राजस्थान का अलवर बनेगा जैव विविधता संरक्षण का नया केंद्र, 81 वन्यजीव प्रजातियों के साथ विकसित होगा बड़ा बायोलॉजिकल पार्क
राजस्थान का अलवर बनेगा जैव विविधता संरक्षण का नया केंद्र, 81 वन्यजीव प्रजातियों के साथ विकसित होगा बड़ा बायोलॉजिकल पार्क

राजस्थान का अलवर बनेगा जैव विविधता संरक्षण का नया केंद्र, 81 वन्यजीव प्रजातियों के साथ विकसित होगा बड़ा बायोलॉजिकल पार्क

राजस्थान अपने समृद्ध वन्यजीव और पर्यटन विरासत में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ने जा रहा है। अलवर जिले के कटी घाटी क्षेत्र में एक विशाल और आधुनिक जैविक पार्क (Biological Park) विकसित किए जाने की योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण, पशु देखभाल और पर्यटन—तीनों को एक ही मंच पर जोड़ने वाली होगी। इसके पूर्ण होने के बाद यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का अपनी तरह का पहला जैविक पार्क बन जाएगा, जिसमें सफारी, रेस्क्यू सेंटर और अत्याधुनिक पशु चिकित्सालय जैसी सुविधाएँ एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी।

यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल राजस्थान के वन्यजीव पर्यटन को नया आयाम देगी, बल्कि अलवर को देश के प्रमुख इको-टूरिज्म गंतव्यों में शामिल करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगी।

अलवर जैविक पार्क का स्थान और क्षेत्रफल

प्रस्तावित जैविक पार्क का निर्माण अलवर जिले में कटी घाटी और जैसमंद क्षेत्र के बीच किया जाएगा। यह पार्क लगभग 100 हेक्टेयर भूमि में विकसित होगा। योजना के अनुसार—

  • करीब 30 प्रतिशत क्षेत्र को चिड़ियाघर और सफारी ज़ोन के रूप में विकसित किया जाएगा

  • शेष 70 प्रतिशत क्षेत्र को हरित क्षेत्र के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा

इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पार्क का वातावरण प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल बना रहे तथा जानवरों को खुले और स्वाभाविक आवास जैसा अनुभव मिले।

81 प्रजातियों के 400 से अधिक वन्यजीवों का होगा नया घर

अलवर जैविक पार्क में 81 विभिन्न प्रजातियों के 400 से अधिक वन्यजीवों को रखा जाएगा। यहां पर्यटकों को शेर, चीता और भारत में पाई जाने वाली विभिन्न प्रजातियों के बाघ देखने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा, अफ्रीका से लाए गए जिराफ भी इस पार्क का प्रमुख आकर्षण होंगे, जो इसे देश के अन्य जैविक पार्कों से अलग पहचान देंगे।

वन विभाग का लक्ष्य है कि जानवरों को प्राकृतिक परिस्थितियों के करीब रखा जाए, जिससे उनका स्वास्थ्य बेहतर रहे और संरक्षण के प्रयास अधिक प्रभावी हों।

एक ही परिसर में शेर, बाघ और शाकाहारी सफारी

इस जैविक पार्क की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि एक ही स्थान पर कई प्रकार की सफारी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। पर्यटक—

  • शेर सफारी

  • बाघ सफारी

  • शाकाहारी जीवों की सफारी

का आनंद ले सकेंगे। NCR क्षेत्र में इस तरह की बहु-सफारी व्यवस्था पहली बार देखने को मिलेगी। इससे न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि अलवर का पर्यटन मानचित्र पर महत्व भी कई गुना बढ़ जाएगा।

हाई-टेक पशु रेस्क्यू सेंटर की स्थापना

जैविक पार्क के भीतर एक अत्याधुनिक पशु रेस्क्यू सेंटर भी विकसित किया जाएगा। इसे गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान में मौजूद प्रसिद्ध रेस्क्यू सुविधा की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। वन विभाग की टीम पहले ही गिर का दौरा कर वहाँ की—

  • रेस्क्यू तकनीक

  • पशु देखभाल प्रणाली

  • सामुदायिक सहभागिता मॉडल

का गहन अध्ययन कर चुकी है। इस केंद्र में घायल, बीमार या संकट में फंसे वन्यजीवों को सुरक्षित लाकर उपचार और पुनर्वास की सुविधा दी जाएगी।

आधुनिक पशु चिकित्सालय से मिलेगी बेहतर देखभाल

परियोजना का एक अहम हिस्सा पूरी तरह सुसज्जित पशु चिकित्सालय भी होगा। इसमें—

  • आधुनिक चिकित्सा उपकरण

  • विशेषज्ञ पशु चिकित्सक

  • वन विभाग के प्रशिक्षित अधिकारी

की स्थायी तैनाती की जाएगी। यह अस्पताल न केवल पार्क के जानवरों के लिए, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से बचाए गए वन्यजीवों के इलाज के लिए भी उपयोगी होगा।

तितली पार्क से बढ़ेगी जैव विविधता और आकर्षण

बड़े वन्यजीवों के साथ-साथ पार्क में एक विशेष तितली पार्क भी विकसित किया जाएगा। इसमें विभिन्न प्रजातियों की तितलियाँ प्रदर्शित की जाएँगी। यह न केवल पार्क की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाएगा, बल्कि—

  • छात्रों

  • बच्चों

  • शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों

के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक केंद्र भी बनेगा।

देशभर के चिड़ियाघरों से लाए जाएँगे जानवर

अलवर जैविक पार्क को आबाद करने के लिए वन विभाग ने देश के 25 चिड़ियाघरों से संपर्क किया है। इन चिड़ियाघरों से ऐसे जानवरों की जानकारी जुटाई जा रही है, जिन्हें सुरक्षित रूप से अलवर स्थानांतरित किया जा सके। आवश्यक केंद्रीय और राज्य स्तरीय अनुमतियाँ मिलने के बाद चरणबद्ध तरीके से जानवरों का स्थानांतरण किया जाएगा।

स्वीकृति प्रक्रिया और परियोजना की समय-सीमा

वन विभाग द्वारा इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पहले ही तैयार कर ली गई है। निर्माण कार्य केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद शुरू किया जाएगा। मंजूरी मिलते ही परियोजना को तेज़ी से आगे बढ़ाने की योजना है, ताकि निर्धारित समय में इसका लाभ पर्यटन और संरक्षण—दोनों क्षेत्रों को मिल सके।

पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

अलवर जैविक पार्क के विकसित होने से—

  • वन्यजीव संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी

  • राजस्थान के पर्यटन को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा

  • स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे

आधुनिक सुविधाओं, विविध वन्यजीव प्रजातियों और अनेक सफारी विकल्पों के साथ यह पार्क पर्यटकों, शोधकर्ताओं और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र बनने की पूरी क्षमता रखता है।

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