एशियाई विकास बैंक (ADB) ने असम में बाढ़ और नदी तट कटाव प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए 182 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अतिरिक्त ऋण को मंजूरी दी है। यह वित्तीय सहायता अक्टूबर 2023 में स्वीकृत 200 मिलियन डॉलर की “क्लाइमेट रेज़िलिएंट ब्रह्मपुत्र इंटीग्रेटेड फ्लड एंड रिवरबैंक इरोजन रिस्क मैनेजमेंट परियोजना” के अतिरिक्त है।
इस नई स्वीकृति के साथ ब्रह्मपुत्र नदी घाटी में बाढ़ जोखिम कम करने, ग्रामीण आजीविका की सुरक्षा और राज्य की आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने के प्रयासों को और गति मिलेगी।
असम में बाढ़ प्रबंधन के लिए ADB ऋण क्या है?
ADB द्वारा स्वीकृत यह अतिरिक्त 182 मिलियन डॉलर का ऋण असम में गंभीर बाढ़ और नदी तट कटाव की समस्या से निपटने के लिए जारी व्यापक परियोजना को विस्तार देगा।
असम हर वर्ष भारी मानसूनी वर्षा और ब्रह्मपुत्र नदी की बदलती धारा के कारण व्यापक बाढ़ का सामना करता है। नदी के किनारे कटाव (Riverbank Erosion) के कारण हजारों हेक्टेयर भूमि हर साल प्रभावित होती है। इससे न केवल कृषि भूमि और आवास नष्ट होते हैं, बल्कि हजारों परिवारों का विस्थापन भी होता है।
यह परियोजना पारंपरिक बाढ़ नियंत्रण उपायों से आगे बढ़कर एक जोखिम-आधारित और जलवायु-सहिष्णु (Climate-Resilient) दृष्टिकोण अपनाती है।
पृष्ठभूमि: 200 मिलियन डॉलर की क्लाइमेट रेज़िलिएंट ब्रह्मपुत्र परियोजना
अक्टूबर 2023 में ADB ने असम के लिए 200 मिलियन डॉलर की परियोजना को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य बाढ़ और नदी तट कटाव प्रबंधन के लिए एक समग्र मॉडल विकसित करना था।
इस परियोजना के प्रमुख लक्ष्य थे:
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बार-बार आने वाली बाढ़ से ग्रामीण गरीबी में कमी
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कृषि भूमि और सार्वजनिक अवसंरचना की सुरक्षा
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समुदायों के विस्थापन को रोकना
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जलवायु सहनशीलता को मजबूत करना
अब अतिरिक्त 182 मिलियन डॉलर की सहायता से इन प्रयासों को और व्यापक बनाया जाएगा। यह दर्शाता है कि परियोजना को दीर्घकालिक और टिकाऊ समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
असम में बाढ़ प्रबंधन क्यों महत्वपूर्ण है?
ब्रह्मपुत्र नदी विश्व की सबसे अधिक गतिशील और बाढ़-प्रवण नदियों में से एक है। हिमालय से आने वाला भारी जलप्रवाह और मानसून के दौरान तीव्र वर्षा इसे और अधिक खतरनाक बना देती है।
लगभग हर वर्ष असम में:
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हजारों गांव जलमग्न हो जाते हैं
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फसलें नष्ट हो जाती हैं
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सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होते हैं
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लाखों लोग प्रभावित होते हैं
बाढ़ और कटाव से उत्पन्न समस्याएं केवल प्राकृतिक आपदा तक सीमित नहीं हैं। ये सामाजिक और आर्थिक अस्थिरता, पलायन और गरीबी को भी बढ़ाती हैं। इसलिए प्रभावी बाढ़ प्रबंधन राज्य की दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
अतिरिक्त 182 मिलियन डॉलर से क्या हासिल होगा?
नए ऋण से निम्नलिखित प्रमुख कार्य किए जाएंगे:
1. तटबंधों और सुरक्षा ढांचे का सुदृढ़ीकरण
पुराने और कमजोर तटबंधों की मरम्मत तथा पुनर्निर्माण किया जाएगा, ताकि वे अधिक जल दबाव सह सकें।
2. उन्नत निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली
आधुनिक बाढ़ पूर्वानुमान तकनीक और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किए जाएंगे, जिससे समय रहते चेतावनी दी जा सके।
3. जलवायु-सहिष्णु इंजीनियरिंग समाधान
नदी के प्रवाह और कटाव के पैटर्न को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक इंजीनियरिंग उपाय अपनाए जाएंगे।
4. समुदाय-आधारित आपदा तैयारी
स्थानीय समुदायों को आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे संकट के समय बेहतर प्रतिक्रिया दे सकें।
यह पहल अस्थायी बाढ़ नियंत्रण उपायों के बजाय दीर्घकालिक और टिकाऊ समाधान विकसित करने पर केंद्रित है।
जलवायु परिवर्तन और बढ़ता जोखिम
जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक वर्षा और अचानक बाढ़ की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है। इससे ब्रह्मपुत्र घाटी में जोखिम और बढ़ गया है।
ADB की यह परियोजना जलवायु अनुकूलन (Climate Adaptation) रणनीतियों को शामिल करती है, जिससे भविष्य में आने वाली चरम मौसम घटनाओं का सामना बेहतर तरीके से किया जा सके।
जलवायु और आपदा वित्तपोषण में ADB की भूमिका
एशियाई विकास बैंक एशिया-प्रशांत क्षेत्र में विकासशील देशों को बुनियादी ढांचा, ऊर्जा, परिवहन और जलवायु अनुकूलन परियोजनाओं के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
असम की यह परियोजना वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों का हिस्सा है। यह दर्शाती है कि बहुपक्षीय विकास बैंक प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों को दीर्घकालिक समाधान प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
एशियाई विकास बैंक (ADB) के बारे में
ADB की स्थापना 19 दिसंबर 1966 को हुई थी और इसका मुख्यालय मनीला, फिलीपींस में स्थित है। यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र का प्रमुख बहुपक्षीय विकास बैंक है।
इसका उद्देश्य समृद्ध, समावेशी, सहनशील और सतत विकास को बढ़ावा देना तथा अत्यधिक गरीबी का उन्मूलन करना है।
भारत ADB से वित्तीय प्रतिबद्धताओं का लगभग 14% प्राप्त करने वाला सबसे बड़ा लाभार्थी देश है। इसके बाद चीन, बांग्लादेश, फिलीपींस और पाकिस्तान का स्थान आता है।
