इज़राइल ने गाज़ा युद्धविराम और युद्धोत्तर पुनर्निर्माण की निगरानी के लिए प्रस्तावित अमेरिकी पहल “बोर्ड ऑफ पीस” में शामिल होने पर सहमति देकर एक अहम कूटनीतिक कदम उठाया है। इस निर्णय की घोषणा इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने की है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले इज़राइल ने इस तरह की बहुपक्षीय निगरानी व्यवस्था पर आपत्तियाँ जताई थीं। अब इज़राइल का रुख बदलना न केवल क्षेत्रीय राजनीति, बल्कि वैश्विक कूटनीति में भी नए समीकरण पैदा कर सकता है।
क्यों चर्चा में है?
यह मुद्दा इसलिए चर्चा में है क्योंकि:
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प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने पुष्टि की है कि इज़राइल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित और अध्यक्षता वाले “बोर्ड ऑफ पीस” में शामिल होगा।
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यह बोर्ड गाज़ा युद्धविराम के पालन और भविष्य की शासन व्यवस्था की निगरानी करेगा।
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यह निर्णय इज़राइल के पहले के विरोधी रुख से हटकर है, जिससे घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मंच—दोनों पर प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।
ट्रंप का “बोर्ड ऑफ पीस” क्या है?
बोर्ड ऑफ पीस एक अमेरिका-नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य गाज़ा में संघर्ष के बाद की व्यवस्थाओं को संभालना और स्थिरता सुनिश्चित करना है।
इस पहल की प्रमुख विशेषताएँ:
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शुरुआत में इसे कुछ वैश्विक नेताओं के एक छोटे समूह के रूप में देखा गया था।
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बाद में ट्रंप प्रशासन ने इसे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के रूप में विस्तारित करने का संकेत दिया।
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इसका मुख्य उद्देश्य गाज़ा युद्धविराम समझौते के कार्यान्वयन की निगरानी करना है।
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ट्रंप ने यह भी कहा है कि भविष्य में यह बोर्ड अन्य वैश्विक संघर्षों के समाधान में भी भूमिका निभा सकता है, यानी यह केवल गाज़ा तक सीमित नहीं रहेगा।
इस पहल को ट्रंप की उस कूटनीतिक शैली से जोड़ा जा रहा है, जिसमें पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के बजाय वैकल्पिक मंचों पर ज़ोर दिया जाता है।
इज़राइल के रुख में बदलाव और आंतरिक चिंताएँ
इज़राइल का इस बोर्ड में शामिल होने का फैसला उसके पहले के रुख से स्पष्ट रूप से अलग है।
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पहले नेतन्याहू कार्यालय ने गाज़ा कार्यकारी समिति की संरचना पर आपत्ति जताई थी।
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तुर्की को शामिल किए जाने पर भी इज़राइल ने चिंता जताई थी, क्योंकि तुर्की को वह क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी मानता है।
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अब इस सहमति से इज़राइल के भीतर दक्षिणपंथी गठबंधन सहयोगियों, खासकर वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मोट्रिच, के साथ मतभेद बढ़ सकते हैं।
कुछ इज़राइली नेताओं का मानना है कि गाज़ा के भविष्य पर इज़राइल को एकतरफा नियंत्रण बनाए रखना चाहिए, जबकि बहुपक्षीय निगरानी से उसकी रणनीतिक स्वतंत्रता सीमित हो सकती है।
कौन-कौन से देश शामिल हुए या आमंत्रित किए गए?
बोर्ड ऑफ पीस को एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पुष्टि किए गए सदस्य देश:
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संयुक्त अरब अमीरात
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मोरक्को
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वियतनाम
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बेलारूस
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हंगरी
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कज़ाख़स्तान
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अर्जेंटीना
आमंत्रित लेकिन अभी प्रतिक्रिया न देने वाले देश/संस्थाएँ:
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यूनाइटेड किंगडम
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कनाडा
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मिस्र
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रूस
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तुर्की
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यूरोपीय संघ
आमंत्रित देशों की यह विविधता दर्शाती है कि ट्रंप इस बोर्ड को एक वैश्विक संघर्ष-प्रबंधन मंच के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।
गाज़ा कार्यकारी समिति और उसकी जिम्मेदारियाँ
युद्धविराम ढांचे के तहत गाज़ा कार्यकारी समिति, बोर्ड ऑफ पीस के अधीन काम करेगी। इसकी प्रमुख जिम्मेदारियाँ होंगी:
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युद्धविराम के दूसरे चरण को लागू करना
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एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती
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हमास के निरस्त्रीकरण की निगरानी
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पुनर्निर्माण कार्यों और
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फिलीस्तीनी तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा दैनिक प्रशासन की देखरेख
यह समिति गाज़ा की युद्धोत्तर शासन व्यवस्था में केंद्रीय भूमिका निभाएगी।
संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को लेकर विवाद
ट्रंप की टिप्पणियों के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) की भूमिका को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया है।
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ट्रंप ने कहा कि यह बोर्ड “संभवतः” संयुक्त राष्ट्र की जगह ले सकता है।
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उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए।
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फ्रांस ने इस विचार का कड़ा विरोध किया। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने UN को बदलने के किसी भी प्रयास को सिरे से खारिज कर दिया।
आलोचकों का कहना है कि इस तरह की पहलें मौजूदा वैश्विक शासन संरचनाओं को कमजोर कर सकती हैं और अंतरराष्ट्रीय सहमति आधारित व्यवस्था को चुनौती दे सकती हैं।

