमानदारी जैसे पहलुओं का मूल्यांकन किया जाता है। -
समावेशी विकास (Inclusive Development)
इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता, सामाजिक सुरक्षा, गरीबी उन्मूलन और कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण पर देशों के प्रयासों को परखा जाता है। -
नैतिक एवं वैश्विक जिम्मेदारी (Moral and Global Responsibility)
इसमें पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, शांति स्थापना और वैश्विक ज्ञान में योगदान जैसे तत्व शामिल हैं।
इन स्तंभों के माध्यम से RNI यह संदेश देता है कि कोई भी राष्ट्र तभी वास्तव में “महान” कहलाने योग्य है, जब वह शक्ति के साथ-साथ संवेदनशीलता और जिम्मेदारी भी प्रदर्शित करे।
सूचकांक के पीछे संस्थान
रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स का विकास वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन द्वारा किया गया है, जिसमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) का अकादमिक सहयोग शामिल है।
यह साझेदारी नीति अनुसंधान और शैक्षणिक विशेषज्ञता को जोड़ती है, जिससे सूचकांक की:
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वैचारिक विश्वसनीयता,
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विश्लेषणात्मक गहराई,
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और अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता मजबूत होती है।
यह पहल इस बात का भी संकेत है कि आज के वैश्विक शासन ढांचों को आकार देने में ज्ञान संस्थानों और थिंक टैंक्स की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
उद्घाटन के दौरान राम नाथ कोविंद के विचार
उद्घाटन समारोह के दौरान पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा कि:
“एक जिम्मेदार राष्ट्र बनने के लिए केवल आर्थिक प्रगति पर्याप्त नहीं है। नैतिक शासन, समावेशी विकास और नैतिक नेतृत्व इसके अनिवार्य आधार हैं।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि:
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दीर्घकालिक स्थिरता इस पर निर्भर करती है कि
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देश अपने नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है,
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पर्यावरण की रक्षा कैसे करता है,
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और वैश्विक समुदाय में क्या सकारात्मक भूमिका निभाता है।
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उनके अनुसार, RNI देशों को यह आत्ममंथन करने का अवसर देता है कि वे केवल शक्ति-संपन्न राष्ट्र हैं या वास्तव में जिम्मेदार राष्ट्र भी हैं।
वैश्विक संदर्भ में RNI का महत्व
आज दुनिया जलवायु संकट, असमानता, युद्ध, शरणार्थी समस्या और लोकतांत्रिक संस्थाओं के क्षरण जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे समय में RNI जैसे सूचकांक यह याद दिलाते हैं कि:
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विकास का अंतिम उद्देश्य मानव कल्याण होना चाहिए,
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शक्ति का उपयोग जनहित के लिए होना चाहिए,
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और नीति-निर्माण में नैतिकता को केंद्रीय स्थान मिलना चाहिए।
RNI नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के लिए एक ऐसा उपकरण बन सकता है, जो शासन की गुणवत्ता पर वैश्विक बहस को नई दिशा दे।

