DRDO की हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल ने गणतंत्र दिवस पर पहली बार किया प्रदर्शन
DRDO की हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल ने गणतंत्र दिवस पर पहली बार किया प्रदर्शन

DRDO की हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल ने गणतंत्र दिवस पर पहली बार किया प्रदर्शन

भारत की रक्षा आधुनिकीकरण यात्रा का एक सशक्त और स्पष्ट संदेश 77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान देखने को मिला, जब पहली बार एक उन्नत हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणाली का सार्वजनिक प्रदर्शन किया गया। कर्तव्य पथ पर इस अत्याधुनिक हथियार प्रणाली की मौजूदगी ने न केवल देश की बढ़ती उच्च-गति और सटीक युद्ध क्षमताओं को रेखांकित किया, बल्कि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय रणनीतिक परिदृश्य में समुद्री सुरक्षा को दी जा रही प्राथमिकता को भी उजागर किया।

यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि भारत अब पारंपरिक रक्षा प्रणालियों से आगे बढ़कर भविष्य के युद्ध के लिए तैयार हो रहा है—जहाँ गति, सटीकता और तकनीकी बढ़त निर्णायक भूमिका निभाती है।


क्यों चर्चा में है?

77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान Defence Research and Development Organisation (DRDO) ने अपनी हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल प्रणाली LR-AShM (Long-Range Anti-Ship Missile) को इसके लॉन्चर के साथ प्रदर्शित किया। यह इस अत्याधुनिक हथियार प्रणाली का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन था।

इस प्रदर्शन को भारत की रक्षा क्षमताओं में एक मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि यह दर्शाता है कि भारत अब हाइपरसोनिक तकनीक जैसे अत्यंत जटिल और उन्नत क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ चुका है।


LR-AShM मिसाइल प्रणाली क्या है?

LR-AShM (लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप मिसाइल) एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है, जिसे विशेष रूप से Indian Navy की तटीय बैटरी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है।

हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन (HGV) सामान्यतः मैक-5 (ध्वनि की गति से पाँच गुना) या उससे अधिक की रफ्तार से उड़ान भरते हैं। LR-AShM की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह:

  • अपेक्षाकृत निम्न ऊँचाई पर उड़ान भरती है

  • अत्यधिक maneuverable (चालाक) उड़ान पथ अपनाती है

  • उड़ान के दौरान दिशा बदलने में सक्षम होती है

इन गुणों के कारण इसे आधुनिक रडार और वायु रक्षा प्रणालियों के लिए पहचानना और रोकना बेहद कठिन हो जाता है।

यह मिसाइल प्रणाली भूमि-आधारित तैनाती के लिए डिज़ाइन की गई है, जिससे भारत की लंबी तटरेखा की ओर बढ़ रहे शत्रु नौसैनिक प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया संभव हो सके।


हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल की प्रमुख विशेषताएँ

LR-AShM में उच्च गति, सटीकता और survivability (जीवित रहने की क्षमता) का उत्कृष्ट संयोजन देखने को मिलता है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं:

  • अत्यधिक गति: मैक-5 से अधिक की रफ्तार दुश्मन की प्रतिक्रिया समय को बेहद सीमित कर देती है।

  • उच्च maneuverability: ग्लाइड वाहन की दिशा बदलने की क्षमता इसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम से बच निकलने में सक्षम बनाती है।

  • एंटी-शिप अनुकूलन: यह मिसाइल विशेष रूप से उच्च-मूल्य वाले नौसैनिक लक्ष्यों—जैसे युद्धपोत, एयरक्राफ्ट कैरियर और सपोर्ट शिप्स—को निशाना बनाने के लिए विकसित की गई है।

  • स्वदेशी तकनीक: पूरी तरह देश में विकसित यह प्रणाली भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूत करती है।

इन खूबियों के कारण LR-AShM को आधुनिक नौसैनिक युद्ध में एक गेम-चेंजर माना जा रहा है।


भारतीय नौसेना के लिए रणनीतिक महत्व

LR-AShM की तैनाती से भारतीय नौसेना की तटीय रक्षा और समुद्री क्षेत्र निषेध (Sea Denial) क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

रणनीतिक रूप से इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि:

  • यह हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में शत्रुतापूर्ण नौसैनिक गतिविधियों के विरुद्ध एक मजबूत प्रतिरोधक (Deterrent) के रूप में कार्य करेगी।

  • तटीय बैटरियों के रूप में इसकी तैनाती भारत को अपने बंदरगाहों, समुद्री अवसंरचना और प्रमुख शिपिंग मार्गों की बेहतर सुरक्षा प्रदान करेगी।

  • तकनीकी रूप से उन्नत विरोधियों के खिलाफ भारत की रणनीतिक बढ़त को मजबूत करेगी।

यह प्रणाली भारत की समुद्री रणनीति को रक्षात्मक से आगे बढ़कर सक्रिय प्रतिरोध की दिशा में ले जाती है।


हाइपरसोनिक हथियार और आधुनिक युद्ध

हाइपरसोनिक हथियार आधुनिक युद्ध में एक क्रांतिकारी परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनकी:

  • असाधारण गति

  • अनिश्चित और अप्रत्याशित उड़ान पथ

  • अत्यधिक सटीकता

इन्हें पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों से कहीं अधिक प्रभावी बनाती है। वर्तमान में दुनिया के केवल कुछ ही देशों के पास परिचालन स्तर की हाइपरसोनिक क्षमताएँ हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में भारत की प्रगति उसे उन्नत सैन्य शक्तियों के विशिष्ट समूह में स्थापित करती है।


आत्मनिर्भर भारत और भविष्य की दिशा

77वें गणतंत्र दिवस पर LR-AShM का प्रदर्शन आत्मनिर्भर भारत अभियान की रक्षा क्षेत्र में सफलता का भी प्रतीक है। DRDO द्वारा विकसित यह प्रणाली दिखाती है कि भारत:

  • जटिल रक्षा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भर बन रहा है

  • आयात पर निर्भरता कम कर रहा है

  • भविष्य-उन्मुख सैन्य तकनीकों में निवेश कर रहा है

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply