अंतरराष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस 2026: 11 फरवरी का महत्व और उद्देश्य
अंतरराष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस 2026: 11 फरवरी का महत्व और उद्देश्य

अंतरराष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस 2026: 11 फरवरी का महत्व और उद्देश्य

हर वर्ष 11 फरवरी को विज्ञान में महिलाओं और बालिकाओं का अंतर्राष्ट्रीय दिवस (International Day of Women and Girls in Science) मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित यह दिवस विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्रों में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और महिलाओं व बालिकाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से समर्पित है।

शिक्षा के क्षेत्र में पिछले कुछ दशकों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, लेकिन STEM करियर, अनुसंधान और नेतृत्व पदों में महिलाओं की भागीदारी अब भी अपेक्षाकृत कम है। वर्ष 2026 का यह दिवस विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसकी थीम कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सामाजिक विज्ञान, STEM और वित्त के समन्वय के माध्यम से समावेशी भविष्य के निर्माण पर केंद्रित है।


दिवस की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2013 में एक प्रस्ताव पारित कर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महिलाओं और बालिकाओं के लिए समान अवसरों पर जोर दिया था। इसके बाद 11 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस के रूप में वैश्विक स्तर पर मनाया जाने लगा। यह पहल 2030 के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप है, जिनमें लैंगिक समानता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रमुख लक्ष्य हैं।

इस दिवस का मुख्य उद्देश्य है:

  • STEM क्षेत्रों में लैंगिक असमानता को कम करना

  • विज्ञान शिक्षा में बालिकाओं की रुचि और भागीदारी बढ़ाना

  • वैज्ञानिक अनुसंधान और नेतृत्व में महिलाओं की संख्या बढ़ाना

  • समावेशी नवाचार और सतत विकास को प्रोत्साहित करना

समावेशी विज्ञान केवल समानता का प्रश्न नहीं है, बल्कि बेहतर शोध, व्यापक दृष्टिकोण और प्रभावी समाधान का आधार भी है।


अंतर्राष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस 2026 की थीम

वर्ष 2026 की थीम है:
“Synergizing AI, Social Science, STEM and Finance: Building Inclusive Futures for Women and Girls”
अर्थात – “एआई, सामाजिक विज्ञान, STEM और वित्त का समन्वय: महिलाओं और बालिकाओं के लिए समावेशी भविष्य का निर्माण।”

यह थीम इस बात पर जोर देती है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वैज्ञानिक शिक्षा, सामाजिक नीतियाँ और वित्तीय निवेश एक साथ मिलकर किस प्रकार समान अवसरों वाला भविष्य तैयार कर सकते हैं।

आज एआई स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, कृषि, शिक्षा और औद्योगिक नवाचार जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। लेकिन इन उभरते क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी अभी भी सीमित है। सामाजिक विज्ञान नीतियों को अधिक समावेशी और न्यायसंगत बनाने में मदद करता है, जबकि वित्तीय संसाधन महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप और शोध परियोजनाओं को आगे बढ़ाते हैं।

इन चार स्तंभों—AI, सामाजिक विज्ञान, STEM और वित्त—का समन्वय संतुलित विकास और दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति के लिए आवश्यक है।


STEM में लैंगिक अंतर: चुनौती और अवसर

वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक अनुसंधान में महिलाओं की भागीदारी लगभग 31% के आसपास है, जबकि एआई से संबंधित पेशों में यह संख्या लगभग 22% है। यद्यपि उच्च शिक्षा में युवा महिलाओं का नामांकन लगभग 46% तक पहुँच चुका है, लेकिन विज्ञान विषयों में स्नातक करने वाली महिलाओं का प्रतिशत लगभग 35% ही है।

ये आँकड़े स्पष्ट करते हैं कि शिक्षा में प्रवेश बढ़ने के बावजूद करियर और नेतृत्व स्तर पर लैंगिक अंतर बना हुआ है। इसके कई कारण हैं—सामाजिक रूढ़ियाँ, रोल मॉडल की कमी, कार्यस्थल पर असमान अवसर, और पारिवारिक जिम्मेदारियाँ।

यदि विद्यालय स्तर से ही बालिकाओं को STEM विषयों के प्रति प्रेरित किया जाए, उन्हें मेंटरशिप, छात्रवृत्ति और प्रयोगशाला सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ, तो यह अंतर कम किया जा सकता है। समान भागीदारी से शोध की गुणवत्ता बेहतर होती है, नवाचार को बढ़ावा मिलता है और तकनीकी समाधान अधिक समावेशी बनते हैं।


भारत की विकास दृष्टि और इस दिवस का महत्व

भारत के लिए यह दिवस विशेष महत्व रखता है, क्योंकि देश डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और एआई-आधारित नवाचार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO), जैव-प्रौद्योगिकी अनुसंधान, स्वास्थ्य तकनीक और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में कुशल मानव संसाधन की मांग लगातार बढ़ रही है।

STEM में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी न केवल लैंगिक समानता को मजबूत करती है, बल्कि आर्थिक विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी सशक्त बनाती है। महिला वैज्ञानिक और इंजीनियर विविध दृष्टिकोण लेकर आती हैं, जिससे शोध और नीतियाँ अधिक संतुलित बनती हैं।

सरकार और शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे:

  • छात्रवृत्ति और अनुसंधान अनुदान में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाएँ

  • नेतृत्व पदों पर अवसर प्रदान करें

  • मेंटरशिप और नेटवर्किंग कार्यक्रमों को बढ़ावा दें

  • कार्यस्थल को अधिक सुरक्षित और सहयोगी बनाएँ


समावेशी भविष्य की दिशा में आगे बढ़ते कदम

विज्ञान में महिलाओं और बालिकाओं का अंतर्राष्ट्रीय दिवस केवल एक प्रतीकात्मक अवसर नहीं, बल्कि एक वैश्विक आंदोलन है। यह हमें याद दिलाता है कि सतत विकास और मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए विज्ञान में विविधता और समावेशिता आवश्यक है।

जब महिलाएँ और बालिकाएँ विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में समान रूप से भाग लेती हैं, तो नवाचार अधिक प्रभावी, समाधान अधिक व्यावहारिक और समाज अधिक संतुलित बनता है।

11 फरवरी 2026 हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि हम शिक्षा, नीति और निवेश के माध्यम से ऐसा वातावरण बनाएँ, जहाँ हर लड़की बिना किसी बाधा के वैज्ञानिक बनने का सपना देख सके—और उसे साकार भी कर सके।

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