राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित Global Conference on Women in Agri-Food Systems (GCWAS-2026) के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। इस सम्मेलन का उद्देश्य कृषि और खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करना तथा इस क्षेत्र में लैंगिक समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।
इस वैश्विक सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, कृषि विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य फोकस कृषि-खाद्य क्षेत्र में महिलाओं को अधिक अवसर प्रदान करने, उनकी भागीदारी बढ़ाने और उनके लिए सहयोगी नीतियाँ तैयार करने पर रहा।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं के बिना कृषि क्षेत्र की कल्पना अधूरी है। उन्होंने बताया कि भारत सहित दुनिया के कई देशों में महिलाएँ कृषि उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्यमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
GCWAS-2026 सम्मेलन का उद्देश्य
GCWAS-2026 सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य टिकाऊ कृषि प्रणालियों के निर्माण में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करना और कृषि क्षेत्र में लैंगिक समानता को बढ़ावा देना है।
इस सम्मेलन में यह चर्चा की जा रही है कि किस प्रकार नीति-निर्माण, तकनीक, शिक्षा और वित्तीय सहायता के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी को और अधिक बढ़ाया जा सकता है।
कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला—जिसमें उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन और विपणन शामिल हैं—में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने के लिए विभिन्न देशों के अनुभव और सफल मॉडल भी साझा किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महिलाओं को समान अवसर, संसाधनों तक पहुंच और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी मिले तो कृषि क्षेत्र अधिक उत्पादक, टिकाऊ और समावेशी बन सकता है।
कृषि क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाएँ कृषि उत्पादन के लगभग हर चरण में सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने बताया कि खेती की प्रक्रिया में बीज बोने से लेकर फसल की कटाई, भंडारण और विपणन तक महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान होता है। ग्रामीण भारत में महिलाएँ अक्सर खेतों में पुरुषों के साथ मिलकर काम करती हैं और कई बार कृषि कार्यों की मुख्य जिम्मेदारी भी संभालती हैं।
राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि कृषि के अलावा कई सहायक गतिविधियों में भी महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। इनमें शामिल हैं—
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मत्स्य पालन
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मधुमक्खी पालन
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पशुपालन
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दुग्ध उत्पादन
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वन आधारित आजीविका
इन क्षेत्रों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
कृषि शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
राष्ट्रपति मुर्मू ने यह भी बताया कि भारत में कृषि शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों में 50 प्रतिशत से अधिक छात्राएँ हैं। कुछ संस्थानों में यह संख्या 60 प्रतिशत से भी अधिक पहुंच चुकी है।
उन्होंने कहा कि यह बदलाव इस बात का संकेत है कि महिलाएँ कृषि विज्ञान, कृषि प्रबंधन और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि छात्राएँ न केवल संख्या में बढ़ रही हैं बल्कि वे शैक्षणिक प्रदर्शन के मामले में भी उत्कृष्ट परिणाम हासिल कर रही हैं। इससे कृषि क्षेत्र में भविष्य में महिला वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और उद्यमियों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
संयुक्त राष्ट्र की घोषणा: 2026 ‘महिला किसान का अंतरराष्ट्रीय वर्ष’
अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2026 को ‘महिला किसान का अंतरराष्ट्रीय वर्ष’ घोषित किया है।
इस पहल का उद्देश्य दुनिया भर में कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को मान्यता देना और लैंगिक असमानताओं को कम करना है।
संयुक्त राष्ट्र की इस घोषणा के तहत विभिन्न देशों को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे महिलाओं को भूमि, वित्तीय संसाधनों, तकनीक और प्रशिक्षण तक बेहतर पहुंच प्रदान करें। इसके साथ ही महिलाओं को कृषि नीति-निर्माण और नेतृत्व की भूमिका में आगे लाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
लैंगिक समानता से मजबूत होगा कृषि क्षेत्र
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि क्षेत्र में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने से खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास को भी मजबूती मिलेगी।
जब महिलाओं को कृषि संसाधनों तक समान पहुंच मिलती है तो कृषि उत्पादन बढ़ता है, परिवारों की आय में सुधार होता है और पोषण स्तर भी बेहतर होता है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाकर ही कृषि-खाद्य प्रणालियों को अधिक समावेशी, टिकाऊ और प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने सरकारों, संस्थानों और समाज से अपील की कि वे महिलाओं के लिए अनुकूल नीतियाँ और अवसर सुनिश्चित करें।

