दुनिया में सबसे ज्यादा गैस भंडार किन देशों के पास हैं? भारत को LPG कौन देता है सबसे ज्यादा?
दुनिया में सबसे ज्यादा गैस भंडार किन देशों के पास हैं? भारत को LPG कौन देता है सबसे ज्यादा?

दुनिया में सबसे ज्यादा गैस भंडार किन देशों के पास हैं? भारत को LPG कौन देता है सबसे ज्यादा?

वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। हाल ही में ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात ने कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराने लगा है। इसका असर भारत पर भी साफ दिखाई दे रहा है, जहां एलपीजी (LPG) की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।

भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में वैश्विक आपूर्ति में थोड़ी सी भी कमी घरेलू बाजार में बड़ी समस्या बन जाती है।


भारत में LPG संकट क्यों बढ़ रहा है?

ईरान से जुड़े तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई “टाइट” हो गई है, यानी बाजार में उपलब्धता कम हो गई है। इससे गैस की कीमतों और सप्लाई दोनों पर दबाव बढ़ा है।

हालांकि भारत ने इस स्थिति से निपटने के लिए घरेलू उत्पादन में लगभग 36% की वृद्धि की है, लेकिन इसके बावजूद कुल उपलब्धता मांग के मुकाबले कम बनी हुई है।

पिछले कुछ दिनों में कई जगहों पर LPG सिलेंडर की कमी और देरी की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी हो रही है। खासकर ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के परिवार इस संकट से अधिक प्रभावित हो रहे हैं।


भारत में LPG की खपत और निर्भरता

भारत दुनिया के सबसे बड़े LPG उपभोक्ताओं में से एक है।

मुख्य आंकड़े:

  • 33 करोड़ से ज्यादा घरों में LPG का उपयोग

  • 10 करोड़ से अधिक उज्ज्वला योजना लाभार्थी

  • करीब 3 करोड़ टन वार्षिक खपत

लेकिन चिंता की बात यह है कि:

  • केवल 40% (लगभग 1.24 करोड़ टन) LPG का उत्पादन देश में होता है

  • जबकि 60% LPG आयात करना पड़ता है

यानी भारत अपनी जरूरतों के लिए काफी हद तक बाहरी देशों पर निर्भर है। यही वजह है कि वैश्विक संकट का असर सीधे भारत के घरेलू बाजार पर पड़ता है।


दुनिया में LPG का सबसे बड़ा उत्पादक कौन है?

दुनिया में LPG उत्पादन के मामले में संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) सबसे आगे है।

अमेरिका न केवल कच्चे तेल बल्कि LPG उत्पादन में भी अग्रणी है। वैश्विक उत्पादन में उसका हिस्सा 25% से अधिक माना जाता है, जो किसी भी अन्य देश से काफी ज्यादा है।

LPG क्या है और कैसे बनती है?

LPG मुख्य रूप से दो गैसों का मिश्रण होती है:

  • प्रोपेन (Propane)

  • ब्यूटेन (Butane)

इसे उच्च दबाव में लिक्विड रूप में बदला जाता है, जिससे इसका स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट आसान हो जाता है।

उत्पादन के मुख्य तरीके:

  1. नेचुरल गैस प्रोसेसिंग

  2. क्रूड ऑयल रिफाइनिंग

अमेरिका के बाद चीन, सऊदी अरब, रूस और कनाडा जैसे देश भी बड़े LPG उत्पादक हैं, लेकिन इनका उत्पादन अमेरिका की तुलना में काफी कम है।


भारत को LPG सबसे ज्यादा कहां से मिलती है?

भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसमें खाड़ी देशों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

भारत के प्रमुख LPG सप्लायर:

1. कतर (Qatar)

भारत को सबसे ज्यादा LPG सप्लाई करने वाला देश है।

  • कुल आयात का लगभग 34% हिस्सा

  • हाल ही में भारत-कतर के बीच 78 अरब डॉलर का समझौता

  • 2048 तक सालाना 75 लाख टन LNG सप्लाई

2. संयुक्त अरब अमीरात (UAE)

  • भारत का प्रमुख ऊर्जा साझेदार

  • तेज और स्थिर सप्लाई

3. संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)

  • हाल के वर्षों में भारत के लिए महत्वपूर्ण सप्लायर बना

  • वैकल्पिक स्रोत के रूप में उभरा

4. ओमान (Oman)

  • खाड़ी क्षेत्र से स्थिर आपूर्ति

5. ऑस्ट्रेलिया और रूस

  • दीर्घकालिक ऊर्जा समझौते

  • सप्लाई में विविधता लाने में मदद


LPG संकट का आम जनता पर असर

LPG की कमी का सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ता है:

  • घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी

  • सिलेंडर की डिलीवरी में देरी

  • ग्रामीण क्षेत्रों में वैकल्पिक ईंधन (लकड़ी, कोयला) की ओर वापसी

  • छोटे व्यवसायों और होटल उद्योग पर असर

यह स्थिति सरकार के लिए भी चुनौतीपूर्ण बन जाती है, क्योंकि LPG को स्वच्छ ईंधन के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है।


भारत की रणनीति: संकट से निपटने के उपाय

भारत इस संकट से निपटने के लिए कई कदम उठा रहा है:

1. आयात स्रोतों का विस्तार

केवल खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका और अन्य देशों से आयात बढ़ाया जा रहा है।

2. घरेलू उत्पादन में वृद्धि

नई तकनीकों और निवेश के जरिए उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

3. रणनीतिक भंडारण

आपातकालीन स्थितियों के लिए गैस भंडारण क्षमता बढ़ाई जा रही है।

4. वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत

सौर और बायोगैस जैसे विकल्पों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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