राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद द्वारा 68वाँ राष्ट्रीय उत्पादकता सप्ताह 2026 में आयोजित किया जाएगा।
राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद द्वारा 68वाँ राष्ट्रीय उत्पादकता सप्ताह 2026 में आयोजित किया जाएगा।

राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद द्वारा 68वाँ राष्ट्रीय उत्पादकता सप्ताह 2026 में आयोजित किया जाएगा।

राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) 12 फरवरी 2026 को अपना 68वाँ स्थापना दिवस मनाने जा रही है। यह अवसर केवल एक संस्थागत उत्सव नहीं, बल्कि भारत में उत्पादकता, प्रतिस्पर्धात्मकता और सतत औद्योगिक विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। स्थापना दिवस के साथ ही 12 से 18 फरवरी 2026 तक पूरे देश में राष्ट्रीय उत्पादकता सप्ताह भी मनाया जाएगा, जिसमें विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम, संगोष्ठियाँ, कार्यशालाएँ और उद्योग संवाद आयोजित किए जाएंगे।

वर्ष 2026 की थीम है —
“विकास के इंजन के रूप में क्लस्टर: एमएसएमई में उत्पादकता का अधिकतमकरण”।

यह थीम स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि भारत की आर्थिक प्रगति में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है, और कैसे क्लस्टर आधारित विकास मॉडल उनके सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम बन सकता है।


थीम 2026: एमएसएमई के लिए क्लस्टर आधारित विकास क्यों महत्वपूर्ण?

भारत का एमएसएमई क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह न केवल बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करता है, बल्कि विनिर्माण, निर्यात और नवाचार को भी गति देता है। ऐसे में, एमएसएमई की उत्पादकता बढ़ाना राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकता बन जाता है।

वर्ष 2026 की थीम औद्योगिक क्लस्टरों के विकास के माध्यम से उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने पर केंद्रित है। क्लस्टर आधारित विकास का अर्थ है—एक ही क्षेत्र या उद्योग से जुड़े उद्यमों का भौगोलिक रूप से एक स्थान पर संगठित होना, जिससे संसाधनों, तकनीक और बाजार तक पहुंच को साझा किया जा सके।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री तथा एनपीसी के अध्यक्ष श्री पीयूष गोयल ने भी एमएसएमई क्षेत्र को सशक्त बनाने, विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और सतत औद्योगिकीकरण को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया है। उनका मानना है कि यदि एमएसएमई को संगठित और संरचित क्लस्टरों में विकसित किया जाए, तो वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं।


क्लस्टर आधारित विकास के प्रमुख लाभ

क्लस्टर मॉडल केवल भौगोलिक निकटता का विचार नहीं है, बल्कि यह सहयोग, नवाचार और दक्षता का एक समग्र ढांचा है। इसके कई महत्वपूर्ण लाभ हैं:

1. पैमाने की अर्थव्यवस्था (Economies of Scale)

जब कई उद्यम एक साथ कार्य करते हैं, तो उत्पादन लागत कम होती है। कच्चे माल की सामूहिक खरीद, साझा अवसंरचना और संसाधनों के संयुक्त उपयोग से लागत दक्षता बढ़ती है।

2. बेहतर आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) एकीकरण

क्लस्टर में मौजूद इकाइयाँ आपस में बेहतर तालमेल के साथ कार्य करती हैं। इससे लॉजिस्टिक्स, वितरण और आपूर्ति तंत्र अधिक सुचारु और तेज हो जाता है।

3. नई तकनीकों को अपनाने में आसानी

तकनीकी उन्नयन छोटे उद्यमों के लिए अक्सर महंगा और चुनौतीपूर्ण होता है। क्लस्टर मॉडल में साझा तकनीकी केंद्र, प्रशिक्षण सुविधाएँ और अनुसंधान समर्थन उपलब्ध कराए जा सकते हैं, जिससे आधुनिक तकनीक को अपनाना आसान हो जाता है।

4. निर्यात और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में वृद्धि

हाल के अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों और मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) के बाद भारतीय एमएसएमई के लिए वैश्विक बाजारों में अवसर बढ़े हैं। क्लस्टर आधारित विकास उन्हें गुणवत्ता, मानकीकरण और उत्पादन क्षमता में सुधार कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में मदद करता है।


राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) की भूमिका

राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद की स्थापना वर्ष 1958 में की गई थी। यह वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के अधीन एक स्वायत्त संस्था के रूप में कार्य करती है। पिछले छह दशकों से अधिक समय से एनपीसी भारत में उत्पादकता आंदोलन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

एनपीसी विभिन्न क्षेत्रों में परामर्श, प्रशिक्षण और अनुसंधान सेवाएँ प्रदान करती है, जिनमें शामिल हैं:

  • औद्योगिक अभियांत्रिकी

  • पर्यावरण एवं ऊर्जा प्रबंधन

  • कृषि-व्यवसाय

  • गुणवत्ता प्रबंधन

  • मानव संसाधन प्रबंधन

  • प्रौद्योगिकी प्रबंधन

इन सेवाओं के माध्यम से एनपीसी सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के संगठनों को दक्षता बढ़ाने, लागत कम करने और वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रतिस्पर्धात्मकता हासिल करने में सहायता प्रदान करती है।


अनुसंधान और क्षमता निर्माण में योगदान

एनपीसी केवल प्रशिक्षण संस्था नहीं है, बल्कि यह अनुसंधान और नीति समर्थन में भी सक्रिय भूमिका निभाती है। यह उत्पादकता से जुड़े विषयों पर अध्ययन, सर्वेक्षण और मूल्यांकन करती है तथा उद्योगों को सुधारात्मक सुझाव प्रदान करती है।

क्लस्टर आधारित विकास मॉडल के संदर्भ में, एनपीसी तकनीकी मार्गदर्शन, प्रक्रिया सुधार, गुणवत्ता उन्नयन और ऊर्जा दक्षता के माध्यम से एमएसएमई को दीर्घकालिक विकास के लिए सक्षम बनाती है।


वैश्विक स्तर पर एनपीसी की भागीदारी

राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद, एशियाई उत्पादकता संगठन (APO) की एक घटक संस्था है। भारत एपीओ का संस्थापक सदस्य है और वर्तमान में इसकी अध्यक्षता भी कर रहा है। यह वैश्विक मंच एनपीसी को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) को अपनाने और साझा करने का अवसर प्रदान करता है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग, ज्ञान विनिमय और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से एनपीसी भारत में उत्पादकता मानकों को ऊंचा उठाने और सतत सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखती है।

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