78 साल बाद PMO ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट: क्यों खाली किया जा रहा है साउथ ब्लॉक?
78 साल बाद PMO ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट: क्यों खाली किया जा रहा है साउथ ब्लॉक?

78 साल बाद PMO ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट: क्यों खाली किया जा रहा है साउथ ब्लॉक?

भारत के प्रशासनिक इतिहास में एक बड़ा और प्रतीकात्मक बदलाव दर्ज हुआ है। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री कार्यालय यानी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को मशहूर साउथ ब्लॉक से हटाकर रायसीना हिल के पास बने आधुनिक सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट कर दिया है।

इसके साथ ही आज़ादी के बाद से साउथ ब्लॉक में चली आ रही PMO की 78 साल पुरानी मौजूदगी का अंत हो गया। यह कदम भारत के गवर्नेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने और कॉलोनियल दौर की प्रशासनिक व्यवस्था से आगे बढ़ने का बड़ा संकेत माना जा रहा है।


क्यों जरूरी था PMO का सेवा तीर्थ में जाना?

सरकार का उद्देश्य देश के सबसे अहम प्रशासनिक कार्यालयों को एक डिजिटली इंटीग्रेटेड और हाई-सिक्योरिटी कैंपस में एक साथ लाना है।

सेवा तीर्थ में अब साथ काम करेंगे:

 प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)
 कैबिनेट सेक्रेटेरिएट
 नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट

पहले ये सभी अलग-अलग स्थानों से संचालित होते थे, जिससे कोऑर्डिनेशन और सुरक्षा में चुनौतियां आती थीं। एक ही परिसर में होने से:

फैसले तेज़ होंगे
 विभागीय तालमेल बेहतर होगा
 सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी


आखिरी कैबिनेट मीटिंग और एक युग का अंत

शिफ्ट से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने साउथ ब्लॉक में आखिरी कैबिनेट मीटिंग की अध्यक्षता की।
यह सिर्फ एक बैठक नहीं थी, बल्कि भारत के प्रशासनिक इतिहास के एक पूरे अध्याय का समापन था।

साउथ ब्लॉक वही इमारत है जहां से:

 आज़ादी के बाद भारत की पहली सरकार चली
 ऐतिहासिक नीतिगत फैसले हुए
 भारत की विदेश और रक्षा रणनीति तय हुई


अब साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक का क्या होगा?

सरकार की योजना है कि नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक को अब पारंपरिक पावर सेंटर की जगह एक भव्य राष्ट्रीय संग्रहालय परिसर में बदला जाए।

इन्हें “युगीन भारत नेशनल म्यूजियम” के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां:

 भारत की सभ्यता और इतिहास दिखाया जाएगा
 प्रशासनिक विरासत संरक्षित रहेगी
 आम जनता के लिए खुले सांस्कृतिक केंद्र बनेंगे

इस तरह कॉलोनियल ढांचे को मिटाने के बजाय उसे राष्ट्र की धरोहर में बदला जाएगा।


सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स: भविष्य का प्रशासनिक मॉडल

सेवा तीर्थ को पूरी तरह आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल कार्यस्थल के रूप में डिजाइन किया गया है।

इसकी प्रमुख खूबियाँ:

 स्मार्ट सिक्योरिटी और सर्विलांस सिस्टम
 डिजिटल रूप से कनेक्टेड ऑफिस इंफ्रास्ट्रक्चर
 बड़े कॉन्फ्रेंस हॉल और पब्लिक इंटरफेस ज़ोन
 रिन्यूएबल एनर्जी और वॉटर सेविंग सिस्टम
 सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट

यह परिसर 4-स्टार GRIHA ग्रीन बिल्डिंग स्टैंडर्ड पर बना है, जिससे पर्यावरण पर असर न्यूनतम रहेगा।


PMO का छोटा लेकिन ऐतिहासिक सफर

PMO का विकास भारत की प्रशासनिक सोच के साथ जुड़ा रहा है:

 1947 – प्राइम मिनिस्टर सेक्रेटेरिएट के रूप में शुरुआत
 1964 – लाल बहादुर शास्त्री के समय औपचारिक दर्जा
 इंदिरा गांधी के दौर में शक्तियों का विस्तार
 1977 – नाम बदलकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)

साउथ ब्लॉक, जहां यह सब चला, ब्रिटिश शासन में 1931 में पूरा हुआ था।


क्यों माना जा रहा है यह कदम प्रतीकात्मक?

सरकार के अनुसार यह सिर्फ जगह बदलना नहीं, बल्कि:

 कॉलोनियल शासन की विरासत से दूरी
 आधुनिक डिजिटल गवर्नेंस की ओर कदम
 आत्मनिर्भर और नए भारत की प्रशासनिक पहचान

का संकेत है।

13 फरवरी की तारीख को किया गया यह ट्रांज़िशन भी खास है — यही वह दिन था जब ब्रिटिश शासन ने नई दिल्ली को राजधानी घोषित किया था।


भारत के शासन तंत्र में क्या बदलेगा?

PMO के सेवा तीर्थ में जाने से:

 प्रशासनिक क्षमता बढ़ेगी
 सुरक्षा कई गुना मजबूत होगी
 फैसले लेने की रफ्तार तेज़ होगी
 आधुनिक तकनीक का बेहतर इस्तेमाल होगा
 पर्यावरण के अनुकूल सरकारी ढांचा बनेगा


निष्कर्ष: पुराने युग से नए भारत की ओर

PMO का साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ में जाना भारत के प्रशासनिक इतिहास का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रांज़िशन माना जा रहा है।

यह बदलाव दिखाता है कि भारत अब:

 आधुनिक व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है
 डिजिटल गवर्नेंस को प्राथमिकता दे रहा है
 विरासत को सहेजते हुए भविष्य गढ़ रहा है

78 साल बाद हुआ यह परिवर्तन आने वाले दशकों के लिए भारत के शासन मॉडल को नई दिशा देगा।


 परीक्षा आधारित सवाल

प्रश्न: 2026 में PMO को किस ऐतिहासिक इमारत से शिफ्ट किया गया?

A. राष्ट्रपति भवन
B. नॉर्थ ब्लॉक
C. साउथ ब्लॉक
D. वायु भवन

 सही उत्तर: C. साउथ ब्लॉक

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