भारत में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए गुजरात ने 24 मार्च 2026 को राज्य विधानसभा में UCC विधेयक पारित कर दिया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में लाया गया यह कानून अब राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा लागू करेगा। इसके साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद UCC लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है।
क्या है गुजरात UCC Bill 2026?
गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल, 2026 का उद्देश्य राज्य में सभी नागरिकों के लिए—धर्म, जाति या समुदाय की परवाह किए बिना—एक समान नागरिक कानून लागू करना है। वर्तमान में भारत में विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू हैं, जिनके कारण कई बार कानूनी जटिलताएं और असमानताएं उत्पन्न होती हैं।
UCC इन अलग-अलग कानूनों को एक समान कानूनी ढांचे से प्रतिस्थापित करता है, जिससे कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित की जा सके। इस विधेयक को राज्य सरकार द्वारा नियुक्त समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
गुजरात UCC बिल में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनका उद्देश्य व्यक्तिगत कानूनों को मानकीकृत करना है:
1. एक समान विवाह और तलाक कानून
सभी धर्मों के लिए विवाह और तलाक के नियम एक जैसे होंगे, जिससे कानूनी प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनेगी।
2. द्विविवाह (Polygamy) पर प्रतिबंध
यदि किसी व्यक्ति का जीवनसाथी जीवित है, तो वह दूसरा विवाह नहीं कर सकेगा। यह प्रावधान लैंगिक समानता को मजबूत करता है।
3. लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण
लिव-इन संबंधों को कानूनी मान्यता देने के लिए उनका पंजीकरण आवश्यक होगा, साथ ही संबंध समाप्त करने के लिए औपचारिक प्रक्रिया भी तय की गई है।
4. उत्तराधिकार और विरासत में समानता
संपत्ति के अधिकारों को सभी नागरिकों के लिए समान बनाया गया है, जिससे पारिवारिक विवादों और कानूनी जटिलताओं में कमी आएगी।
किन्हें मिलेगी छूट?
इस विधेयक के तहत कुछ समुदायों को छूट भी प्रदान की गई है। विशेष रूप से अनुसूचित जनजातियों (ST) और कुछ अन्य पारंपरिक समूहों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
यह छूट भारतीय संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत आदिवासी समुदायों को मिले विशेष संरक्षण के अनुरूप है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 44
समान नागरिक संहिता का विचार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में निहित है। यह राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
हालांकि, यह राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों (DPSP) का हिस्सा है और न्यायालय द्वारा बाध्यकारी नहीं है। इसका कार्यान्वयन पूरी तरह से सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति और विधायी प्रक्रिया पर निर्भर करता है।
गुजरात UCC कानून का महत्व
गुजरात में UCC लागू होना कई दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण है:
कानूनी समानता को बढ़ावा
यह कानून सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करता है, जिससे भेदभाव की संभावनाएं कम होती हैं।
महिलाओं के अधिकारों को मजबूती
विवाह, तलाक और संपत्ति के मामलों में महिलाओं को समान अधिकार मिलने से लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा।
कानूनी प्रक्रिया में सरलता
एक समान कानून होने से न्यायिक प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी।
चुनौतियां और बहस
हालांकि इस कानून को सुधार के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इससे कुछ महत्वपूर्ण बहसें भी सामने आई हैं:
- धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक विविधता पर प्रभाव
- विभिन्न समुदायों की सहमति और स्वीकृति
- कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की चुनौती
UCC भारत जैसे विविधता वाले देश में हमेशा एक संवेदनशील विषय रहा है, इसलिए इसका संतुलित और समावेशी कार्यान्वयन बेहद महत्वपूर्ण होगा।
उत्तराखंड के बाद दूसरा राज्य
इससे पहले उत्तराखंड ने 2024 में UCC लागू कर देश में पहला उदाहरण पेश किया था। अब गुजरात का यह कदम राज्य स्तर पर UCC के विस्तार को दर्शाता है और भविष्य में अन्य राज्यों तथा राष्ट्रीय स्तर पर भी इस पर चर्चा को गति दे सकता है।
निष्कर्ष
Gujarat UCC Bill 2026 का पारित होना भारत में कानूनी सुधार और सामाजिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित करता है, बल्कि देश में एक समान नागरिक ढांचा स्थापित करने की दिशा में भी मजबूत संकेत देता है। आने वाले समय में इसका प्रभाव अन्य राज्यों और राष्ट्रीय नीति पर भी देखने को मिल सकता है।
MCQ (प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए)
प्रश्न: भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में समान नागरिक संहिता (UCC) का उल्लेख है?
A. अनुच्छेद 21
B. अनुच्छेद 32
C. अनुच्छेद 44 ✅
D. अनुच्छेद 370

