भारत में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लघु जलविद्युत (Small Hydro Power – SHP) विकास योजना को मंजूरी दे दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026–27 से 2030–31 तक लागू रहेगी और इसके लिए ₹2584.60 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है।
इस योजना का मुख्य लक्ष्य देशभर में लगभग 1500 मेगावाट लघु जलविद्युत क्षमता विकसित करना है, जिससे खासकर पहाड़ी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में ऊर्जा पहुंच और विकास को बढ़ावा मिलेगा।
क्या है लघु जलविद्युत (SHP) योजना?
लघु जलविद्युत परियोजनाएं वे होती हैं जिनकी क्षमता 1 मेगावाट से 25 मेगावाट तक होती है।
ये बड़े बांधों की तुलना में—
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पर्यावरण के अनुकूल होती हैं
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कम लागत में तैयार होती हैं
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स्थानीय स्तर पर बिजली उपलब्ध कराती हैं
भारत जैसे विविध भौगोलिक देश में, खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में, SHP परियोजनाओं की बड़ी संभावनाएं हैं।
योजना के मुख्य उद्देश्य
सरकार की इस योजना का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि समग्र विकास सुनिश्चित करना है।
प्रमुख लक्ष्य:
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अप्रयुक्त जलविद्युत क्षमता का उपयोग करना
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स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना
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न्यूनतम पर्यावरणीय प्रभाव के साथ बिजली उत्पादन
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दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देना
यह योजना भारत के ग्रीन एनर्जी लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
वित्तीय सहायता: राज्यों को कैसे मिलेगा लाभ?
इस योजना के तहत राज्यों को उनकी भौगोलिक स्थिति के आधार पर वित्तीय सहायता दी जाएगी।
1. पूर्वोत्तर और सीमा क्षेत्र:
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₹3.6 करोड़ प्रति मेगावाट
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या परियोजना लागत का 30%
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अधिकतम ₹30 करोड़ प्रति परियोजना
2. अन्य राज्य:
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₹2.4 करोड़ प्रति मेगावाट
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या लागत का 20%
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अधिकतम ₹20 करोड़ प्रति परियोजना
👉 कुल ₹2,532 करोड़ विशेष रूप से परियोजनाओं के विकास के लिए आवंटित किए गए हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
यह योजना भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने के साथ-साथ बड़े निवेश को भी आकर्षित करेगी।
संभावित लाभ:
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लगभग ₹15,000 करोड़ के निवेश की संभावना
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स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि
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ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा
‘आत्मनिर्भर भारत’ को मिलेगा समर्थन
इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसमें 100% स्वदेशी उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसके फायदे:
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आयात पर निर्भरता कम होगी
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घरेलू उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा
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तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी
यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूत करने में सहायक होगी।
रोजगार और ग्रामीण विकास
लघु जलविद्युत योजना केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजगार सृजन में भी अहम भूमिका निभाएगी।
रोजगार के अवसर:
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निर्माण के दौरान लगभग 51 लाख मानव-दिवस (person-days) रोजगार
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संचालन और रखरखाव में दीर्घकालिक रोजगार
ग्रामीण क्षेत्रों पर प्रभाव:
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दूरदराज क्षेत्रों में बिजली पहुंच
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स्थानीय उद्योग और व्यवसाय को बढ़ावा
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जीवन स्तर में सुधार
किन क्षेत्रों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
यह योजना खासतौर पर उन क्षेत्रों के लिए लाभदायक होगी जहां जल संसाधन प्रचुर मात्रा में हैं:
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पूर्वोत्तर राज्य
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हिमालयी क्षेत्र
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पहाड़ी और दुर्गम इलाके
इन क्षेत्रों में SHP परियोजनाएं न केवल बिजली उपलब्ध कराएंगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी गति देंगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना?
1. स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम
यह योजना भारत को जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी।
2. पर्यावरण संरक्षण
छोटी जलविद्युत परियोजनाएं बड़े बांधों की तुलना में कम पर्यावरणीय नुकसान पहुंचाती हैं।
3. ऊर्जा आत्मनिर्भरता
देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को खुद पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
4. संतुलित क्षेत्रीय विकास
दूरदराज और पिछड़े क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा में लाने में मदद मिलेगी।

