केरल की पहली दिव्यांग महिला जज: थन्या नाथन ने सिविल जज परीक्षा में टॉप किया
केरल की पहली दिव्यांग महिला जज: थन्या नाथन ने सिविल जज परीक्षा में टॉप किया

केरल की पहली दिव्यांग महिला जज: थन्या नाथन ने सिविल जज परीक्षा में टॉप किया

केरल अपनी न्यायिक व्यवस्था में एक नया इतिहास रचने की कगार पर है। थन्या नाथन, एक दृष्टिबाधित युवा वकील, ने हाल ही में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा 2026 में बेंचमार्क दिव्यांग श्रेणी के उम्मीदवारों में पहला स्थान हासिल किया। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है; यह भारत में न्यायपालिका में योग्यता और क्षमता पर आधारित मूल्यांकन की विकसित होती सोच को भी दर्शाती है, जहाँ दिव्यांगता किसी के करियर की बाधा नहीं बनती।


थन्या नाथन कौन हैं?

थन्या नाथन केरल के कन्नूर ज़िले की 24 वर्षीय वकील हैं। जन्म से दृष्टिबाधित होने के बावजूद, उन्होंने अपने शैक्षणिक जीवन में उत्कृष्टता हासिल की। उनका पालन-पोषण मंगड में हुआ, जहाँ उन्होंने विशेष और मुख्यधारा—दोनों प्रकार के विद्यालयों से शिक्षा प्राप्त की।

थन्या नाथन ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा में बेंचमार्क दिव्यांग श्रेणी में टॉप रैंक हासिल कर केरल की पहली दृष्टिबाधित महिला न्यायाधीश बनने का गौरव हासिल किया। यह उपलब्धि न्यायिक विविधता और समावेशी भर्ती नीतियों के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक क्षण मानी जा रही है।


शैक्षणिक यात्रा और प्रारंभिक जीवन

थन्या की कहानी बचपन से ही दृढ़ता और आत्मनिर्भरता की मिसाल है। उन्होंने ब्रेल आधारित शिक्षण प्रणालियों और सहायक तकनीकों का उपयोग करते हुए पढ़ाई की। विधि अध्ययन के दौरान वह अपने बैच की एकमात्र दृष्टिबाधित छात्रा थीं।

कन्नूर विश्वविद्यालय से एलएलबी में प्रथम स्थान हासिल करने के बाद उनकी सफलता ने साबित किया कि सुलभ शिक्षा, सहायक तकनीक और लगातार प्रयास किसी भी संरचनात्मक बाधा को पार कर सकते हैं। यही दृढ़ नींव उनके कानूनी करियर में सफलता की कुंजी बनी।


सिविल जज परीक्षा की तैयारी

कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद थन्या ने तालिपरम्बा में जूनियर वकील के रूप में कार्य किया। परीक्षा की तैयारी के लिए उन्होंने केस नोट्स ब्रेल में तैयार किए और शोध तथा ड्राफ्टिंग के लिए स्क्रीन-रीडिंग सॉफ़्टवेयर का सहारा लिया।

उनकी तैयारी पूरी तरह अनुशासित आत्म-अध्ययन पर आधारित थी। ब्रेल सामग्री, ऑडियो संसाधन और डिजिटल टूल्स के उपयोग से उन्होंने प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षा में समान अवसर का लाभ उठाया। तिरुवनंतपुरम के एक वरिष्ठ वकील से मार्गदर्शन ने उनकी रणनीति को और मज़बूत किया।

यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि तकनीक और सुलभ संसाधन कैसे दिव्यांग व्यक्तियों को उच्च प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं में सफलता दिला सकते हैं।


न्यायालयों में दिव्यांग पेशेवरों की चुनौतियाँ

थन्या ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालय प्रणालियाँ अभी भी पूरी तरह सुलभ नहीं हैं। भौतिक ढाँचा, डिजिटल कोर्ट प्लेटफ़ॉर्म और केस मैनेजमेंट सिस्टम अक्सर दिव्यांग-अनुकूल नहीं हैं।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि अधिकारी इन व्यवस्थाओं में सुधार करेंगे ताकि दिव्यांग न्यायाधीश और वकील बिना बाधाओं के न्यायिक कार्य कर सकें। उनकी सफलता ने भारत भर में समावेशी न्यायालयी अवसंरचना की आवश्यकता पर नया ध्यान केंद्रित किया है।


सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

थन्या की सफलता का एक अहम आधार 2025 का सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय रहा। इस फैसले में स्पष्ट किया गया कि केवल दिव्यांगता के आधार पर किसी को न्यायिक सेवा से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने राज्यों से आग्रह किया कि वे समावेशी भर्ती नीतियाँ अपनाएँ।

यह फैसला देशभर में न्यायिक समावेशन के लिए मील का पत्थर बन गया और थन्या नाथन के लिए अवसर का मार्ग खोलने में निर्णायक साबित हुआ।


आगे की राह

केरल हाईकोर्ट ने अंतिम चयन सूची राज्य सरकार को औपचारिक नियुक्ति आदेश के लिए भेज दी है। नियुक्ति के बाद थन्या नाथन न्यायाधीश के रूप में सेवा देंगी और भारत की न्याय व्यवस्था में समान अवसर का प्रतीक बनेंगी।

उनकी नियुक्ति केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे न्यायिक तंत्र में महिला और दिव्यांग प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने वाला कदम है। यह कदम न्यायिक प्रणाली में विविध दृष्टिकोण और अधिक समावेशिता सुनिश्चित करेगा।


समाज और न्यायपालिका के लिए संदेश

थन्या नाथन की कहानी पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने साबित किया कि सपनों को हासिल करने में शारीरिक या सामाजिक बाधाएँ बाधा नहीं बन सकतीं। उनके संघर्ष और सफलता ने यह संदेश दिया है कि धैर्य, तैयारी और आत्म-विश्वास से कोई भी चुनौती पार की जा सकती है।

उनकी उपलब्धि महिला सशक्तिकरण, दिव्यांग समावेशन और न्यायिक विविधता के लिए एक नई दिशा तय करती है। यह भविष्य में अन्य महिलाओं और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए प्रेरक उदाहरण बनेगी।

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