31 अगस्त से 1 सितंबर तक तिआनजिन, चीन में आयोजित किए जाने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी अगली बड़ी यात्रा पर होंगे — यह 2020 के गलवान झड़प के बाद उनका चीन का पहला दौरा है IndiatimesReuters। इसे भारत–चीन संबंधों में तनावपूर्ण दौर के बाद एक सतर्क पुनर्मूल्यांकन माना जा रहा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: दोस्ती से तनाव तक
• शुरुआती दौर (1950–60):
1950 में भारत पीआरसी के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाला पहला गैर-सोवियत देश बना। 1954 के पंचशील समझौते ने “हिंदी-चीनी भाई-भाई” के भाव को मजबूती दी।
• टकराव के दशक (1960–80):
1962 का युद्ध संबंधों को गहरा क्षतिग्रस्त कर गया। हालांकि 1988 में राजीव गांधी की चीन यात्रा के बाद WMCC जैसे तंत्र स्थापित हुए।
• आर्थिक जुड़ाव और तनाव (1990–2000):
चीन, 2008 तक भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बना। समझौतों के बावजूद सीमा विवाद बना रहा।
• हालिया तनाव (2010–अब):
2017 में डोकलाम गतिरोध, 2020 में गलवान झड़प — फिर भी 2024 में काज़ान में हुई BRICS बैठक ने संवाद की राह खोली, जिसके बाद सीमावर्ती शांति को पोषण मिला Indiatimeswww.ndtv.comReddit।
2025 का SCO शिखर सम्मेलन: नई उम्मीद की किरण
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मोदी का चीन दौरा: यह उनके 2019 के बाद पहला दौरा है, और गलवान झड़प के बाद यह एक महत्वपूर्ण संकेत है कि द्विपक्षीय वार्ता पुनः शुरू हो सकती है www.ndtv.comIndiatimesThe Times of India।
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गठबंधन-आधारित बहुपक्षीयता: SCO जैसे मंच पर террорवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा जैसे मुद्दों पर सहयोग चर्चा की उम्मीद है MoneycontrolIndiatimes।
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“दोस्ती की सभा”: चीनी विदेश मंत्रालय की टिप्पणी इससे यह संकेत मिल रहा है कि शिखर सम्मेलन द्विपक्षीय शीतलता बहाल करने में सहायक हो सकता है The Times of India।
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साइड-बिलैटरल्स: शिखर सम्मेलन में मोदी–शी और मोदी–पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक की संभावना बनी है India TodayMoneycontrol।
आर्थिक असंतुलन: व्यापार घाटा गहराया
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रिकॉर्ड व्यापार घाटा: FY 2024–25 में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा $99.2 बिलियन तक पहुंचा। ₹113.5 अरब का आयात और केवल ₹14.3 अरब का निर्यात दर्ज हुआ ReutersThe Economic Times।
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आयात निर्भरता: इलेक्ट्रॉनिक्स, EV बैटरी, और सौर सेल्स सहित प्रमुख क्षेत्र चीन पर निर्भर बने हुए हैं Reuters।
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नीति प्रतिक्रियाएँ: भारत सरकार ने सस्ते आयातों की निगरानी हेतु एक मोनिटरिंग यूनिट की घोषणा की है ReutersThe Economic Times।
रणनीतिक चुनौतियाँ और विश्वास की कमी
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सीमा विवाद और सैन्यीकरण: चीन अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश में डिफ़ेंस इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रहा है, जिससे भारत की सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हैं।
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विश्वास का संकट: गलवान की हिंसा ने अविश्वास को गहरा कर दिया। बातचीत के बावजूद समझौतों पर भरोसा अभी कमज़ोर है।
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प्रौद्योगिकीय निर्भरता: भारतीय बाजार में चीनी स्मार्टफोन कंपनियों की दबदबा चिंता का विषय है।
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क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा: BRI और CPEC जैसी परियोजनाएँ भारत की रणनीतिक गोद पर सवाल खड़ी करती हैं।
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समुद्री सुरक्षा: हिंद महासागर में चीन का प्रभाव बढ़ रहा है। भारत “नेकलेस ऑफ डायमंड्स” रणनीति के जरिए शत्रुता को संतुलित करने का प्रयास कर रहा है।
आगे की रणनीतिक राह: क्या मिलेगी दिशा?
| रणनीतिक रुख | संभावित पहलগুলো |
|---|---|
| रणनीतिक संवाद | WMCC वार्ता, विशेष प्रतिनिधि वार्ताओं को पुनर्जीवित करना |
| आर्थिक संतुलन | “चीन +1” नीति पर जोर, मेक इन इंडिया को मज़बूत करना |
| सीमा इंफ्रास्ट्रक्चर | Vibrant Villages, रक्षा संरचना का विकास |
| समुद्री रक्षा | SAGARMALA, QUAD सहयोग को मजबूत बनाना |
| तकनीकी आत्मनिर्भरता | PLI योजनाओं में निवेश, एपीआई और सेमीकंडक्टर निर्माण |
| सांस्कृतिक पुल | कैलाश–मानसरोवर यात्रा जैसे प्रोजेक्ट्स से जनविश्वास बढ़ाना |
निष्कर्ष
SCO शिखर सम्मेलन भारत–चीन संबंधों में संभावित संवाद और संतुलन वापसी का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। यह यात्रा, सिर्फ धारणा को बदलने का माध्यम नहीं, बल्कि एक रणनीतिक सामंजस्य और भारत-चीन संबंधों में नए युग की शुरुआत का संकेत भी हो सकती है।

