इसरो की बड़ी सफलता: CE-20 क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण
इसरो की बड़ी सफलता: CE-20 क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण

इसरो की बड़ी सफलता: CE-20 क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को एक और बड़ी तकनीकी सफलता मिली है। Indian Space Research Organisation (ISRO) ने अपने उन्नत CE-20 Cryogenic Engine का समुद्र-स्तर (Sea-Level) पर सफल हॉट टेस्ट किया है।

यह परीक्षण ISRO Propulsion Complex में किया गया, जहाँ इंजन ने 22 टन थ्रस्ट के स्तर पर सफलतापूर्वक कार्य किया। इस उपलब्धि से भारत के भारी प्रक्षेपण यान LVM3 की पेलोड क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

यह परीक्षण भारत की क्रायोजेनिक रॉकेट तकनीक में लगातार हो रही प्रगति का भी संकेत है।


CE-20 इंजन का सफल सी-लेवल हॉट टेस्ट

इसरो ने 10 मार्च को CE-20 क्रायोजेनिक इंजन का समुद्र-स्तर पर हॉट टेस्ट किया। परीक्षण के दौरान इंजन 165 सेकंड तक 22 टन थ्रस्ट पर सफलतापूर्वक संचालित हुआ।

परीक्षण के दौरान अत्याधुनिक तकनीकों और सुरक्षा प्रणालियों का उपयोग किया गया, जिससे इंजन का संचालन पूरी तरह स्थिर और सुरक्षित बना रहा।

परीक्षण की मुख्य विशेषताएँ

  • इंजन का परीक्षण नोज़ल सुरक्षा प्रणाली (NPS) के साथ किया गया

  • इंजन को शुरू करने के लिए मल्टी-एलिमेंट इग्नाइटर का उपयोग किया गया

  • इंजन 165 सेकंड तक बिना किसी समस्या के संचालित हुआ

  • पूरे परीक्षण के दौरान इंजन का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप रहा

इससे पहले नोज़ल सुरक्षा प्रणाली के साथ समुद्र-स्तर परीक्षण 19 टन थ्रस्ट पर किए गए थे। इसलिए 22 टन थ्रस्ट पर किया गया यह परीक्षण एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति माना जा रहा है।


LVM3 रॉकेट में CE-20 इंजन की भूमिका

CE-20 क्रायोजेनिक इंजन भारत के भारी प्रक्षेपण यान LVM3 का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह इंजन रॉकेट के ऊपरी क्रायोजेनिक चरण (C25) को शक्ति प्रदान करता है।

LVM3 भारत का सबसे शक्तिशाली ऑपरेशनल रॉकेट है और इसका उपयोग भारी उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए किया जाता है।

CE-20 इंजन के प्रमुख उपयोग

  • LVM3 के क्रायोजेनिक ऊपरी चरण को शक्ति प्रदान करना

  • भारी संचार उपग्रहों का प्रक्षेपण

  • वैज्ञानिक और गहरे अंतरिक्ष मिशनों का समर्थन

  • मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए प्रक्षेपण क्षमता उपलब्ध कराना

इसरो भविष्य में अपग्रेडेड C32 चरण का उपयोग करने की योजना बना रहा है, जिसमें CE-20 इंजन को 22 टन थ्रस्ट पर संचालित किया जाएगा। इससे LVM3 की पेलोड क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।


समुद्र-स्तर पर परीक्षण क्यों चुनौतीपूर्ण होता है?

क्रायोजेनिक रॉकेट इंजनों का समुद्र-स्तर पर परीक्षण तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि ऐसे इंजनों के नोज़ल मुख्य रूप से अंतरिक्ष की कम दबाव वाली परिस्थितियों के लिए डिजाइन किए जाते हैं।

प्रमुख तकनीकी चुनौतियाँ

  • उच्च एरिया रेशियो नोज़ल

  • अत्यंत कम एग्ज़िट प्रेशर (लगभग 50 मिलीबार)

  • नोज़ल के भीतर फ्लो सेपरेशन की संभावना

इन परिस्थितियों के कारण निम्न समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं:

  • तेज कंपन

  • अधिक तापीय तनाव

  • संभावित यांत्रिक क्षति

इन चुनौतियों से निपटने के लिए इसरो ने नोज़ल सुरक्षा प्रणाली (NPS) का उपयोग किया। इस प्रणाली की मदद से परीक्षण के दौरान इंजन का संचालन पूरी तरह स्थिर बना रहा।


रिकॉर्ड संख्या में परीक्षण वाला इंजन

इस परीक्षण में उपयोग किया गया CE-20 इंजन अब तक 20 सफल हॉट टेस्ट से गुजर चुका है। इससे यह इसरो द्वारा विकसित सबसे अधिक परीक्षण किए गए क्रायोजेनिक इंजनों में से एक बन गया है।

इन परीक्षणों के दौरान कई महत्वपूर्ण तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।

प्रमुख तकनीकी परीक्षण

  • मल्टी-एलिमेंट इग्नाइटर सिस्टम

  • गगनयान मिशन के लिए विस्तृत इग्निशन मार्जिन परीक्षण

  • मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों के लिए इंजन योग्यता परीक्षण

  • अधिक थ्रस्ट स्तर पर इंजन संचालन

इन परीक्षणों से इंजन की विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिली है।


भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्व

CE-20 इंजन का यह सफल परीक्षण भारत की भारी प्रक्षेपण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे भारत के भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे।

इस परीक्षण के प्रमुख लाभ

  • LVM3 की पेलोड क्षमता में वृद्धि

  • भविष्य के उपग्रह प्रक्षेपणों को बेहतर समर्थन

  • मानव अंतरिक्ष मिशन Gaganyaan की तैयारी को मजबूती

  • भारत की क्रायोजेनिक प्रणोदन तकनीक में प्रगति

इन तकनीकी सुधारों से भारत की अंतरिक्ष प्रक्षेपण क्षमता और मजबूत होगी और भविष्य के जटिल अंतरिक्ष मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा करने में मदद मिलेगी।

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